Stock Market Crash Today 2 April 2026: गुरुवार, 2 अप्रैल को शेयर भारी गिरावट के साथ खुला। यह गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए बयान के बाद आई है। आज के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1,391.82 अंक या 1.90% की गिरावट के साथ 71,742.50 के लेवल पर आ गया, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 431.25 अंक या 1.90% लुढ़ककर 22,248.15 के लेवल पर कामकाज कर रहा था। इस दौरान, सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में ट्रेड कर रहे थे। वहीं, सेंसेक्स पैक के सभी शेयर भी गोता लगा रहे थे। निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल्स, निफ्टी प्राइवेट बैंक और अन्य इंडेक्स 2% से अधिक गिर गए।
निवेशकों को 9 लाख करोड़ रुपये नुकसान
भारतीय शेयर बाजार में आई इस सुनामी के बीच निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है। दरअसल, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड सभी कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में 9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह बुधवार को 422 लाख करोड़ रुपये था, जबकि आज 413 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
ट्रंप के नए बयान से मचा हाहाकार
इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान है। उन्होंने कहा कि ईरान में अमेरिका के मुख्य लक्ष्य लगभग पूरे हो चुके हैं, लेकिन अगले दो-तीन हफ्तों तक ईरान पर और भी आक्रामक हमले किए जाएंगे। ट्रंप के इस बयान से पश्चिम एशिया में तनाव जल्द खत्म होने की उम्मीद कम होती नजर आ रही है। व्हाइट हाउस में राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि ईरान के राष्ट्रपति ने सीजफायर की मांग की है। हालांकि, तेहरान ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे झूठा और बेबुनियादी बताया।
एक्सपर्ट की राय
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट डॉ. वीके विजय कुमार ने कहा, "ट्रंप ने कहा है कि अगले दो-तीन हफ्तों में ईरान पर बहुत सख्त हमला किया जाएगा। इस बयान से बाजार का मूड फिर से खराब हो गया है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में करीब 5% की तेजी आई और यह 105 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका के 10 साल का बॉन्ड यील्ड भी बढ़कर 4.36% हो गया। इससे गोल्ड और सिल्वर की कीमतों पर हल्का दबाव पड़ा है।
दूसरी ओर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार बिकवाली कर रहे हैं। 1 अप्रैल को उन्होंने 8331 करोड़ रुपये की बिकवाली की। हाई क्रूड प्राइस, बढ़ता व्यापार घाटा, रेमिटेंस कम होने का डर और FPI की लगातार बिकवाली के कारण रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। आरबीआई ने डॉलर फ्यूचर्स डील पर कुछ पाबंदियां लगाई हैं, फिर भी रुपया दबाव में है।
हालांकि, ट्रंप के इस बयान को पूरी तरह गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। ट्रंप अपने बयानों में काफी बार बदलाव करते रहते हैं। किसी भी वक्त अपनी बात बदल सकते हैं। मार्च के ऑटो सेल्स के आंकड़े अच्छे आए हैं, जो इस सेक्टर की मजबूती दिखाते हैं। कमजोर बाजार में भी ऑटो कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत मजबूत रह सकते हैं।"
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।