फर्जी खरीद-बिक्री, किडनैपिंग की झूठी कहानी... शेयर बाजार में 430 करोड़ के फ्रॉड की जांच रिपोर्ट दिमाग हिला देगी

कंपनियों की आड़ में कैसे-कैसे फ्रॉड किए जाते हैं, कई बार इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। शेयर बाजार को रेग्युलेट करने वाली संस्था सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने ऐसा ही एक फर्जीवाड़ा पकड़ा है।

रिटेन बाय Naveen Kumar Pandey( विद इनपुट्स फ्रॉम लाइवमिंट.कॉम)
अपडेटेड30 Sep 2025, 03:06 PM IST
सेबी ने पकड़ा शेयर बाजार में हुआ 430 करोड़ का फर्जावाड़ा (सांकेतिक तस्वीर)
सेबी ने पकड़ा शेयर बाजार में हुआ 430 करोड़ का फर्जावाड़ा (सांकेतिक तस्वीर)(Mint)

सीकोस्ट शिपिंग सर्विसेज लिमिटेड (Seacoast Shipping Services Ltd- SSSL) के प्रमोटरों ने आम निवेशकों को चूना लगाने की इतनी गहरी साजिश रची, जिसे जानकर आपके पांव तले जमीन खिसक जाएगी। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने इस फर्जीवाड़े के बारे में विस्तार से बताया।

दिमाग हिला देगा मनीष शाह का फर्जीवाड़ा

सेबी की जांच के मुताबिक, कंपनी ने अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट में हेरफेर करके ग्रोथ की झूठी तस्वीर पेश की, जिससे खुदरा निवेशक लट्टू हो गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने वित्तीय वर्ष 2021 में कंपनी की नेट सेल्स और नेट प्रॉफिट में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी पर सवाल उठाने के बाद सेबी ने यह जांच शुरू की थी। इस फ्रॉड के केंद्र में कंपनी के प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष शाह हैं, जिन्होंने कथित तौर पर फंड्स की हेराफेरी और निवेशकों को गुमराह करने की पूरी योजना बनाई।

SSSL पर के खिलाफ सेबी की जांच में क्या निकला?

सेबी की जांच में यह साफ हो गया है कि शिपिंग और लॉजिस्टिक्स के बिजनेस में शामिल SSSL और इसके प्रमोटरों ने अपने फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स में हेरफेर करके एक बड़ा फ्रॉड किया। जांच अवधि (अप्रैल 2020 से दिसंबर 2023) के दौरान, नियामक ने पाया कि कंपनी की 85% से ज्यादा बिक्री और 98% से ज्यादा एसेट्स फर्जी थे।

इस धोखाधड़ी के कारण SSSL के शेयरों के लिए एक फर्जी बाजार बन गया। इस वजह से खुदरा निवेशकों की रुचि बढ़ी और पब्लिक शेयरहोल्डर्स की संख्या लगभग 2.5 लाख तक पहुंच गई। इसी दौरान, प्रमोटरों ने चालाकी से अपनी हिस्सेदारी को 73.97% के उच्च स्तर से घटाकर केवल 0.04% कर दिया। केएस लीगल (KS Legal) की मैनेजिंग पार्टनर सोनम चांदवानी (Sonam Chandwani) के अनुसार, प्रमोटरों का लगभग पूरी तरह से बाहर निकल जाना, जबकि पब्लिक शेयरहोल्डिंग का बड़े पैमाने पर बढ़ना, यह दिखाता है कि पूरी साजिश के साथ निवेशकों के साथ खिलवाड़ किया गया।

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कंपनी ने रेवेन्यू बढ़ाने का कौन सा फर्जी तरीका अपनाया?

कंपनी ने फर्जी लेनदेन की एक चेन के जरिए अपने रेवेन्यू को बढ़ाया ताकि कारोबार के फलने-फूलने का भ्रम पैदा हो सके। रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा ऐसी कंपनियों को फर्जी बिक्री के मार्फत दिखाया गया जो कभी थी ही नहीं या बंद हो चुकी थीं। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2021 में, SSSL ने सिंगापुर की एक कंपनी Bimstar Holdings Pte Ltd को 81.35 करोड़ रुपये की बिक्री रिकॉर्ड की। सेबी को पता चला कि यह कंपनी पहले ही बंद हो चुकी थी और सिंगापुर के कॉर्पोरेट रजिस्टर से उसका नाम हटा दिया गया था। ऐसे में इस कंपनी को शेयरों की बिक्री संभव ही नहीं थी।

फर्जी खरीद-बिक्री से निवेशकों की आखों में झोंका धूल

फर्जी बिक्री को संतुलित करने के लिए, कंपनी ने नकली खरीदारी भी रिकॉर्ड की। वित्त वर्ष 2022 में, SSSL ने सिंगापुर की एक अन्य कंपनी Safe Cargo Shipping Services Pte Ltd से 94.06 करोड़ रुपये की खरीदारी करने का दावा किया, जबकि नियामक को SSSL के बैंक खातों से इस कंपनी को कोई भुगतान किए जाने का सबूत नहीं मिला। जिन मामलों में पैसे का लेन-देन हुआ भी, वह एक क्लोज्ड लूप का हिस्सा था। पैसा कई संस्थाओं से घूमकर वापस अपने मूल स्थान पर आ जाता था, जिससे केवल कागज पर लेनदेन का रिकॉर्ड बनता था, जिसका कोई वास्तविक व्यावसायिक आधार नहीं था।

