Nifty 50 Outlook 2026: क्या 22,700 के नीचे गिरेगा निफ्टी? ICICI सिक्योरिटीज ने जताई बड़ी गिरावट की आशंका

Nifty 50 Correction Forecast 2026: मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल देखा जा रहा है। वहीं, शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। 

Shivam Shukla
अपडेटेड12 Mar 2026, 04:17 PM IST
Nifty 50 Outlook 2026: क्या 22,700 के नीचे गिरेगा निफ्टी?
Nifty 50 Outlook 2026: क्या 22,700 के नीचे गिरेगा निफ्टी?

Nifty 50 Correction Forecast 2026: मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखी जा रही है। इससे निवेशकों के कई लाख करोड़ रुपये साफ हो गए हैं और अर्थव्यवस्था में आयातित महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ गई है। दरअसल, मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद हो जाने से ग्लोबल ऑयल सप्लाई में बड़ा संकट आ गया है। दुनिया के ज्यादातर तेल जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से ही होकर गुजरते हैं। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। इस बीच निफ्टी 50 पिछले एक हफ्ते में 4% से ज्यादा टूट चुका है। वहीं, एक महीने में लगभग 8% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार पर और दबाव बढ़ रहा है।

क्या निफ्टी 22,600 तक आ सकता है?

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के इक्विटी स्ट्रैटजिस्ट विनोद कार्की के मुताबिक, यह गिरावट अभी थमने वाली नहीं है। उनका कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर बनी रहती हैं, तो निफ्टी वॉर शुरू होने से पहले के स्तर 25,178 से लगभग 10% तक नीचे गिर सकता है। यानी यह लुढ़ककर 22,660 के स्तर तक आ सकता है।

रूस-यूक्रेन वॉर के समय भी गिरा था निफ्टी

उन्होंने आगे कहा कि ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि जब तक कच्चा तेल 90-100 डॉलर के नीचे रहता है, तब तक बाजार इसे ग्लोबल डिमांड के संकेत के रूप में पॉजिटिव लेता है। लेकिन जैसे ही यह 100 डॉलर का आंकड़ा पार करता है, यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सप्लाई शॉक बन जाता है। साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी ऐसी ही स्थिति बनी थी। तब निफ्टी में 10% की गिरावट आई थी।

ये सेक्टर होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित

बता दें कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर ऑटोमोबाइल, एविएशन, पेंट और टायर बनाने वाली कंपनियों पर पड़ेगा। इससे इनकी लागत बढ़ जाएगी, जिससे ग्राहकों के लिए सामान और सर्विस महंगी हो जाएंगी। इसके अलावा, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में लार्ज-कैप के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़ी गिरावट आने की आशंका है।

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गिरावट में भी छिपा है कमाई का मौका?

हालांकि, निफ्टी में गिरावट का एक पॉजिटिव नजरिया भी देखा जा रहा है। कार्की के मुताबिक, अगर निफ्टी 50 गिरता है, तो इसका प्राइस टू अर्निंग (P/E) रेश्यो 18x के आसपास आ जाएगा। यह कोरोना काल के बाद का सबसे निचला स्तर होगा। इससे शेयरों का वैल्यूएशन सस्ता और आकर्षक हो जाएगा। इसके साथ ही बॉन्ड यील्ड और अर्निंग यील्ड के बीच का अंतर कम होने से लॉन्ग टर्म के लिए इक्विटी इन्वेस्टमेंट फायदेमंद साबित हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि 2022 की गिरावट के बाद 2023 में भारतीय बाजार ने एक शानदार रिकवरी और रिकॉर्ड तोड़ तेजी दिखाई थी। मौजूदा संकट भी भविष्य की किसी बड़ी रैली की जमीन तैयार कर सकता है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।

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