SIP, IPO, डिमैट अकाउंट… भागने लगे विदेशी तो भारतीयों निवेशकों ने संभाल लिया मोर्चा, निवेश पर ये आंकड़े गदगद कर देंगे

Investment Data: जुलाई 2025 में भारतीय शेयर बाजार ने 30 लाख नए डिमैट खातों के साथ एक नया रिकॉर्ड बनाया, जो दिसंबर 2024 के बाद सबसे बड़ी मासिक वृद्धि है। वहीं, विदेशी निवेशकों (FPI) के 17,741 करोड़ के निकासी के बावजूद, घरेलू निवेशकों ने SIP और IPO के माध्यम से बाजार में भरोसा जताया।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड14 Aug 2025, 01:25 PM IST
भारतीय निवेशकों ने संभाला बाजार.  (AI Image)
भारतीय निवेशकों ने संभाला बाजार. (AI Image)(Kruti AI)

Indian Domestic Investors: अमेरिका से संबंधों में तनाव और व्यापार में बाधा की खबरों के बीच घरेलू मोर्चे से खुशखबरी पर खुशखबरी मिल रही है। जब विदेशी निवेशक (Foreign Investors) भारतीय बाजार से अपना हाथ खींच रहे हैं, तब घरेलू निवेशकों (Domestic Investors) का उत्साह आसमान छू रहा है। इस कारण भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां घरेलू निवेशक विदेशी उतार-चढ़ाव के बीच भी बाजार को संभाल रहे हैं।

जुलाई 2025 में डिमैट खातों की संख्या 20.21 करोड़ को पार कर गई। इसी महीने SIP (Systematic Investmet Plan) में रिकॉर्ड निवेश हुआ, वहीं IPO (Initial Public Offerings) के जरिए पैसे जुटाने के लिहाज से भी जुलाई खासा व्यस्त महीना रहा। ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारतीय निवेशक अब बाजार की रीढ़ बनते जा रहे हैं।

डिमैट खातों में ऐतिहासिक वृद्धि

जुलाई 2025 में 30 लाख नए डिमैट खाते (Demat Accounts) खुले, जो दिसंबर 2024 के बाद सबसे बड़ी मासिक वृद्धि है। यह लगातार तीसरा महीना है जब खाता खुलने की संख्या बढ़ी है। हालांकि, यह संख्या नए निवेशकों को नहीं दर्शाती क्योंकि एक व्यक्ति कई खाते खोल सकता है। अनुमानित 12 करोड़ नए निवेशकों ने बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है।

लेकिन, अब देशभर में डिमैट खातों की कुल संख्या बढ़कर 20.21 करोड़ हो गई है, जो पिछले चार सालों में तीन गुना से अधिक की छलांग है। टोरस फाइनेंशियल मार्केट्स के CEO प्रकर्ष गगडानी के अनुसार, ‘जुलाई में डीमैट खातों की वृद्धि का एक बड़ा कारण IPO बाजार का उछाल था। इस महीने 13 कंपनियों ने 16,125 करोड़ रुपये जुटाए, जो 2025 का सबसे व्यस्त महीना रहा।’

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FPI निकासी के बीच घरेलू निवेशकों का दमखम

जुलाई में FPI (Foreign Portfolio Investors) ने 17,741 करोड़ रुपये की निकासी की, जो मार्च 2025 के बाद सबसे ज्यादा है। दूसरी तरफ, जुलाई 2025 IPO बाजार के लिए भी ऐतिहासिक रहा। कुल 13 IPO के जरिए 16,125 करोड़ रुपये की राशि जुटाई गई। यह आंकड़ा बताता है कि देशी निवेशक सिर्फ सेकेंडरी मार्केट में नहीं, बल्कि नए उद्यमों में भी भरोसा जता रहे हैं।

मतलब साफ है कि विदेशी निवेशकों में मची भगदड़ के बीच घरेलू निवेशकों ने SIP और IPO के जरिए बाजार को सपोर्ट किया। SIP में भी 28,464 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड निवेश दर्ज किया गया, जो पिछले महीने की तुलना में 4% अधिक है।

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भविष्य की चुनौतियां और संभावनाएं

भले ही ट्रंप टैरिफ (Trump Tariff) और अंतरराष्ट्रीय बाजार की अनिश्चितताओं के चलते डिमैट खाता वृद्धि की गति को लेकर कुछ संदेह हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय निवेशक अब देश के वित्तीय बाजार की नींव बन चुके हैं। इस दिशा में तेजी से बदलती भागीदारी न सिर्फ बाजार की स्थिरता को मजबूत कर रही है, बल्कि भारत को निवेश के वैश्विक मानचित्र पर आत्मनिर्भर बना रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार तनाव और बाजार की अनिश्चितता के कारण डिमैट खातों की वृद्धि पर असर पड़ सकता है। हालांकि, SIP और IPO में बढ़ती भागीदारी से साफ है कि भारतीय निवेशक (Indian Investors) लंबे समय तक बाजार में बने रहने को तैयार हैं और वे देश के वित्तीय बाजार (Indian Financial Market) की नई ताकत बनकर उभरे हैं। यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की मजबूती का संकेत देता है।

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