
NSE IPO: इंडियन स्टॉक मार्केट के लिए बड़ी खबर सामने आई है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange - NSE) के IPO को मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (Securities and Exchange Board of India - SEBI) से मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी के साथ ही NSE की करीब एक दशक पुरानी लिस्टिंग योजना अब अगले चरण में पहुंच गई है।
NSE ने जून 2026 में अपना Draft Red Herring Prospectus यानी DRHP दाखिल किया था। अब नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद कंपनी IPO की लॉन्चिंग की तैयारियों को आगे बढ़ा सकती है। लंबे समय से निवेशकों और शेयर बाजार से जुड़े लोगों की नजर NSE के IPO पर बनी हुई है। NSE ने संभावित निवेशकों से मिलने और IPO को लेकर रोडशो की तैयारी भी शुरू कर दी थी।
NSE का प्रस्तावित IPO करीब ₹30,000 करोड़ का है। इस आकार के साथ यह भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है। DRHP के मुताबिक इश्यू में NSE के मौजूदा शेयरधारक करीब 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर तक बेच सकते हैं। शेयर का फेस वैल्यू ₹1 है। हालांकि अंतिम इश्यू साइज, प्राइस बैंड और NSE की वैल्यूएशन IPO लॉन्च से पहले तय होगी।
इस IPO की सबसे अहम बात इसका स्ट्रक्चर है। NSE का पूरा इश्यू Offer for Sale (OFS) होगा। इसका मतलब यह है कि NSE नए शेयर जारी करके पैसा नहीं जुटाएगा। IPO में मौजूदा निवेशक और शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे और बिक्री से मिलने वाली रकम उन्हीं शेयरधारकों के पास जाएगी। यानी IPO के बाद NSE को सीधे कोई नया फंड नहीं मिलेगा। यह बात निवेशकों के लिए इश्यू को समझने में काफी महत्वपूर्ण है।
NSE के IPO में कई बड़े मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी कम करने की तैयारी में हैं। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India - SBI) सबसे बड़े सेलिंग शेयरधारकों में शामिल है। इसके अलावा MS स्ट्रैटेजिक (मॉरिशस), CPPIB, अरंडा इन्वेस्टमेंट्स, बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया भी अपनी हिस्सेदारी बेचने वालों में शामिल हैं।
इसके साथ ही GIC Re, न्यू इंडिया एश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी समेत कुछ अन्य संस्थागत और व्यक्तिगत शेयरधारक भी OFS में हिस्सा लेंगे। सरकारी और संस्थागत शेयरधारकों के लिए यह निवेश को आंशिक रूप से भुनाने का बड़ा मौका होगा।
NSE की IPO कहानी नई नहीं है। एक्सचेंज ने पहली बार दिसंबर 2016 में IPO के लिए DRHP दाखिल किया था और उस समय करीब ₹10,000 करोड़ का इश्यू प्रस्तावित था। इसके बाद co-location controversy और दूसरी नियामकीय जांचों के चलते लिस्टिंग प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब पुराने नियामकीय मामलों में महत्वपूर्ण प्रगति के बाद NSE की लिस्टिंग का रास्ता फिर खुला है।
NSE की लिस्टिंग को आगे बढ़ाने में पुराने नियामकीय विवाद में रुकावट आ गई थी। हाल में सुप्रीम कोर्ट ने co-location और dark-fibre मामलों से जुड़े SEBI-NSE settlement को मंजूरी दी। इसके बाद NSE के IPO पर बना एक बड़ा regulatory overhang काफी हद तक दूर हुआ और एक्सचेंज की लिस्टिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ने का रास्ता मिला।
Disclaimer: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि निवेश संबंधी कोई फैसला लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि बाजार की स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और हालात अलग-अलग हो सकते हैं। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी जिम्मेदार नहीं है।
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