
Stock Market Outlook For Next Week: भारतीय शेयर बाजार में 15 जून से शुरू होने वाले सप्ताह में कई फैक्टर्स का असर देखने को मिलेगा। इनमें मुख्य रूप से महंगाई के आंकड़ों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर संबंधी घोषणा और कच्चे तेल की कीमते शामिल हैं। विश्लेषकों का कहना है कि रविवार को संभावित अमेरिका-ईरान समझौते की स्थिति, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और ग्लोबल मार्केट ट्रेंड्स भी घरेलू शेयर बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित करेंगे। रिलायंस ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्च हेड अजित मिश्रा ने कहा, ''घरेलू मोर्चे पर निवेशकों की नजर मई माह के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर रहेगी।'' उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक और उसका निर्णय सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके बाद रणनीतिक महत्व वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी के लिए तुरंत खोल दिया जाएगा। हालांकि, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि समझौता अपेक्षित रूप से सफल नहीं हुआ तो नए हमलों की संभावना बनी रहेगी। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर. ने कहा, मार्केट अमेरिका-ईरान समझौते से जुड़े हर घटनाक्रम पर बेहद संवेदनशील बना रहेगा।
इस बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) जून के पहले 15 दिन में भारतीय शेयरों से 62,853 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक FPI भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.87 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह पूरे 2025 में निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा है।
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के सीनियर टेक्निकल एनालिटिक्स प्रवेश गौड़ ने कहा, घरेलू मोर्चे पर निवेशकों की निगाह मानसून की प्रगति और महंगाई की स्थिति पर रहेगी। उन्होंने कहा कि 16-17 जून को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक पर भी निवेशकों की नजर है। बाजार भागीदार फेडरल रिजर्व के कमेंट, महंगाई के दृष्टिकोण, इकोनॉमी ग्रोथ के अनुमान और भविष्य में ब्याज दरों में कटौती के संकेतों पर करीबी नजर रखेंगे।
पिछले सप्ताह BSE सेंसेक्स 1,284.61 अंक या 1.73 प्रतिशत चढ़ा, जबकि NSE निफ्टी 256.20 अंक या एक प्रतिशत मजबूत हुआ। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने कहा, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह एक अत्यंत सकारात्मक संकेत है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।