मुंबई: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने गुरुवार को कहा कि बाजार नियामक एक विनियमित मंच पेश कर सकता है, जहां आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने वाली कंपनियां सूचीबद्ध होने से पहले कुछ खुलासे करने के बाद कारोबार कर सकेंगी। यह नया मंच निवेशकों को आईपीओ आवंटन एवं सूचीबद्ध होने के बीच तीन दिन की अवधि में विनियमित तरीके से शेयर का व्यापार करने की अनुमति दे सकता है।
यह पहल मौजूदा अनियमित ‘ग्रे मार्केट’ की जगह ले सकती है, जो वर्तमान में इस अवधि के दौरान संचालित होता है। पांडेय ने साथ ही कहा कि नियामक शेयर वायदा कारोबार की अवधि एवं परिपक्वता में सुधार लाने पर विचार कर रहा है।
इससे ऐसे उत्पादों में व्यापार पर अंकुश लगेगा, जहां वित्त वर्ष 2024-25 में 91 प्रतिशत व्यक्तिगत व्यापारियों को घाटा हुआ था। पांडेय ने ‘फिक्की कैपिटल मार्केट कॉन्फ्रेंस’ 2025 में कहा कि निवेशकों के लिए निवेश संबंधी निर्णय लेने को सूचीबद्ध होने से पहले की जानकारी अक्सर पर्याप्त नहीं होती है।
पांडेय ने एक पहल का संकेत देते हुए कहा, ‘‘ एक विनियमित मंच प्रायोगिक आधार पर ... जहां आईपीओ लाने की तैयारी कर रही कंपनियां कुछ खुलासों के बाद व्यापार करने का विकल्प चुन सकती हैं।’’ यदि इस पहल को क्रियान्वित किया जाता है तो इससे अनियमित मंचों जिन्हें अक्सर ‘ग्रे मार्केट’ कहा जाता है, उन पर असूचीबद्ध शेयर के व्यापार पर अंकुश लग सकेगा।
वर्तमान में, आईपीओ के बोली लगना बंद होने और बाजारों में इसके खुलने में कम से कम तीन कारोबारी दिनों का अंतराल होता है और इस अवधि के दौरान ‘ग्रे मार्केट’ में व्यापार होता है। गैर-सूचीबद्ध क्षेत्र जो कि अधिकतर अनियमित बना हुआ है, निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। हालांकि, इसमें कई निवेशकों के लिए काफी जोखिम है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारतीय आईपीओ बाजार 2025 तक 48 मुख्य कंपनियों की सूचीबद्धता के साथ काफी सक्रिय हो गया है।
उल्लेखनीय है कि अगस्त माह में 11 कंपनियों ने अपनी आरंभिक शेयर बिक्री शुरू की। अगले सप्ताह कुछ और कंपनियां भी आईपीओ लाने वाली हैं।
‘प्री-आईपीओ ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म’ पर डिपॉजिटरी के साथ कोई चर्चा होने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘ मैं जो भी कह रहा हूं, वह केवल सैद्धांतिक है।’’ यह नया मंच निवेशकों को आईपीओ आवंटन एवं सूचीबद्ध होने के बीच तीन दिन की अवधि में विनियमित तरीके से शेयर का व्यापार करने की अनुमति दे सकता है।
यह पहल मौजूदा अनियमित ‘ग्रे मार्केट’ की जगह ले सकती है, जो वर्तमान में इस अवधि के दौरान संचालित होता है। शेयर वायदा कारोबार के संबंध में सेबी नकदी शेयर बाजारों को गहरा करने के तरीकों की तलाश कर रहा है। साथ ही लंबी अवधि के उत्पादों के माध्यम से वायदा-विकल्प की गुणवत्ता को भी बढ़ा रहा है। पांडेय ने कहा, ‘‘ हम वायदा-विकल्प उत्पादों के परिपक्वता खाके और सुधार के तरीकों पर हितधारकों के साथ परामर्श करेंगे, ताकि वे ‘हेजिंग’ (जोखिम प्रबंधन रणनीति) और दीर्घकालिक निवेश के लिए बेहतर सेवा प्रदान कर सकें।’’
उन्होंने कहा कि नकदी बाजार में कारोबार तेजी से बढ़ा है और तीन साल की अवधि में दैनिक कारोबार दोगुना हो गया है। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि शेयर वायदा कारोबार पूंजी निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन नियामक को गुणवत्ता एवं संतुलन सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण ने पिछले महीने ‘अल्ट्रा-शॉर्ट-टर्म डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग’ के बढ़ते प्रभुत्व पर चिंता व्यक्त की थी और आगाह किया कि इस तरह के रुझान भारत के पूंजी बाजारों को कमजोर कर सकते हैं।
पांडेय ने साथ ही कहा कि नवीन नियामकीय दृष्टिकोणों ने नए परिसंपत्ति वर्गों, निवेशकों के नए वर्गों और जोखिम पूंजी जुटाने के नए तरीकों को स्थापित करने में मदद की है। इन परिसंपत्ति वर्गों में वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ), रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट), अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) और विशिष्ट निवेश कोष (एसआईएफ) शामिल हैं।
कृत्रिम मेधा (एआई) पर पांडेय ने कहा कि इसमें ग्राहक जुड़ाव के नए तरीकों को खोलने, जोखिम आकलन एवं निगरानी, धोखाधड़ी का पता लगाने तथा वित्तीय समावेशन के लिए वैकल्पिक दृष्टिकोण सक्षम करने की क्षमता है। साथ ही, एआई को अपनाने से डेटा संरक्षण और साइबर सुरक्षा सहित अन्य मौजूदा चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमें एआई को निर्णय के विकल्प के तौर पर नहीं एक सहायक के रूप में देखना होगा। एआई एमएल के लिए सेबी के प्रस्तावित मार्गदर्शक सिद्धांत एक स्तरीय दृष्टिकोण, डेटा एवं साइबर नियंत्रण और स्पष्ट जवाबदेही पर ज़ोर देते हैं। आरबीआई की एआई समिति की रिपोर्ट भी इसकी पुष्टि करती है।’’
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