
Silver price crash: चांदी ने बीते एक साल में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया, लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। हालिया कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमतों में अचानक कमजोरी आई है, जिससे बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह तेजी अब थम चुकी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा उछाल के बाद चांदी एक बड़े करेक्शन की ओर बढ़ सकती है।
शुक्रवार सुबह एशियाई बाजारों में COMEX सिल्वर ने बड़ी गिरावट के साथ कारोबार शुरू किया और कुछ ही मिनटों में यह $63.900 प्रति औंस तक फिसल गया। घरेलू बाजार में MCX सिल्वर भी कमजोर खुला और ₹2,29,187 प्रति किलो के निचले स्तर तक चला गया।
हालांकि निचले स्तरों पर खरीदारी आने से दिन के अंत तक रिकवरी दिखी और MCX सिल्वर ₹2,48,897 प्रति किलो तक पहुंच गया, जबकि COMEX पर भाव कुछ समय के लिए $76.925 प्रति औंस तक चढ़े।
SEBI-रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, चांदी की कीमतों पर दो बड़े कारणों से दबाव है। पहला, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में नरमी, और दूसरा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती। जैसे ही दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर बातचीत की खबर आई, डॉलर मजबूत हुआ और सोने-चांदी जैसे सेफ-हेवन एसेट्स से मुनाफावसूली शुरू हो गई।
उन्होंने बताया कि दिन के अंत में दिखी रिकवरी डॉलर में हल्की प्रॉफिट बुकिंग की वजह से थी, लेकिन डॉलर इंडेक्स अब भी 97.50 के आसपास बना हुआ है।
अमित गोयल का कहना है कि ऊंची कीमतों की वजह से इंडस्ट्रियल सेक्टर में चांदी की मांग पर असर पड़ा है। सोलर इंडस्ट्री और फोटावोल्टिक सेल्स में अब चांदी की जगह कॉपर का इस्तेमाल बढ़ रहा है। सॉलिड-स्टेट बैटरी टेक्नोलॉजी में भी सिल्वर कॉइल की जगह कॉपर कॉइल अपनाने की कोशिशें चल रही हैं। इजरायल, ताइवान, ऑस्ट्रेलिया और चीन की कुछ कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं।
अनुज गुप्ता याद दिलाते हैं कि चांदी का इतिहास तेज गिरावटों से भरा रहा है। 1980 में हंट ब्रदर्स के जमाखोरी दौर के बाद चांदी $49.50 से गिरकर $11 प्रति औंस तक आ गई थी। 2011 में भी चांदी ने अपने उच्च स्तर से करीब 75% की गिरावट देखी थी। हाल के महीनों में Chicago Mercantile Exchange द्वारा मार्जिन बढ़ाया जाना भी बाजार में बढ़ते जोखिम की ओर इशारा करता है।
PACE 360 के अमित गोयल के मुताबिक, शुक्रवार को दिखी तेजी को पूरी तरह मजबूत नहीं माना जा सकता। एक्सपर्ट्स इसे काफी हद तक “डेड-कैट बाउंस” मान रहे हैं। मंगलवार की रिकवरी के दौरान COMEX पर चांदी $70 से $95 प्रति औंस के दायरे में रही, लेकिन $95 का स्तर पार नहीं कर पाई। इसके बाद यह $70 के अहम सपोर्ट से नीचे फिसलकर $63 प्रति औंस का नया निचला स्तर बना चुकी है।
PACE 360 के अमित गोयल के मुताबिक, मौजूदा $121 प्रति औंस के पीक से चांदी में 75–80% तक की गिरावट आ सकती है। अगले दो साल में कीमतें $25 से $30 प्रति औंस के दायरे में आ सकती हैं। हालांकि गिरावट सीधी नहीं होगी और बीच-बीच में रिकवरी भी देखने को मिलेगी। यानी हालिया ऊंचे स्तरों से इसमें अभी और बड़ी गिरावट की गुंजाइश बनी हुई है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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