
Monarch Networth CEO Interview: शेयर बाजार ने मार्च 2026 में निवेशकों को तगड़ा झटका दिया। इस दौरान निफ्टी और सेंसेक्स में लगभग 11% की तेज गिरावट दर्ज की गई। खासकर मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में आई गिरावट ने रिटेल इन्वेस्टर्स चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि, अप्रैल की रिकवरी ने एक बार फिर उम्मीदें जगाई हैं, लेकिन बाजार की दिशा को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। क्या यह गिरावट केवल एक 'हेल्दी करेक्शन' थी या आने वाले बड़े संकट का संकेत? अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय बाजार पर क्या असर होगा? और इस उतार-चढ़ाव वाले माहौल में एक आम निवेशक को अपना पोर्टफोलियो कैसे मैनेज करना चाहिए? इन्हीं विषयों पर मिंट हिंदी के शिवम शुक्ला ने मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल (Monarch Networth Capital) के CEO गौरव भंडारी के साथ बातचीत की है।
उत्तर: मार्च में आई 10-11% की गिरावट बाजार का कोई स्ट्रक्चरल ब्रेकडाउन नहीं था, बल्कि एक 'हेल्दी रीसेट' था। पिछले 24 महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में जो जबरदस्त तेजी आई थी, उसके बाद इस करेक्शन की जरूरत थी। बाजार में सब कुछ बहुत अच्छा होने की उम्मीदें पहले ही जुड़ चुकी थीं, इसलिए कुछ हद तक गिरावट आना तय था। अच्छी बात यह है कि अप्रैल में बाजार ने बहुत समझदारी के साथ तेजी से वापसी की है। इससे साफ पता चलता है कि बाजार में नकदी (Liquidity), कंपनियों की कमाई और निवेशकों का भरोसा पूरी तरह बरकरार है।
उत्तर: रिटेल निवेशकों को 'मार्केट टाइमिंग' के लालच से बचना चाहिए। इतिहास गवाह है कि उतार-चढ़ाव के दौरान सबसे बड़ी गलती घबराहट में बाजार से बाहर निकलना और फिर हाई लेवल पर दोबारा एंट्री करना है। यह दौर अनुशासित तरीके से SIP जारी रखने और अच्छी क्वालिटी वाली कंपनियों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने का है। यही रणनीति लंबे समय में बड़ी वेल्थ बनाने में मदद करेगी।
उत्तर: वैश्विक तनाव निश्चित रूप से बाजार में अस्थिरता पैदा करते हैं। हालांकि, सीजफायर की खबरें राहत देती हैं, लेकिन जियो-पॉलिटिकल रिस्क हमेशा बने रहते हैं, क्योंकि इनका असर कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ता है। भारतीय बाजार अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हैं, लेकिन निवेशकों को इन बाहरी खबरों पर नजर रखनी चाहिए और किसी भी बड़े ग्लोबल झटके के लिए अपने पोर्टफोलियो में थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए।
उत्तर: उतार-चढ़ाव कोई जोखिम नहीं है, बल्कि अगर इसे सही तरीके से समझा जाए तो यह एक अवसर है। एसेट एलोकेशन के मामले में निवेशकों को प्रतिक्रिया देने के बजाय संतुलन पर ध्यान देना चाहिए। लॉन्ग टर्म में वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी अभी भी सबसे आकर्षक विकल्प है।
उत्तर: मोनार्क में हमारी फिलॉसफी हमेशा से उन बिजनेसों पर फोकस करना रही है, जिन पर रिसर्च कम हुई है, जिनमें निवेश कम है और जिनकी वैल्यूएशन कम है, लेकिन उनका कैश फ्लो और मैनेजमेंट मजबूत है। उतार-चढ़ाव वाले बाजार में मजबूत और कमजोर कंपनियों का अंतर साफ दिखने लगता है। मजबूत बैलेंस शीट और अच्छी कमाई वाली कंपनियां तेजी से रिकवरी करती हैं और लंबे समय तक टिकी रहती हैं।
उत्तर: डिस्काउंट ब्रोकिंग के बढ़ने के बावजूद, हम देख रहे हैं कि गंभीर निवेशक अब रिसर्च-बेस्ड एडवाइस को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। ट्रेडिंग की सुविधा तो हर जगह उपलब्ध है, लेकिन सही 'इनसाइट' हर जगह नहीं मिलती। उतार-चढ़ाव के दौर में यहीं पर हमारे जैसे फुल-सर्विस प्लेटफॉर्म की भूमिका अहम हो जाती है। लोग अच्छी सलाह के लिए पैसा देने के लिए तैयार हैं क्योंकि वे जानते हैं कि गलत फैसले की कीमत कहीं ज्यादा होती है।
उत्तर: सेक्टर के नजरिए से देखें तो हम बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज, डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग को लेकर बहुत पॉजिटिव हैं। ग्लोबल सप्लाई चेन में हो रहे बदलावों का फायदा भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को मिल रहा है। इन सेक्टर्स में लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट में निवेश के बेहतरीन मौके दिख रहे हैं।
उत्तर: SEBI के नए नियम एक पॉजिटिव और स्ट्रक्चरल कदम हैं। हालांकि, इससे सट्टेबाजी वाले वॉल्यूम में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन यह मार्केट में भागीदारी की क्वालिटी को सुधारता है। लंबे समय में यह पूरी इंडस्ट्री और निवेशकों की सुरक्षा के लिए फायदेमंद है।
उत्तर: म्यूचुअल फंड के मोर्चे पर हमारी स्ट्रैटजी 'हाई-कनविक्शन एक्टिव इन्वेस्टिंग' की होगी। हम अपनी डीप रिसर्च और उभरते हुए अवसरों को जल्दी पहचानने की क्षमता के दम पर निवेशकों को बेहतर विकल्प देंगे।
उत्तर: गिफ्ट सिटी में हमारी मौजूदगी एक रणनीतिक ताकत है। यह भारतीय अमीर निवेशकों (HNIs) और वैश्विक निवेशकों के लिए भारतीय इक्विटी में निवेश करना बहुत आसान बना देता है। यहां टैक्स और रेगुलेशन का स्ट्रक्चर बहुत कुशल है, जिससे ग्लोबल इन्वेस्टिंग काफी आसान हो जाती है।
उत्तर: इस करेक्शन के बाद भी हमारा फोकस नहीं बदला है। हमारा लक्ष्य ब्रोक्रेज, एसेट मैनेजमेंट, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और गिफ्ट सिटी जैसे अपने सभी बिजनेसों को और बढ़ाना है। हमारा पूरा जोर गहरी रिसर्च और ग्राहकों के साथ लंबे समय के मजबूत रिश्ते बनाने पर है।
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