
Stock Market Crash Today 9 March 2026: शेयर बाजार में सोमवार को जबरदस्त बिकवाली का दौर देखने को मिला। मिडिल ईस्ट में सैन्य टकराव बढ़ने, क्रूड ऑयल की कीमतों में असाधारण उछाल और ग्लोबल मार्केट्स में गिरावट ने बड़ी गैप-डाउन ओपनिंग को अंजाम दिया। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 2,200 अंक या लगभग 3% टूटकर 76,733 तक पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 इंडेक्स 2.6% की गिरावट के साथ 23,800 के लेवल पर आ गया। BSE मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 2% से ज्यादा टूटे। बाजार में चौतरफा बिकवाली हावी है। महज कुछ मिनटों में ही निवेशकों के 12 लाख करोड़ रुपये डूब गए हैं। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 450 लाख करोड़ से घटकर करीब 438 लाख करोड़ पर आ पहुंचा।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा, "ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 115 डॉलर के पार चली गई है, जिससे अर्थव्यवस्थाओं और शेयर बाजारों को बड़ा झटका लगा है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को अगर मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष लंबा खिंचा तो भारी नुकसान होगा और कच्चा तेल महंगा बना रहेगा। बाजार अब इस तेल संकट के आर्थिक असर को भाव दे रहा है। उन्होंने आगे कहा कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर चाहे उपभोक्ताओं पर पड़े या नहीं, लेकिन महंगाई बढ़ेगी।"
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में तेज उछाल आ गया है। व्यापारी डर रहे हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है। यह दुनिया का सबसे अहम तेल रूट है। क्रूड ऑयल की कीमतें जुलाई 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। बेंचमार्क तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया और 52 सप्ताह के हाई लेवल पर पहुंच गया। ब्रेंट क्रूड में एक दिन में 25% से ज्यादा की तेजी आई और यह 116 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। पिछले हफ्ते भी इसमें 28% की जोरदार बढ़ोतरी हुई थी।
दूसरी तरफ, सोमवार सुबह एशियाई कारोबार में सोना-चांदी की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया। स्पॉट गोल्ड 2.12% टूटकर 5,049 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि स्पॉट सिल्वर 3.51% गिरकर 81.34 डॉलर प्रति औंस रह गया।
सोमवार के कारोबार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड कमजोर होकर 92.3375 के स्तर तक लुढ़क गया। रुपए की कमजोरी ने निवेशकों के सेंटीमेंट को और बिगाड़ दिया, जिससे बिकवाली तेज हो गई। दरअसल, जब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो कैपिटल आउटफ्लो तेज हो जाता है और कंपनियों पर इसका बुरा असर पड़ता है।
सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार बढ़ोतरी के बीच एशियाई बाजारों में तेज गिरावट देखी गई। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 6.22% की भारी गिरावट के साथ 53,000 के लेवल के नीचे आ गया। वहीं, टॉपिक्स 5.22% टूट गया। साउथ कोरिया का कोस्पो इंडेक्स ने 6.68% की गिरावट दर्ज की। वहीं, हॉन्ग कॉन्ग का हैंगसैंग इंडेक्स फ्यूचर्स तेज गिरावट के साथ ओपनिंग के संकेत दे रहा है।
इस समय भारतीय बाजार के एक बड़ी चुनौती विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी हुई है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 2 मार्च से 6 मार्च के बीच भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 21,000 करोड़ रुपये निकाल लिए। यह निकासी मुख्य रूप से कैश मार्केट में हुई, जहां विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर शेयरों की बिक्री की।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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