Stock Market Crash: शेयर बाजार में हाहाकार, 2 दिन में ₹10 लाख करोड़ स्वाहा, जानें गिरावट के 5 बड़े फैक्टर्स

Stock Market Crash: शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी बिकवाली से निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। दो दिन में निवेशकों को 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए हैं। आइए विस्तार से इस गिरावट के पीछे के कारण जानते हैं।  

Shivam Shukla
अपडेटेड20 Jan 2026, 03:39 PM IST
Stock Market Crash
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Stock Market Crash Today: शेयर मार्केट में इस सप्ताह हाहाकार मचा हुआ है। सोमवार के बाद मंगलवार को भी बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों के अरबों रुपये डूब गए। दरअसल, ग्लोबल अनिश्चितता और घरेलू मोर्चे पर कमजोर पड़ती उम्मीदों ने मार्केट सेंटीमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है। आज से सेंसेक्स 1000 अंकों ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 25,300 के लेवल को तोड़ दिया। आज के कारोबार में सेंसेक्स 1,065.71 अंक या 1.28% लुढ़ककर 82,180.47 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 353 अंक या 1.38% टूटकर 25,232.50 के लेवल पर बंद हुआ। सबसे ज्यादा मार मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स पर पड़ी। ये दोनों इंडेक्स 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज किए हैं।

दो दिन में निवेशकों को 10 लाख करोड़ डूबे

महज दो दिनों के भीतर निवेशकों को लगभग 10 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए हैं। BSE में लिस्टेड कंपनियों मार्केट कैपिटल शुक्रवार को 468 लाख करोड़ रुपये था, जो आज गिरकर 458 लाख करोड़ रुपये के करीब आ गया है।

निवेशकों को ट्रेड वॉर का डर

शेयर बाजार में इस गिरावट के पीछे की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आक्रामक रुख है। ट्रंप के ग्रीनलैंड को लकेर कड़े रुक ने दुनिया भर में हलचल बढ़ी दी है। ट्रंप ने उनके इन कदम का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। हालांकि, यूरोपीय संघ भी जवाबी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है, जिससे ट्रेड वॉर शुरू होने का खतरा बढ़ गया है।

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घरेलू मोर्चे पर भी कोई पॉजिटिव ट्रिगर नहीं

वहीं, घरेलू मोर्चे पर भी स्थितियां बहुत अच्छी नहीं है। मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के परिणाम अब तक मिलते जुलते आ रहे हैं। नए लेबर कोड की वजह से कंपनियों के प्रॉफिट पर एकमुश्त वित्तीय प्रभाव पड़ा है, जिससे निवेशकों को कोई बड़ा 'पॉजिटिव संकेत नहीं मिल रहा है।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से अपना पैसा तेजी से निकाल रहे हैं। अकेले जनवरी के महीने में अब तक 29,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली हो चुकी है। भारतीय रुपये की कमजोरी और हाई वैल्यूएशन के कारण विदेशी निवेशक अब भारत के बजाय सुरक्षित विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।

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बजट 2026 से उम्मीद और सुरक्षित निवेश का रुख

इसके अलावा, निवेशकों की निगाहें रविवार, 1 फरवरी को पेश होने वाले यूनियन बजट 2026 पर टिकी हुई हैं। निवेशकों को डर है कि सरकार फिसकल डेफिसिट कम करने के लिए सरकारी खर्चों में कटौती ना कर दे। ऐसे में लोग इक्विटी में निवेश के बजाय सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेशक की तरफ भाग रहे हैं। मंगलवार को सोना 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी के भाव भी 3 लाख 20 हजार रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गया है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।

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