भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने इंडसइंड बैंक के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी सहित 5 अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। बाजार नियामक ने बैंक के पूर्व CEO सुमंत कथपालिया और चार अन्य सीनियर अधिकारियों को ट्रेडिंग से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके अलावा, इन सभी अधिकारियों से 19.78 करोड़ रुपये की जब्ती की गई है। यह एक्शन बैंक के शेयरों में कथित इनसाइडर ट्रेडिंग के मामले में की गई है।
SEBI ने आदेश में कही ये बातें
सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, इन अधिकारियों ने इंडसइंड बैंक के डेरिवेटिव पोर्टफोलियो अकाउंट्स की गड़बड़ियों से जुड़ी ऐसी गोपनीय जानकारी के आधार पर शेयरों में कारोबार किया, जो अभी पब्लिक नहीं हुई थी। इस जानकारी को अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी (UPSI) माना गया है।
इन अधिकारियों पर गिरी गाज
बाजार नियामक का कहना है कि इन अधिकारियों ने इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का पालन नहीं किया। जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, उनमें पूर्व कार्यकारी निदेशक और डिप्टी सीईओ अरुण खुराना, ट्रेजरी ऑपरेशंस हेड सूरज सौशांत, ग्लोबल मार्केट्स ग्रुप (GMG) ऑपरेशंस हेड रोहन जठन्ना और कंज्यूमर बैंकिंग ऑपरेशंस के चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर अनिल मार्को राव शामिल हैं।
RBI के मास्टर डायरेक्शन के बाद शुरू हुआ मामला
बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से एक मास्टर डायरेक्शन जारी करने के बाद यह मामला शुरू हुआ। आरबीआई ने अपने मास्टर डायरेक्शन में बताया कि इंडसइंड बैंक पर बड़ा फाइनेंशियल और ऑपरेशनल प्रभाव पड़ा है। SEBI के अनुसार, बैंक की इन्टर्नल टीम को डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में गड़बड़ियों के वित्तीय प्रभाव के बारे में पहले से पता था और इसकी गणना शुरू कर दी गई थी। बैंक के अधिकारियों को बताया गया कि इस गड़बड़ी का अनुमानित वित्तीय प्रभाव 1,749.98 करोड़ रुपये था।
सेबी के आदेश का बैंक के वित्तीय और परिचालन पर नहीं होगा असर
इंडसइंड बैंक ने बुधवार को एक नियामक फाइलिंग में कहा कि सेबी के इस अंतरिम आदेश का बैंक के वित्तीय, परिचालन या अन्य गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दिसंबर 2024 तक बैंक की कुल नेटवर्थ 65,101.65 करोड़ रुपये थी, और इस गड़बड़ी का अंतिम वित्तीय प्रभाव करीब 1,529.88 करोड़ रुपये रहा।