एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: मार्च की गिरावट 'हेल्दी रीसेट' या संकट? मोनार्क नेटवर्थ के CEO से जानें रिकवरी का रोडमैप

मिडिल ईस्ट तनाव शुरू होने के बाद मार्च में भारतीय शेयर बाजार को बड़ा झटका लगा। लेकिन, अप्रैल में रिकवरी देखी जा रही है। बाजार के ऐसे दौर में मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल के CEO गौरव भंडारी ने निवेशकों को रिकवरी का रोडमैप बताया है।   

Shivam Shukla
अपडेटेड17 Apr 2026, 03:10 PM IST
मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल लिमिटेड केे CEO गौरव भंडारी
मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल लिमिटेड केे CEO गौरव भंडारी

Monarch Networth CEO Interview: शेयर बाजार ने मार्च 2026 में निवेशकों को तगड़ा झटका दिया। इस दौरान निफ्टी और सेंसेक्स में लगभग 11% की तेज गिरावट दर्ज की गई। खासकर मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में आई गिरावट ने रिटेल इन्वेस्टर्स चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि, अप्रैल की रिकवरी ने एक बार फिर उम्मीदें जगाई हैं, लेकिन बाजार की दिशा को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। क्या यह गिरावट केवल एक 'हेल्दी करेक्शन' थी या आने वाले बड़े संकट का संकेत? अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय बाजार पर क्या असर होगा? और इस उतार-चढ़ाव वाले माहौल में एक आम निवेशक को अपना पोर्टफोलियो कैसे मैनेज करना चाहिए? इन्हीं विषयों पर मिंट हिंदी के शिवम शुक्ला ने मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल (Monarch Networth Capital) के CEO गौरव भंडारी के साथ बातचीत की है।

पेश हैं इस खास इंटरव्यू के मुख्य अंश:

1. मार्च 2026 में निफ्टी और सेंसेक्स में जो 10-11% की तेज गिरावट आई, उसे आप कैसे देखते हैं? क्या यह जरूरत से ज्यादा बढ़ी वैल्यूएशन का संकेत था, खासकर मिडकैप और स्मॉलकैप में, या यह केवल हेल्दी करेक्शन था? अप्रैल की रिकवरी पर आपकी क्या राय है?

उत्तर: मार्च में आई 10-11% की गिरावट बाजार का कोई स्ट्रक्चरल ब्रेकडाउन नहीं था, बल्कि एक 'हेल्दी रीसेट' था। पिछले 24 महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में जो जबरदस्त तेजी आई थी, उसके बाद इस करेक्शन की जरूरत थी। बाजार में सब कुछ बहुत अच्छा होने की उम्मीदें पहले ही जुड़ चुकी थीं, इसलिए कुछ हद तक गिरावट आना तय था। अच्छी बात यह है कि अप्रैल में बाजार ने बहुत समझदारी के साथ तेजी से वापसी की है। इससे साफ पता चलता है कि बाजार में नकदी (Liquidity), कंपनियों की कमाई और निवेशकों का भरोसा पूरी तरह बरकरार है।

2. मार्च की गिरावट के बाद रिटेल निवेशक अभी भी थोड़े डरे हुए हैं। ऐसे समय में उन्हें क्या करना चाहिए-मार्केट से निकल जाना चाहिए या अपनी SIP जारी रखते हुए चुनिंदा शेयरों में खरीदारी करनी चाहिए?

उत्तर: रिटेल निवेशकों को 'मार्केट टाइमिंग' के लालच से बचना चाहिए। इतिहास गवाह है कि उतार-चढ़ाव के दौरान सबसे बड़ी गलती घबराहट में बाजार से बाहर निकलना और फिर हाई लेवल पर दोबारा एंट्री करना है। यह दौर अनुशासित तरीके से SIP जारी रखने और अच्छी क्वालिटी वाली कंपनियों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने का है। यही रणनीति लंबे समय में बड़ी वेल्थ बनाने में मदद करेगी।

यह भी पढ़ें | 'भारत से मेरा एक दोस्त...' : पीएम मोदी से बात कर गदगद हुए डोनाल्ड ट्रंप

3. अमेरिका-ईरान तनाव जैसी वैश्विक अनिश्चितताएं भारतीय बाजारों को कितना प्रभावित कर सकती हैं? क्या सीजफायर की उम्मीदों के बावजूद अभी भी जोखिम बना हुआ है?

उत्तर: वैश्विक तनाव निश्चित रूप से बाजार में अस्थिरता पैदा करते हैं। हालांकि, सीजफायर की खबरें राहत देती हैं, लेकिन जियो-पॉलिटिकल रिस्क हमेशा बने रहते हैं, क्योंकि इनका असर कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ता है। भारतीय बाजार अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हैं, लेकिन निवेशकों को इन बाहरी खबरों पर नजर रखनी चाहिए और किसी भी बड़े ग्लोबल झटके के लिए अपने पोर्टफोलियो में थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए।

4. इस अस्थिर माहौल में एक रिटेल निवेशक को अपने एसेट एलोकेशन में क्या बदलाव करने चाहिए? इक्विटी, डेट और गोल्ड के बीच बैलेंस कैसे बनाएं?

उत्तर: उतार-चढ़ाव कोई जोखिम नहीं है, बल्कि अगर इसे सही तरीके से समझा जाए तो यह एक अवसर है। एसेट एलोकेशन के मामले में निवेशकों को प्रतिक्रिया देने के बजाय संतुलन पर ध्यान देना चाहिए। लॉन्ग टर्म में वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी अभी भी सबसे आकर्षक विकल्प है।

5. मोनार्क नेटवर्थ को कम चर्चित और अनछुए शेयरों को खोजने के लिए जाना जाता है। मार्च की गिरावट और अप्रैल की रिकवरी के बीच, निवेशक एक मजबूत और कमजोर कंपनी में फर्क कैसे करें?

