
Crude Oil Price Hike: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट बढ़ा दिया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था, तब से लेकर अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 60% से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोमवार को यह आंकड़ा 112 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। वहीं, युद्ध की शुरुआत में लगभग 70 डॉलर के स्तर पर था।
पिछले 30 दिनों के भीतर कच्चे तेल की कीमतों में आई 56 फीसदी की जोरदार बढ़ोतरी से ग्लोबल सप्लाई चेन को बड़ा झटका लगा है। इस संकट का मुख्य केंद्र स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज है। यह समुद्री रास्ता ग्लोबल क्रूड ऑयल के ट्रेड के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। मौजूदा समय में सैन्य तनाव के कारण इस रास्ते से होने वाली आवाजाही बाधित हुई है, जिससे दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में खलबली मची हुई है।
सोमवार को अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 52 सेंट की बढ़त के साथ 98.75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारतीय बाजारों की बात करें, तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चे तेल की कीमतें 1.12% की तेजी के साथ 9,360 रुपये प्रति बैरल के स्तर पर बनी हुई हैं।
बता दें कि ईरान की तरफ से किए गए हमलों ने कतर की महत्वपूर्ण एनर्जी फैसिल्टी को गंभीर नुकसान पहुंचाया है, जिससे कतर की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात क्षमता का लगभग 17% हिस्सा प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, इराक से आने वाली खबरें और भी चिंताजनक हैं। इराक ने विदेशी कंपनियों की तरफ से संचालित अपने सभी तेल क्षेत्रों में फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया है। बसरा ऑयल कंपनी में उत्पादन 33 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर महज 9 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है।
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खोलने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर 48 घंटों के भीतर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से नहीं खोला गया, तो ईरान के पावर प्लांट्स को बर्बाद किया जा सकता है। इसके जवाब में ईरानी मंत्री मोहम्मद बकर कलीबाफ ने साफ किया है कि अगर ईरान के ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया गया, तो पूरे मिडिल ईस्ट में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और ऊर्जा संपत्तियों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया जाएगा।
गोल्डमैन सैक्स ने साल 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड के एवरेज प्राइस के अपने अनुमान को 77 डॉलर से बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। वहीं, मार्च और अप्रैल के महीनों के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत अनुमान 110 डॉलर प्रति बैरल लगाया गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है, तो तेल के प्रोडक्शन में 20 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी जारी रह सकती है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतें 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
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