
Stock Market Crash Today: शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली है। दिन के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 700 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 24,900 के नीचे आ गया। बाजार में यह गिरावट अमेरिका की ओर से ईरान पर हमले के बाद देखने को मिली है। सोमवार को सेंसेक्स 700 अंक या 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,683.47 के लेवल पर इंट्राडे लो बनाया, जबकि निफ्टी 1 प्रतिशत टूटकर 24,891 के स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा, बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
मार्केट में इस सेलऑफ के बाद बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों के मार्केट कैपिटल में 3 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद यह 445 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, शुक्रवार को यह 448 लाख करोड़ रुपये के साथ बंद हुआ था। आइए इस गिरावट के प्रमुख कारणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
अमेरिका की तरफ से ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले के बाद सोमवार को क्रूड ऑयल की कीमतें जनवरी के बाद रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई हैं। सुबह 9:05 बजे तक ब्रेंट क्रूड 1.33 डॉलर या 1.76% बढ़कर 76.79 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि WTI 1.39 डॉलर या 1.88% बढ़कर 75.26 डॉलर प्रति बैरल हो गया। वहीं, जानकारों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में और तनाव बढ़ा, तो क्रूड की सप्लाई बाधित हो सकती है, जिससे कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार भी जा सकती हैं।
ईरान की ओर जवाबी कार्रवाई की आशंकाओं के बीच निवेशकों का सेंटीमेंट बदला है। जिसकी वजह से वैश्विक बाजार में बिकवाली हावी। जिसके बाद भारतीय बाजार भी धराशायी हो गया। जपान के बाहर एशिया-पैसेफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी में सुधार के संकेतों के बावजूद निक्केई इंडेक्स 0.6 प्रतिशत टूट गया।
वहीं,यूरोप में EUROSTOXX 50 फ्यूचर इंडेक्स में 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि FTSE फ्यूचर 0.3 प्रतिशत गिरा और DAX फ्यूचर में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूरोप और जापान तेल औरलिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इंपोर्ट पर अधिक निर्भर हैं, जिसकी वजह से यहां एनर्जी प्राइस में बढ़ोतरी का डर बना हुआ है।
इसके अलावा, ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की खबरों ने भी निवेशकों के मूड को बदला है। यह एक महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा मार्ग है। ग्लोबल न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर दिन ग्लोबल क्रूड ऑयल की सप्लाई का पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यह बंद होता है, तो भारत पर भी इसका बुरा असर देखने को मिलेगा।
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