उत्तर: मोनार्क में हमारी फिलॉसफी हमेशा से उन बिजनेसों पर फोकस करना रही है, जिन पर रिसर्च कम हुई है, जिनमें निवेश कम है और जिनकी वैल्यूएशन कम है, लेकिन उनका कैश फ्लो और मैनेजमेंट मजबूत है। उतार-चढ़ाव वाले बाजार में मजबूत और कमजोर कंपनियों का अंतर साफ दिखने लगता है। मजबूत बैलेंस शीट और अच्छी कमाई वाली कंपनियां तेजी से रिकवरी करती हैं और लंबे समय तक टिकी रहती हैं।

यह भी पढ़ें | 6% इंक्रीमेंट होने पर कितनी बढ़ेगी सैलरी? समझिए बेसिक पे से सैलरी स्‍ट्रक्‍चर तक

6. आज डिस्काउंट ब्रोकर्स का दौर है, ऐसे में एक फुल-सर्विस ब्रोकर की सलाह कितनी अहमियत रखती है? क्या निवेशक आज भी अच्छी सलाह के लिए पैसा खर्च करने को तैयार हैं?

उत्तर: डिस्काउंट ब्रोकिंग के बढ़ने के बावजूद, हम देख रहे हैं कि गंभीर निवेशक अब रिसर्च-बेस्ड एडवाइस को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। ट्रेडिंग की सुविधा तो हर जगह उपलब्ध है, लेकिन सही 'इनसाइट' हर जगह नहीं मिलती। उतार-चढ़ाव के दौर में यहीं पर हमारे जैसे फुल-सर्विस प्लेटफॉर्म की भूमिका अहम हो जाती है। लोग अच्छी सलाह के लिए पैसा देने के लिए तैयार हैं क्योंकि वे जानते हैं कि गलत फैसले की कीमत कहीं ज्यादा होती है।

7. अगले 12-18 महीनों के लिए आपको कौन से 2-3 सेक्टर्स सबसे मजबूत लग रहे हैं?

उत्तर: सेक्टर के नजरिए से देखें तो हम बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज, डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग को लेकर बहुत पॉजिटिव हैं। ग्लोबल सप्लाई चेन में हो रहे बदलावों का फायदा भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को मिल रहा है। इन सेक्टर्स में लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट में निवेश के बेहतरीन मौके दिख रहे हैं।

यह भी पढ़ें | अक्षय तृतीया से पहले सोने-चांदी पर बड़ा संकट! बैंकों ने रोकी नई डील

8. SEBI ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) पर कड़े नियम लागू किए हैं। इसका आपके बिजनेस और रिटेल निवेशकों की भागीदारी पर क्या असर पड़ा है?

उत्तर: SEBI के नए नियम एक पॉजिटिव और स्ट्रक्चरल कदम हैं। हालांकि, इससे सट्टेबाजी वाले वॉल्यूम में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन यह मार्केट में भागीदारी की क्वालिटी को सुधारता है। लंबे समय में यह पूरी इंडस्ट्री और निवेशकों की सुरक्षा के लिए फायदेमंद है।

9. आपको मोनार्क म्यूचुअल फंड के लिए SEBI से फाइनल रजिस्ट्रेशन मिल गया है। आपकी स्ट्रैटजी क्या होगी, लो-कॉस्ट पैसिव या हाई-कनविक्शन एक्टिव स्ट्रैटेजी?

उत्तर: म्यूचुअल फंड के मोर्चे पर हमारी स्ट्रैटजी 'हाई-कनविक्शन एक्टिव इन्वेस्टिंग' की होगी। हम अपनी डीप रिसर्च और उभरते हुए अवसरों को जल्दी पहचानने की क्षमता के दम पर निवेशकों को बेहतर विकल्प देंगे।

यह भी पढ़ें | अंबानी को पीछे छोड़ गौतम अडानी बने एशिया के सबसे अमीर शख्स, जानें उनकी नेटवर्थ

10. GIFT City में आपकी मौजूदगी और लाइसेंस का भारतीय HNIs को क्या फायदा मिलेगा?

उत्तर: गिफ्ट सिटी में हमारी मौजूदगी एक रणनीतिक ताकत है। यह भारतीय अमीर निवेशकों (HNIs) और वैश्विक निवेशकों के लिए भारतीय इक्विटी में निवेश करना बहुत आसान बना देता है। यहां टैक्स और रेगुलेशन का स्ट्रक्चर बहुत कुशल है, जिससे ग्लोबल इन्वेस्टिंग काफी आसान हो जाती है।

11. मार्च की गिरावट और अप्रैल की रिकवरी के बाद मोनार्क नेटवर्थ अपनी ग्रोथ स्ट्रैटेजी को कैसे देख रहा है?

उत्तर: इस करेक्शन के बाद भी हमारा फोकस नहीं बदला है। हमारा लक्ष्य ब्रोक्रेज, एसेट मैनेजमेंट, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और गिफ्ट सिटी जैसे अपने सभी बिजनेसों को और बढ़ाना है। हमारा पूरा जोर गहरी रिसर्च और ग्राहकों के साथ लंबे समय के मजबूत रिश्ते बनाने पर है।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

होममार्केटएक्सक्लूसिव इंटरव्यू: मार्च की गिरावट 'हेल्दी रीसेट' या संकट? मोनार्क नेटवर्थ के CEO से जानें रिकवरी का रोडमैप
More