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फर्जीवाड़े के लिए शुरू किया एग्रो-प्रोडक्ट्स का कागजी व्यापार

सेबी ने पाया कि एग्रो-कमोडिटीज (Agro-Commodities) के व्यापार में बदलाव के पीछे धोखाधड़ी को छिपाने की एक सोची-समझी रणनीति थी। शिपिंग और लॉजिस्टिक्स के शुरुआती कारोबार के बाद SSSL ने इस नए सेगमेंट से भारी रेवेन्यू दिखाना शुरू कर दिया। यह कदम जानबूझकर उठाया गया था क्योंकि एग्रो-प्रोडक्ट्स गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) से मुक्त हैं।

जांच के दौरान प्रमोटर मनीष शाह ने खुद स्वीकार किया कि इस छूट की आड़ में फर्जी रेवेन्यू खड़ा करना आसान हो गया, क्योंकि लेनदेन को टैक्स रिकॉर्ड्स के जरिए वेरिफाई करना मुश्किल था। सेबी ने निष्कर्ष निकाला कि एग्रो-बिजनेस (Agro-Business) से दिखाया गया सारा रेवेन्यू फर्जी था। यह व्यवसाय केवल कागजों तक सीमित था जिसमें किसी भी सामान का वास्तविक व्यापार नहीं हुआ था।

SSSL के प्रमोटरों ने गजब साजिश रची

सेबी के अनुसार, मनीष शाह ने अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग करते हुए पूरी धोखाधड़ी की योजना बनाई। उनकी भूमिका में फर्जी शेयर आवंटन का निर्देश देना, वित्तीय विवरणों को गलत तरीके से पेश करने की साजिश रचना और कंपनी के फंड को इधर-उधर करना शामिल था। जांच में यह भी पता चला कि फ्रॉड करने के लिए इस्तेमाल की गई कुछ फर्जी कंपनियां बनाने में भी वह सीधे तौर पर शामिल थे।

जांच के दौरान खूब खेला खेल

मनीष शाह ने जांच के दौरान विरोधाभासी बयान दिए। उन्होंने शपथ पत्र देकर स्वीकार किया कि कंपनी का अधिकांश रेवेन्यू फर्जी था और कृषि उत्पादों का व्यापार सिर्फ कागजों पर हो रहा था। हालांकि, बाद में उन्होंने एक हलफनामा दायर करके इस इकबालिया बयान को वापस ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सेबी के अधिकारियों ने उन्हें डराया-धमकाया और उनके बयान दबाव और जबरदस्ती में दर्ज किए गए थे।

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बेटे की किडनैपिंग तक की झूठी कहानी गढ़ डाली!

गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए फंड्स पर पूछे जाने पर मनीष शाह की पत्नी चेरिल शाह (Cheryl Shah) ने भी बड़ा झूठ बोला। उन्होंने कहा कि दरअसर उनका बेटा किडनैप हो गया था जिसकी फिरौती में राइट्स इश्यू से डाइवर्ट किए गए 43.42 करोड़ रुपये खर्च हो गए। कानूनी विशेषज्ञों ने इन बचावों को कमजोर माना। सीनियर सिक्योरिटीज वकील चिराग एम. शाह (Chirag M. Shah) ने कहा कि अपहरण का तर्क मुख्य मामले को नहीं बदल सकता, क्योंकि मूल आरोप फर्जी लेनदेन और रेवेन्यू में हेरफेर की लंबी योजना को लेकर हैं।

सेबी ने SSSL पर की चौतरफा कार्रवाई

सेबी ने बाजार की सुरक्षा और दोषियों को दंडित करने के लिए कई सख्त निर्देश जारी किए हैं। SSSL को अगले आदेश तक आम निवेशकों से एक भी पैसा लेने रोक दिया गया है। मनीष शाह और अन्य प्रमोटरों को सिक्योरिटीज में खरीदने, बेचने या किसी भी तरह का लेन-देन करने से या पूंजी बाजार (Capital Market) तक पहुंचने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

सेबी ने अवैध लाभ को जब्त करने का आदेश दिया है। अकेले मनीष शाह से 47.89 करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली की जानी है। अन्य गैर-प्रमोटर संस्थाओं (Non-Promoter Entities) को भी सामूहिक रूप से लगभग 70 करोड़ रुपये एक एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) में जमा करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, कंपनी को राइट्स इश्यू से डाइवर्ट किए गए फंड्स को वापस लाने और भविष्य में भरोसेमंद वित्तीय रिपोर्टिंग (Credible Financial Reporting) सुनिश्चित करने के लिए एक नई ऑडिट कमेटी बनाने का निर्देश दिया गया है।

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सबसे कठिन सवाल- शेयधारकों को कैसे मिले पैसा?

हालांकि, लगभग 2.5 लाख पब्लिक शेयरहोल्डर्स को हुए नुकसान की भरपाई कैसे की जाए, इसका रास्ता निकालना बहुत कठिन है। सोनम चांदवानी के अनुसार, वे कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ क्लास-एक्शन-स्टाइल सूट्स (Class-Action-Style Suits) का सहारा ले सकते हैं, लेकिन इतने बड़े समूह का समन्वय करना व्यावहारिक रूप से कठिन है।

यह खबर मूलतः A fake business, a false kidnap claim: How Sebi uncovered a 430 crore fraud नाम से livemint.com पर प्रकाशति हुई है।

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