Share Market: निवेशक ध्यान दें! क्या आप भी करते हैं शॉर्ट सेलिंग? अब शेयर बाजार के नियम कसने की तैयारी में SEBI

Short Selling: सेबी अब शेयर बाजार के दो बड़े नियमों, शॉर्ट सेलिंग और SLB की गहराई से जांच करने जा रही है। माना जा रहा है कि इस कदम से मार्केट से जुड़े कई अहम बदलाव सामने आ सकते हैं, जो निवेशकों और ट्रेडर्स दोनों को प्रभावित करेंगे।

Priya Shandilya
अपडेटेड8 Nov 2025, 07:06 PM IST
शेयर बाजार के नियम कसने की तैयारी में SEBI
शेयर बाजार के नियम कसने की तैयारी में SEBI

Short Selling: भारत के शेयर बाजार में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। बाजार नियामक (SEBI) अब शेयर बाजार से जुड़ी दो अहम व्यवस्थाओं- शॉर्ट सेलिंग और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) के नियमों की पूरी तरह से समीक्षा करने जा रहा है। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शुक्रवार को CNBC‑TV18 ग्लोबल लीडरशिप समिट में बताया कि इसके लिए जल्द ही एक वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा।

क्या है शॉर्ट सेलिंग और क्यों है चर्चा में? (What is Short Selling?)

शॉर्ट सेलिंग दरअसल शेयर बाजार की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें निवेशक उन शेयरों को बेचते हैं जो उनके पास होते ही नहीं। वे इन्हें किसी और से उधार लेकर बेचते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि आने वाले दिनों में उस शेयर की कीमत गिरेगी। बाद में जब भाव नीचे आता है तो वही शेयर सस्ते में खरीदकर वापस लौटा देते हैं और इस तरह मुनाफा कमा लेते हैं।

क्या होता है SLB सिस्टम? (What is SLB?)

सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) के जरिए कोई भी निवेशक अपने डिमैट अकाउंट में रखे शेयर दूसरों को उधार दे सकता है। इसके बदले उसे एक तय फीस मिलती है। यह पूरा लेन-देन स्टॉक एक्सचेंज के प्लेटफॉर्म पर होता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन इसकी गारंटी देती है, ताकि किसी भी तरह का धोखा न हो।

2007 और 2008 में बने थे नियम

शॉर्ट सेलिंग के नियम साल 2007 में बनाए गए थे, जबकि SLB व्यवस्था 2008 में शुरू हुई थी। इन सालों में कुछ छोटे बदलाव जरूर हुए, लेकिन वैश्विक बाजारों के मुकाबले भारत का SLB सिस्टम अभी भी सीमित है। अब SEBI चाहती है कि इसे मॉडर्न और ज्यादा प्रभावी बनाया जाए।

क्या SLB से मार्केट को फायदा?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि SLB फ्रेमवर्क से निवेशकों को डबल फायदा होता है। उधार देने वाले को अपने शेयरों पर एक्स्ट्रा इनकम और बाजार में लिक्विडिटी यानी कैश फ्लो बढ़ता है। इससे पूरे मार्केट की एफिशिएंसी और पारदर्शिता में सुधार आता है।

वीकली एक्सपायरी और MF नियमों पर भी नजर

समिट में वीकली एक्सपायरी पर बैन से जुड़ा सवाल पूछे जाने पर सेबी चीफ ने कहा कि उनका रुख हमेशा डेटा और संतुलित फैसलों पर आधारित रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि म्यूचुअल फंड, स्टॉक ब्रोकर और लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) 2015 जैसे अन्य नियमों की भी गहराई से समीक्षा चल रही है।

आखिर क्यों है यह फैसला जरूरी

भारत के बाजार पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़े हैं, ऐसे में निवेशकों की सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों की जिम्मेदारी सेबी की है। नए वर्किंग ग्रुप से उम्मीद है कि शॉर्ट सेलिंग और SLB को लेकर स्पष्ट और आधुनिक नियम सामने आएंगे, जिससे मार्केट और मजबूत बनेगा।

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