
MSCI Rejig: भारतीय शेयर बाजार की चार कंपनियों के लिए ग्लोबल इंडेक्स प्रोवाइडर MSCI का ताजा फैसला बड़ा कारोबारी संकेत लेकर आया है। MSCI की अगस्त 2026 समीक्षा में लॉरस लैब्स, लेंसकार्ट सॉल्यूशंस, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस और बिलियनब्रेंस गैराज वेंचर्स को MSCI ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में शामिल करने का फैसला किया गया है। बिलियनब्रेंस गैराज वेंचर्स ही ग्रो की पैरेंट कंपनी है।
इसके साथ ही बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, SBI कार्ड्स एंड पेमेंट्स सर्विसेज और एस्ट्रल को इंडेक्स से बाहर किया जाएगा। नए बदलाव 1 सितंबर 2026 से प्रभावी होंगे।
MSCI के ताजा रीबैलेंसिंग में चार भारतीय कंपनियों को जगह मिली है। लॉरस लैब्स फार्मास्युटिकल सेक्टर की कंपनी है। लेंसकार्ट सॉल्यूशंस आईवियर और रिटेल बिजनेस से जुड़ी कंपनी है। अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस में काम करती है। वहीं बिलियनब्रेंस गैराज वेंचर्स डिजिटल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ग्रो की पैरेंट कंपनी है। इन चारों की एंट्री का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि MSCI ग्लोबल फंड मैनेजरों के लिए प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स में से एक है।
किसी कंपनी के MSCI इंडेक्स में शामिल होने का सीधा मतलब यह नहीं है कि कंपनी को कोई नया बिजनेस ऑर्डर मिल गया या उसके फंडामेंटल अचानक बदल गए। इसका बड़ा असर पैसिव फंड फ्लो पर पड़ सकता है। दुनिया भर के कई इंडेक्स फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड MSCI के बेंचमार्क को ट्रैक करते हैं। जब किसी कंपनी को इंडेक्स में शामिल किया जाता है तो इन फंडों को अपने पोर्टफोलियो में उस कंपनी का वजन बनाए रखने के लिए शेयर खरीदने पड़ सकते हैं। यही वजह है कि MSCI में एंट्री को कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
रॉयटर्स के अनुमान के मुताबिक MSCI में शामिल होने के बाद लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में करीब 352 मिलियन डॉलर का पैसिव इनफ्लो आ सकता है। इसी तरह लॉरस लैब्स में करीब 598 मिलियन डॉलर, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस में करीब 310 मिलियन डॉलर और ग्रो की पैरेंट कंपनी बिलियनब्रेंस गैराज वेंचर्स में करीब 256 मिलियन डॉलर का संभावित इनफ्लो अनुमानित है। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये अनुमानित पैसिव फंड फ्लो हैं, कंपनी को मिलने वाला नया बिजनेस निवेश या कंपनी की कमाई नहीं।
MSCI में शामिल होने से इन कंपनियों की ग्लोबल निवेशकों के बीच विजिबिलिटी बढ़ सकती है। खासकर लेंसकार्ट और ग्रो जैसी नई पीढ़ी की कंपनियों के लिए यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनका बिजनेस मॉडल पारंपरिक इंडेक्स कंपनियों से अलग है। लेंसकार्ट की एंट्री से यह संकेत मिलता है कि भारतीय कंज्यूमर और रिटेल बिजनेस में तेजी से बढ़ रही कंपनियां भी अब ग्लोबल इक्विटी बेंचमार्क का हिस्सा बनने लगी हैं। वहीं बिलियनब्रेंस गैराज वेंचर्स की एंट्री भारत के डिजिटल इन्वेस्टमेंट और फिनटेक सेक्टर की बढ़ती बाजार हिस्सेदारी को दिखाती है।
अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस का MSCI ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में वापस आना भी महत्वपूर्ण है। कंपनी का कारोबार पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ा है। इंडेक्स में वापसी से कंपनी में ग्लोबल पैसिव फंडों की संभावित हिस्सेदारी बढ़ सकती है। रॉयटर्स के मुताबिक अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस में करीब 310 मिलियन डॉलर का संभावित पैसिव इनफ्लो अनुमानित है।
MSCI की समीक्षा में सिर्फ चार कंपनियों को फायदा नहीं हुआ। बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, एसबीआई कार्ड्स और एस्ट्रल को MSCI इंडिया ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स से बाहर किया जाएगा। इन कंपनियों के इंडेक्स से बाहर होने के बाद MSCI को ट्रैक करने वाले पैसिव फंडों की तरफ से इनके शेयरों में बिकवाली का दबाव आ सकता है। रॉयटर्स के अनुसार संभावित आउटफ्लो में बालकृष्ण इंडस्ट्रीज के लिए करीब 169 मिलियन डॉलर, एसबीआई कार्ड्स के लिए करीब 143 मिलियन डॉलर और एस्ट्रल के लिए करीब 138 मिलियन डॉलर का अनुमान है।
इस रीबैलेंसिंग का असर सिर्फ अलग-अलग कंपनियों तक सीमित नहीं है। रॉयटर्स के अनुसार बदलाव के बाद MSCI ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में भारतीय कंपनियों की संख्या 165 से बढ़कर 166 हो जाएगी और MSCI इंडेक्स में भारत का वजन करीब 11.8% से बढ़कर 11.9% हो जाएगा। यह भारत के ग्लोबल इक्विटी मार्केट में बढ़ते महत्व का एक और संकेत है।
MSCI ने भारत के स्मॉल कैप इंडेक्स में भी बदलाव किया है। इस इंडेक्स में कई कंपनियों को शामिल किया गया है और कुछ को बाहर किया गया है। बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक के मुताबिक MSCI India Domestic Small Cap Index में 12 कंपनियों को जोड़ा और 19 कंपनियों को हटाया गया है। इससे मिड और स्मॉल कैप कंपनियों में भी इंडेक्स आधारित फंड फ्लो को लेकर बाजार की नजर रहेगी।
घोषणा आज हो चुकी है, लेकिन नए बदलाव 1 सितंबर 2026 से प्रभावी होंगे। इसलिए इंडेक्स को ट्रैक करने वाले फंडों की वास्तविक खरीद-बिक्री गतिविधि रीबैलेंसिंग के आसपास बढ़ सकती है। हालांकि किसी शेयर में संभावित पैसिव इनफ्लो का मतलब यह नहीं है कि शेयर की कीमत निश्चित रूप से बढ़ेगी। बाजार में अन्य कारक भी शेयर की कीमत को प्रभावित करते हैं।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.