
Buyback Shares: शेयर बाजार में एक बार फिर बड़ा बदलाव आने की चर्चा तेज हो गई है। करीब एक साल पहले जिस ओपन मार्केट बायबैक को सेबी (SEBI) ने पक्षपाती और टैक्स के नजरिए से गलत मानकर बंद करने का मन बनाया था, अब उसे दोबारा शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। गुरुवार को जारी एक कंसल्टेशन पेपर में रेगुलेटर ने संकेत दिए कि अब हालात बदल चुके हैं और पुराने नियम की वापसी से मार्केट को नई मजबूती मिल सकती है।
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी SEBI ने हाल ही में एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसमें ओपन मार्केट के जरिए शेयर बायबैक को फिर से शुरू करने की बात कही गई है। पहले कंपनियों के पास दो रास्ते थे, टेंडर ऑफर के जरिए बायबैक या फिर स्टॉक एक्सचेंज पर खुले बाजार से शेयर खरीदना। लेकिन कुछ समस्याओं के चलते इस ओपन मार्केट वाले तरीके को पिछले साल बंद कर दिया गया था।
सेबी का मानना था कि इस सिस्टम में बराबरी नहीं थी। दिक्कत यह थी कि स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडिंग प्राइस और टाइमिंग पर टिकी होती है। मान लीजिए कंपनी शेयर खरीद रही है, तो जिसका ऑर्डर मैच हो गया उसने तो फायदा उठा लिया, लेकिन जो इन्वेस्टर हिस्सा लेना चाहता था पर उसकी टाइमिंग सही नहीं बैठी, वह हाथ मलता रह गया। इसे सेबी ने 'इनइक्विटेबल' यानी गैर-बराबरी वाला तरीका माना था।
पुराने सिस्टम में सबसे बड़ा पेंच टैक्स का था। पहले कंपनियां बायबैक पर टैक्स भरती थीं और शेयर बेचने वाले इन्वेस्टर को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था। इससे उन लोगों को लॉटरी लग जाती थी जो अपना पूरा हिस्सा ओपन मार्केट में बेच देते थे, जबकि बाकी शेयरहोल्डर्स को यह फायदा नहीं मिल पाता था।
लेकिन 2024 के नए टैक्स नियमों ने पूरा पासा पलट दिया है। अब बायबैक से होने वाली कमाई को 'कैपिटल गेन' की तरह ट्रीट किया जाता है और टैक्स का बोझ कंपनी के बजाय सीधे शेयरहोल्डर पर डाल दिया गया है। सेबी का कहना है कि अब चूंकि टैक्स सबको अपनी कमाई पर देना ही है, तो वह टैक्स एडवांटेज वाला भेदभाव खत्म हो गया है। अब यह सिस्टम काफी हद तक बैलेंस नजर आ रहा है।
माइंडस्प्राइट लीगल की मैनेजिंग पार्टनर अक्षया भंसाली के मुताबिक, यह प्रस्ताव मौजूदा बाजार परिस्थितियों के हिसाब से काफी अहम है। उनका कहना है कि सितंबर 2024 के पीक के बाद बाजार में तेज गिरावट आई और विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली जारी रही। ऐसे माहौल में कंपनियों के पास शेयर कीमतों को संभालने के सीमित विकल्प रह गए थे। ओपन मार्केट बायबैक की गैरमौजूदगी ने कंपनियों की रणनीतिक प्रतिक्रिया को भी सीमित कर दिया था।
अक्षया भंसाली का मानना है कि इस प्रस्ताव से निवेशकों को टैक्स के मामले में बराबरी और बेहतर लिक्विडिटी मिल सकती है। यह सिस्टम बिना किसी गारंटी के, लेकिन बराबरी के आधार पर सभी को बाजार में एग्जिट का मौका देता है। यानी कोई भी निवेशक, समान शर्तों पर हिस्सा ले सकता है।
SEBI के अनुसार, नए टैक्स नियमों के बाद बायबैक से होने वाला मुनाफा अब कैपिटल गेन की तरह टैक्सेबल हो गया है। इसका मतलब यह है कि बायबैक में शेयर बेचना और खुले बाजार में बेचना, दोनों को एक जैसा माना जा रहा है। इससे पहले जो टैक्स असंतुलन था, वह अब काफी हद तक खत्म हो चुका है।
उद्योग जगत के बड़े संगठनों ने भी इस रूट की वापसी का समर्थन किया है:
अब सबकी नजर इस पर है कि SEBI इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला क्या लेता है। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो बाजार में एक पुराना तरीका नए नियमों के साथ वापसी करेगा।
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