म्यूचुअल फंड्स निवेशकों को सेबी की सौगात! फीस घटाने का प्रस्ताव

सेबी ने चार्ज को आसान बनाने, ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने और इन्वेस्टर का खर्च कम करने के लिए म्यूचुअल फंड फीस स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। रेगुलेटर का प्लान है कि एक्स्ट्रा खर्चों को हटाया जाए। इसके साथ ही ब्रोकरेज लिमिट को सख्त किया जाए।

Jitendra Singh
अपडेटेड29 Oct 2025, 12:02 PM IST
SEBI के नए खर्च नियम से म्यूचुअल फंड्स इंडस्ट्री में हलचल मच गई है।
SEBI के नए खर्च नियम से म्यूचुअल फंड्स इंडस्ट्री में हलचल मच गई है। (HT)

SEBI: कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी ने देश के म्यूचुअल फंड फीस स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसमें फंड हाउस निवेशकों से कैसे चार्ज करते हैं, इसमें भी अहम बदलाव शामिल हैं। यह सब नियमों को आसान बनाने, ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने और यूनिट होल्डर्स के लिए लागत कम करने की कोशिश का एक हिस्सा है। सेबी (SEBI) ने म्यूचुअल फंड को और बेहतर बनाने के लिए एक नया कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इससे म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना और आसान और सस्ता हो सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेबी का मकसद है कि निवेशकों को फीस और खर्चों के बारे में पूरी जानकारी मिले। निवेशकों का भरोसा म्यूचुअल फंड पर और बढ़े। सेबी ने म्यूचुअल फंड के खर्च, यानी टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) को कम करने का भी सुझाव दिया है। रेगुलेटर ने 17 नवंबर तक लोगों से इस बारे में राय मांगी है।

जानिए क्या है टीईआर फीस?

TER वो फीस होती है जो फंड चलाने वाली कंपनी यानी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) निवेशकों से लेती हैं। सेबी चाहता है कि ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड्स, जिनमें निवेशक कभी भी पैसा डाल या निकाल सकते हैं, उनके TER को 0.15% तक कम किया जाए। वहीं, क्लोज्ड-एंड स्कीम्स, जिनमें एक निश्चित समय के लिए पैसा लगाना होता है, उनके TER को 0.25% तक घटाने का प्रस्ताव है। इससे निवेशकों को कम फीस देनी पड़ेगी और उनका रिटर्न बढ़ सकता है।

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ब्रोकरेज फीस घटाने का प्रस्ताव

प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत, कैश मार्केट ब्रोकरेज फीस की ऊपरी सीमा 12 बेसिस पॉइंट से घटाकर 2 बेसिस पॉइंट करने का प्रस्ताव दिया है। डेरिवेटिव ट्रांजैक्शन फीस की सीमा 5 बेसिस पॉइंट से घटाकर 1 बेसिस पॉइंट करने का प्रस्ताव है.नॉन-म्यूचुअल फंड बिजनेस में जाने वाली AMCs को अलग बिजनेस यूनिट बनानी होगी.STT, GST और स्टांप ड्यूटी जैसे स्टैच्युटरी चार्जेज इस खर्च सीमा में शामिल नहीं होंगे। इसके अलावा, SEBI ने परफॉर्मेंस-लिंक्ड एक्सपेंस रेशियो की भी सिफारिश की है यानी किसी स्कीम का परफॉर्मेंस अच्छा रहेगा तो फीस बढ़ सकती है, वरना घट जाएगी।

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क्या होगा AMC कंपनियों पर असर?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, म्यूचुअल फंडों पर सेबी के प्रस्ताव से कंपनियों की कमाई पर निगेटिव असर हो सकता है। रिपोर्ट्स की मानें तो इक्विटी एग्जिट लोड में 5 आधार अंकों की कटौती से HDFC AMC और निप्पॉन AMC जैसी कंपनियों पर बड़ा असर पड़ सकता है। अगर प्रस्तावों को लागू किया जाता है, तो यह इंस्टीट्यूशनल ब्रोकर्स के लिए निगेटिव हो सकता है। सेबी के इस नए प्रस्ताव के बाद HDFC AMC, UTI AMC, Aditya Birla Sun Life और Nippon Life AMC और Canara Robeco AMC जैसी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है।

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