Bank Nifty में होगा बड़ा बदलाव! SEBI के नए नियम से इंडेक्स में जुड़ेंगे ज्यादा बैंक, जानिए कैसे बदलेगा आपका मुनाफा?

बाजार नियामक सेबी ने नॉन-बेंचमार्क इंडेक्स की पात्रता स्टैंडर्ड में बदलाव का ऐलान किया है। अब इन इंडेक्सों में कम से कम 14 कंपनियों को शामिल करना अनिवार्य है। 

Shivam Shukla
अपडेटेड6 Nov 2025, 03:20 PM IST
नॉन-बेंचमार्क इंडेक्स के लिए सेबी का नया नियम
नॉन-बेंचमार्क इंडेक्स के लिए सेबी का नया नियम

SEBI New Rules for Non- Benchmark Index and Derivatives: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने फरवरी में नॉन-बेंचमार्क इंडेक्स के लिए नए पात्रता मानदंड पेश किए। इन इंडेक्स को अब कम से कम 14 कंपनियां शामिल करनी होंगी। सबसे बड़ी कंपनी का वेट 20 प्रतिशत से कम रखना जरूरी है। टॉप तीन कंपनियों का कुल वेट 45 फीसदी से नीचे रहना चाहिए। सेबी का कहना है कि बेंचमार्क इंडेक्स जैसे निफ्टी 50 मार्केट की पूरी तस्वीर दिखाते हैं, लेकिन सेक्टर इंडेक्स कुछ चुनिंदा कंपनियों पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। इससे एक कंपनी की गिरावट पूरे इंडेक्स को हिला सकती है। मई में एक्सचेंजों को हर तिमाही के अंत में इन नियमों की जांच करने और डेरिवेटिव वाले इंडेक्स के लिए 30 दिन में प्रस्ताव देने को कहा गया।

ये इंडेक्स स्टैंडर्ड पर नहीं उतरे खरे

मौजूदा समय में बैंक निफ्टी, फिन निफ्टी और बैंकएक्स इन स्टैंडर्ड पर खरे नहीं उतरते। बैंक निफ्टी में केवल 12 कंपनियां हैं। फिन निफ्टी में एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक का वेट बहुत ज्यादा है। बैंकएक्स में तो सिर्फ 10 कंपनियां ही शामिल हैं। इनकी सुधार डेडलाइन अलग-अलग है।

बैंक निफ्टी के लिए 31 मार्च 2026 तक डेडलाइन है, जबकि बैंकएक्स और फिन निफ्टी के लिए 31 दिसंबर 2025 तक की समय सीमा है। अभी डेरिवेटिव ट्रेडिंग आठ सेक्टर इंडेक्स पर जारी रह सकती है। इनमें बीएसई के हेल्थकेयर, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और कमोडिटी इंडेक्स शामिल हैं। एनएसई के हेल्थकेयर, बैंकों को छोड़कर फाइनेंशियल सर्विसेज, मिड-स्मॉल फाइनेंशियल, मिड-स्मॉल आईटी और टेलीकॉम इंडेक्स भी लिस्ट में हैं।

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एक्सचेंजों के पास क्या है विकल्प?

अगस्त में SEBI ने एक्सचेंजों को दो ऑप्शन दिए – या तो नया इंडेक्स लॉन्च करें जो नियमों में फिट हो, या पुराने इंडेक्स का स्ट्रक्टर बदलें। पैसिव फंड्स की ट्रैकिंग क्वांटिटी को ध्यान में रखना अहम था, क्योंकि बदलाव से निवेशकों की ट्रैकिंग एरर बढ़ सकती है। BSE ने बताया कि बैंकएक्स को ट्रैक करने वाले कोई पैसिव फंड नहीं हैं, इसलिए उसने एक बार में समायोजन का रास्ता चुना।

एनएसई ने निफ्टी बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज को रिबैलेंस करने का फैसला किया। निफ्टी बैंक को ट्रैक करने वाले फंड्स में करीब 34,251 करोड़ रुपये और फिन निफ्टी में 511 करोड़ रुपये का एसेट अंडर मैनेजमेंट है। एनएसई ने ग्लाइड-पाथ अप्रोच अपनाया ताकि डेरिवेटिव की लिक्विडिटी बनी रहे, मार्केट मेकिंग इकोसिस्टम सुरक्षित रहे और निवेशकों में कन्फ्यूजन न हो।

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ऐसे होगा बदलाव

सेबी के ताजा सर्कुलर के मुताबिक, बैंकएक्स और फिन निफ्टी में एक ही बार में बदलाव होंगे। बैंक निफ्टी में चार मासिक किश्तों में रिबैलेंसिंग होगी। पहली किश्त में नए स्टॉक जोड़े जाएंगे। टॉप तीन कंपनियों का टार्गेट वेट चौथी किश्त के आखिर तक हासिल होगा। हर किश्त में वेट चेक किया जाएगा और अतिरिक्त वेट बराबर बांटा जाएगा।

नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार, अगर दो स्टॉक जोड़े जाते हैं तो यस बैंक और इंडियन बैंक शामिल हो सकते हैं। चार स्टॉक जोड़ने पर यूनियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया की संभावना है। वेट कम होने से एचडीएफसी बैंक से हर किश्त में 70-81.5 मिलियन डॉलर, आईसीआईसीआई बैंक से 46.6-55.6 मिलियन डॉलर और एसबीआई से 18.6-22.2 मिलियन डॉलर का आउटफ्लो हो सकता है। यस बैंक में पहली किश्त में 104.7 मिलियन डॉलर और इंडियन बैंक में 72.3 मिलियन डॉलर का इनफ्लो संभावित है।

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निवेशक और ब्रोकर्स पर पड़ेगा ये असर

इन बदलावों से इंडेक्स सिंगल-स्टॉक रिस्क से कम संवेदनशील होंगे। कुछ कंपनियों का दबदबा घटने से इंडेक्स में हेरफेर मुश्किल होगा। रिटेल निवेशकों को निष्पक्ष जोखिम मिलेगा। नए स्टॉक जुड़ने से ट्रेडिंग के नए मौके खुलेंगे। लेकिन ब्रोकर और एसेट मैनेजर्स के लिए चुनौती है। बैंक निफ्टी कई ईटीएफ और पैसिव फंड्स का बड़ा हिस्सा है। फंड मैनेजरों को नए स्टैंडर्ड के तहत संभावित स्टॉक की पहचान करनी होगी और रिस्क-रिटर्न प्रोफाइल का आकलन करना होगा। बैंक निफ्टी, फिन निफ्टी या बैंकएक्स ट्रैक करने वाले फंड्स को पोर्टफोलियो रिबैलेंस करना पड़ेगा। कुल मिलाकर बाजार ज्यादा डायवर्सिफाई और मजबूत बनेगा।

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