SEBI circular 2026: म्यूचुअल फंड्स के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, क्या निवेशकों को होगा फायदा?

How Mutual Funds Manage Liquidity: सेबी ने म्यूचुअल फंड के लिए अल्पकालिक ऋण लेने की अनुमति दी है। ये कदम नकदी प्रबंधन की समस्याओं को हल करने और भुगतान क्षमता को बनाए रखने में मदद करेगा। कंपनियों को आज ही ऋण चुकाने की जिम्मेदारी भी होगी।

Anuj Shrivastava( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड20 Jun 2026, 09:18 AM IST
म्यूचुअल फंड्स के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव
म्यूचुअल फंड्स के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव

How Mutual Funds Manage Liquidity: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंड के लिए नकदी प्रंबंधन को लेकर कारोबार के दौरान कर्ज लेने के नियमों में आसान बनाया है। इसके तहत नियामक ने शुक्रवार को म्यूचुअल फंड कंपनियों को कारोबार के दौरान लिए जाने वाले अल्पकालिक ऋण का उपयोग केवल निवेशकों को धन लौटाने तक सीमित रखने के बजाय व्यापार निपटान, विदेशी मुद्रा दायित्वों और डेरिवेटिव मार्जिन भुगतान सहित व्यापक नकदी प्रबंधन जरूरतों के लिए करने की अनुमति देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।इस कदम का उद्देश्य उन परिचालन संबंधी चुनौतियों को दूर करना है, जिनका सामना परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) को विभिन्न योजनाओं में नकदी के बाहर जाने और आने के बीच समय अंतर के कारण करना पड़ता है।

म्यूचुअल फंड के लिए नए नियम

वर्तमान में कारोबार के दौरान लिया जाने वाला अल्पकालिक ऋण म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए नकदी प्रवाह प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिससे कोष प्रबंधकों को भुगतान दायित्वों और निपटान आवश्यकताओं को समय पर पूरा करने में सहायता मिलती है।सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय संवाददाताओं को बताया कि बाजार नियामक के निदेशक मंडल ने म्यूचुअल फंड विनियम, 2026 में संशोधन को मंजूरी दी है, जिसके तहत म्यूचुअल फंड कंवपिश्सें को दैनिक नकदी असंतुलन को पूरा करने के लिए कारोबार के दौरान ऋण लेने की सुविधा दी जाएगी।

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अब कर्ज लेना होगा आसान

संशोधन के तहत म्यूचुअल फंड इकाइयों को परिसंपत्ति वर्गों के भीतर भुगतान-प्राप्ति निपटान समय अंतर, विदेशी मुद्रा निपटान, डेरिवेटिव स्थितियों के मूल्य परिवर्तन से जुड़े भुगतान आदि को पूरा करने के लिए कारोबार के दौरान ऋण लेने की अनुमति होगी। हालांकि यह कुछ सुरक्षा उपायों के अधीन होगा। ये सुविधा वर्तमान में उपलब्ध उस प्रावधान के अतिरिक्त होगी, जिसके तहत निवेशकों को धन लौटाने जैसे कार्यों के लिए योजना की शुद्ध परिसंपत्तियों के 20 प्रतिशत तक ऋण लेने की अनुमति है।

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कर्ज की शर्तें और समय-सीमा

सेबी ने कहा कि ऐसे कारोबार के दौरान ऋण की मात्रा दिन में प्राप्त होने वाली राशि तक सीमित रहेगी। इस सीमा से अधिक कारोबार के ऋण केवल निवेशकों को धन लौटाने के लिए ही लिया जा सकेगा।

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हालांकि परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कारोबार के दौरान लिए गए सभी ऋण उसी दिन कारोबार के अंत तक चुका दिए जाएं। यदि किसी कारोबार के दौरान ऋण को एक दिन के लिए कर्ज तक बढ़ाया जाता है, तो वह नियामकीय सीमाओं के भीतर और केवल अनुमत उद्देश्यों के लिए ही होगा।

क्या निवेशकों को होगा फायदा?

सेबी का ये नया नियम सीधे निवेशकों के लिए तो नहीं है, लेकिन यह म्यूचुअल फंड कंपनियों के कामकाज को अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाता है, जिससे निवेशकों को अप्रत्यक्ष रूप से बड़ा फायदा होगा। नकदी प्रबंधन आसान होने से फंड मैनेजरों को आपातकालीन स्थिति में निवेश बेचने की मजबूरी नहीं होगी, जिससे स्कीम की परफॉर्मेंस स्थिर रहेगी और निवेशकों के पैसों की सुरक्षा बढ़ेगी।

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