
Sensex crash: तीन दिन की लगातार बढ़त के बाद गुरुवार, 19 फरवरी को शेयर बाजार का मूड अचानक बदल गया। सुबह तक जो बाजार संभला हुआ दिख रहा था, वह दिन चढ़ते-चढ़ते तेज बिकवाली की चपेट में आ गया। नतीजा यह हुआ कि सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा लुढ़क गया और निफ्टी 50 इंट्राडे में 25,586 तक फिसल गया।
यह गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव साफ नजर आया।
दिनभर की इस तेज गिरावट में निवेशकों के करीब ₹4 लाख करोड़ की संपत्ति साफ हो गई। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग ₹468 लाख करोड़ पर आ गया, जो पिछले सत्र में करीब ₹472 लाख करोड़ था।
सेंसेक्स 800+ अंक तक गिरा, जबकि निफ्टी 50 में भी तेज फिसलन देखने को मिली।
हाल की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया। बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे दिन बढ़त में बंद हुए थे। बजट, इंडिया-अमेरिका डील और RBI नीति जैसे बड़े ट्रिगर पहले ही बाजार में शामिल हो चुके थे। Q3 नतीजों का सीजन भी खत्म हो गया है। ऐसे में नए घरेलू संकेतों की कमी के बीच स्टॉक-विशेष हलचल तो रही, लेकिन समग्र बाजार पर दबाव बढ़ गया।
अमेरिकी फेड की जनवरी बैठक के मिनट्स से साफ हुआ कि आगे ब्याज दरों को लेकर नीति-निर्माताओं में मतभेद हैं। कुछ सदस्य दरों में कटौती की गुंजाइश देख रहे हैं, जबकि कुछ महंगाई बनी रहने पर सख्ती के पक्ष में हैं। अगर दर कटौती टलती है या दरें बढ़ती हैं तो डॉलर मजबूत हो सकता है। इसका असर विदेशी निवेश पर पड़ सकता है। फरवरी में सात महीने की लगातार बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों (FII) की वापसी दिख रही थी, लेकिन अनिश्चितता से सेंटीमेंट कमजोर हुआ।
CNN की एक रिपोर्ट की मानें तो दावा किया गया कि अमेरिका इस वीकेंड ईरान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे बड़े पैमाने की कार्रवाई बताया गया। बाजार ऐसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को गंभीरता से लेता है। निवेशक वीकेंड से पहले जोखिम कम करना चाहते हैं, इसलिए कई लोगों ने पैसा निकालना बेहतर समझा।
कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज बढ़त देखी गई। WTI क्रूड करीब 4.60% चढ़कर $65.19 प्रति बैरल पहुंचा, जबकि ब्रेंट क्रूड 4.35% उछलकर $70.35 तक गया। गुरुवार को भी ब्रेंट $70.53 और WTI $65.4 तक पहुंच गया। भारत दुनिया के बड़े क्रूड आयातकों में से एक है। तेल महंगा होने से देश की अर्थव्यवस्था और रुपये पर दबाव पड़ता है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में उछाल बाजार के लिए नकारात्मक माना जाता है।
एक और बड़ी वजह यह है कि फिलहाल बाजार को आगे बढ़ाने वाला कोई ताजा बड़ा ट्रिगर नजर नहीं आ रहा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि साल 2026 में मजबूत कमाई और बेहतर मैक्रो हालात के चलते बाजार में अच्छी तेजी की गुंजाइश है, लेकिन इस समय नए पॉजिटिव संकेतों की कमी के कारण बढ़त टिक नहीं पा रही है।
बड़ी कंपनियों (लार्ज कैप) के वैल्यूएशन अब काफी हद तक संतुलित स्तर पर आ गए हैं, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर अभी भी महंगे माने जा रहे हैं। यही वजह है कि बाजार फिलहाल एक दायरे में घूमता नजर आ रहा है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, निफ्टी इस समय FY27 की अनुमानित कमाई के करीब 20 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जबकि NSE मिडकैप इंडेक्स 28 गुना और स्मॉलकैप इंडेक्स 24 गुना के आसपास है। उनका कहना है कि ऐसे माहौल में यह “स्टॉक पिकर का बाजार” बन जाता है, जहां सही शेयर चुनना ही असली खेल है।
बाजार की यह गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी आधे प्रतिशत से ज्यादा गिर गए। इससे साफ है कि बिकवाली व्यापक थी।
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