
Stock Market Closing bell 13 February 2026: AI और ग्लोबल इकोनॉमी पर इसके असर को लेकर चिंताओं के बीच शेयर बाजार कारोबारी सप्ताह के पांचवे दिन भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। आज के ट्रेडिंग सेशन में सेंसेक्स 1,048 अंक या 1.25% टूटकर 82,626.76 के लेवल पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 336 अंक या 1.30% लुढ़ककर 25,471.10 के लेवल पर बंद हुआ। मिड कैप और स्मॉलकैप सेगमेंट भी भारी गिरावट दर्ज किए। BSE 150 मिडकैप इंडेक्स 1.58% नुकसान के साथ बंद हुआ, जबकि BSE 250 स्मॉलकैप इंडेक्स 1.50% की भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडेक्स India VIX 13% से ज्यादा चढ़कर 13 के ऊपर पहुंच गया।
आज बाजार में आई इस भारी बिकवाली की वजह से निवेशकों को 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। दरअसल, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 7 लाख करोड़ रुपये घटकर 465 करोड़ लाख रुपये हो गया। वहीं, गुरुवार को बाजार बंद होने बाद यह 472 लाख करोड़ रुपये था।
शेयर बाजार में आज की गिरावट इतनी भयावह थी कि निफ्टी 50 पैक में केवल 5 कंपनियों के शेयर ही हरे निशान में बंद हो सके। वहीं, 45 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। आज के कारोबार में तेजी दर्ज करने वाले शेयरों में सबसे ऊपर बजाज फाइनेंस का नाम रहा। यह 3.09% चढ़कर बंद हुआ, जबकि आइसर मोटर्स के शेयर 1.56% मजबूत होकर कारोबार की समाप्ति किए। वहीं, SBI LIFE के शेयर 0.84% और SBI 0.33% की बढ़ोतरी के साथ बंद हुए। इसके बाद सिप्ला के शेयरों में 0.13% बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दूसरी तरफ, सबसे अधिक गिरावट हिंडाल्को के शेयरों में दर्ज की गई है। ये 6.08 % लुढ़ककर बंद हुए, जबकि HUL में 4.34% की गिरावट आई है। इसके बाद इटर्नल के शेयर 4.30% और अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर 3.83% के नुकसान के साथ बंद हुए। वहीं, सरकार के स्वामित्व वाली तेल कंपनी ONGC के शेयर 3.20% लुढ़ककर बंद हुए।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, 'घरेलू शेयर बाजार आज गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन भर काफी उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन आखिर में ग्लोबल संकेतों की कमजोरी के आगे बाजार टिक नहीं पाया। निवेशक अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका-भारत ट्रेड डील से मिली शुरुआती खुशी अब फीकी पड़ गई है। AI की चिंताएं बढ़ रही हैं। खासकर भारतीय आईटी कंपनियों पर चिंता गहरा गई है। क्योंकि ये ज्यादातर सस्ते लेबर आर्बिट्रेज के मॉडल पर चलती हैं। ऐसे में नास्डैक की कंपनियों के मुकाबले इनको ज्यादा मुश्किलें आ सकती हैं। इस वजह से निवेशकों का जोश ठंडा पड़ गया और पूरा बाजार लाल निशान में चला गया। ज्यादातर सेक्टरों में बिकवाली का दबाव रहा।
विनोद नायर ने आगे कहा कि मेटल स्टॉक्स में प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली। डॉलर इंडेक्स मजबूत होने और रूस के अमेरिकी डॉलर सिस्टम में वापस लौटने की खबरों से पाबंदियों में छूट मिलने का डर बढ़ गया। इससे मेटल्स कंपनियों को कम दाम मिलने की आशंका जताई जा रही है। रियल्टी सेक्टर भी आज कमजोर रहा। कुछ कंपनियों के खराब नतीजे आए और कई प्रोजेक्ट्स के लॉन्च में देरी की बात सामने आई, जिससे इस सेक्टर में भी बिकवाली बढ़ गई।
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