
FII Selling Impact Nifty: जब विदेशी निवेशक बाजार से पैसा निकालते हैं, तो सबसे पहले दिमाग में यही आता है कि अब मार्केट टूटेगा। लेकिन क्या ये हर बार सच होता है? हाल ही में Zerodha के सह संस्थापक निखिल कामत ने एक ऐसा डेटा शेयर किया है, जो आपके सारे सवालों का जवाब देते हुए आपका पूरा कन्फ्यूजन दूर कर देगा।
निखिल कामत ने लिंक्डइन पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि जिसे दुनिया 'स्मार्ट फॉरेन मनी'कहती है, वो भारतीय बाजार की टाइमिंग को लेकर अक्सर गलत साबित होती रही है। भारतीय बाजार की टाइमिंग को लेकर विदेशी निवेशक अक्सर गच्चा खा जाते हैं। अगर विदेशी बनाम घरेलू संस्थानों की तुलना करें, तो घरेलू निवेशकों ने बाजी मारी है। अपनी इस पोस्ट के साथ उन्होंने एक तस्वीर भी शेयर की है। इसमें कुछ सालों का डेटा है।
निखिल कामत के अनुसार बीते 18 सालों में जब भी दुनिया में कोई मुसीबत आई और विदेशी फंड्स ने डर के मारे भारी बिकवाली (Panic Selling) की, ठीक वही महीना बाजार का सबसे निचला स्तर (Bottom) साबित हुआ। यानी जब विदेशी निवेशक नुकसान में माल बेचकर भाग रहे थे, तब भारतीय निवेशकों ने उस मौके को लपका और अगले 12 महीनों में तगड़ा मुनाफा कमाया है।
| घटना / संकट (Crisis) | FIIs की सबसे भारी बिकवाली का महीना | FIIs द्वारा बेची गई राशि (रुपये में) | अगले 12 महीनों में Nifty 50 का रिटर्न (INR में) | अगले 12 महीनों में Nifty 50 का रिटर्न (USD में) |
|---|---|---|---|---|
| 2008 ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस (2008 Global Financial Crisis) | अक्टूबर (Oct) | ₹15.3K Cr ( ₹15,300 करोड़) | +92% | +105% |
| 2015-16 चाइना स्लोडाउन (2015-16 China slowdown) | अगस्त (Aug) | ₹16.8K Cr ( ₹16,800 करोड़) | +28% | +31% |
| 2018 IL&FS डिफ़ॉल्ट (2018 IL&FS default) | अक्टूबर (Oct) | ₹28.9K Cr ( ₹28,900 करोड़) | +15% | +19% |
| 2020 कोविड क्रैश (2020 COVID crash) | मार्च (Mar) | ₹61.9K Cr ( ₹61,900 करोड़) | +95% | +104% |
| 2022 फेड रेट हाइक्स + यूक्रेन (2022 Fed hikes + Ukraine) | जून (Jun) | ₹50.2K Cr ( ₹50,200 करोड़) | +23% | +17% |
| 2024-25 सेलोफ़ (बिकवाली) (2024-25 selloff) | अक्टूबर (Oct) | ₹94.0K Cr ( ₹94,000 करोड़) | +11% | +5% |
| 2026 ईरान युद्ध + AI रोटेशन (2026 Iran war + AI rotation) | मार्च (Mar) | ₹1.17L Cr ( ₹1,17,000 करोड़ - अब तक की सबसे बड़ी) | TBD (अभी तक +8%) | जारी है (Still playing out) |
आसान शब्दों में कहें, तो विदेशी निवेशक महंगे में खरीदते हैं और डरकर सस्ते में बेचकर भाग जाते हैं। वहीं हमारे देश के म्यूचुअल फंड्स और SIP करने वाले आम भारतीय हर गिरावट में खरीदारी करके असली बाजी मार लेते हैं।
वहीं SAMCO Securities के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट राज गायकर ने अपनी ब्रोकरेज रिपोर्ट में निफ्टी को लेकर तकनीकी चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि पिछले 26 सालों के आंकड़ों के अनुसार, जब भी पूरे महीने बाजार में 1% से कम का उतार-चढ़ाव रहा है (जो अब तक सिर्फ 8 बार हुआ है), उसके ठीक 3 महीनों के भीतर बाजार में 5% से लेकर 29% तक की एक बहुत बड़ी चाल (-29% से +12%) देखने को मिली है। यानी FIIs की बिकवाली से डरने के बजाय आम निवेशकों को अनुशासित रहकर SIP जारी रखनी चाहिए, क्योंकि इस मौजूदा सन्नाटे के बाद निफ्टी में एक बड़ा ब्रेकआउट आने के पूरे संकेत हैं।
Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि निवेश संबंधी कोई फैसला लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि बाजार की स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और हालात अलग-अलग हो सकते हैं। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी जिम्मेदार नहीं है।
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