
2026 Stock Market Outlook: साल 2025 अब अपने आखिरी चरण में चल रहा है। साल खत्म होने में महज 14 दिनों का समय बचा हुआ है। इस साल नैस्डैक में AI स्टॉक्स में तेजी, अमेरिकी डॉलर की रिकॉर्ड कमजोरी और यूरोपीय बाजारों का बेहतर प्रदर्शन ग्लोबल मार्केट के प्रमुख ट्रेंड्स रहे। लेकिन भारतीय शेयर बाजार इन ट्रेंड से अलग रहा। 2026 में एनालिस्टों का अनुमान है कि रिलेटिव वैल्यू ट्रेड जारी रहेगा, लेकिन AI स्टॉक्स के हाई वैल्यूएशन चिंता का विषय हैं।
ग्लोबल स्टॉक मार्केट में 2025 का साल कई अहम बदलाव लेकर आया है। इसने 2026 के लिए एक अजीबोगरीब पैटर्न सामने रखा है। अमेरिकी स्टॉक मार्केट्स ने रिकॉर्ड हाई को छुआ, लेकिन नैस्डैक में AI और हार्डवेयर से जुड़े चुनिंदा स्टॉक्स की तेजी ने सबको चौंका दिया। वहीं, सोने और डिफेंस स्टॉक्स ने भी कमाल का प्रदर्शन किया।
2025 में अमेरिका के सभी प्रमुख इंडेक्स ने अपने रिकॉर्ड हाई को छुआ। हालांकि, नैस्डैक कंपोजिट 22.5% ऊपर चढ़ा, जबकि S&P 500 इंडेक्स 18.5% और डॉव जोन्स 13.0% चढ़ा है। इस तेजी की मुख्य वजह टेक्नोलॉजी शेयरों में तेजी रही है। AI बूम का प्रतिनिधित्व करने वाले स्टॉक्स जैसे एनवीडिया और अल्फाबेट ने क्रमशः 38% और 62% का जबरदस्त रिटर्न दिया।
AI के अलावा, कुछ अन्य सेक्टर भी तेजी में रहे। कमोडिटी स्टॉक्स, खास तौर पर सोने से जुड़ी कंपनियों जैसे न्यूमोंट माइनिंग 148% चढ़कर बेहतरीन प्रदर्शन किया, क्योंकि सोने की कीमत 4,380 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। इसके अलावा, एयरोस्पेस कंपनियों जैसे जीई एयरोस्पेस 81% के साथ तेजी का नेतृत्व में डिफेंस स्टॉक्स ने भी अच्छा प्रदर्शन किया।
साल 2025 में सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि अमेरिकी डॉलर प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले 11% कमजोर हुआ, जो 1973 के बाद सबसे तेज गिरावट है। इस गिरावट ने रिलेटिव वैल्यू ट्रेड को जन्म दिया, जिससे यूरोपीय बाजारों ने अमेरिकी बाजारों से बेहतर प्रदर्शन किया। एमएससीआई यूरोपीय बाजार संघ (EMU) इंडेक्स ने 32% का शानदार रिटर्न दिया। इस रिटर्न में लगभग 10% डॉलर की कमजोरी के कारण और बाकी स्थानीय मुद्रा रिटर्न से आया।
इमर्जिंग मार्केट्स में साउथ कोरिया 75%, ताइवान 27% का शानदार प्रदर्शन किया। साउथ कोरियन मार्केट सैमसंग और SK हाइनिक्स हार्डवेयर कंपनियों पर फोकस होने के कारण AI बूम से बहुत मुनाफा कमाया। तुर्की और भारत को छोड़कर लगभग हर उभरते बाजार को इस रिलेटिव वैल्यू ट्रेड से फायदा हुआ।
भारतीय शेयर बाजार इस साल ग्लोबल ट्रेंड के उलट चला। भारतीय बाजार में रुपये के मामले में केवल सिंगल-डिजिट रिटर्न दर्ज किया गया। विदेशी निवेशकों के लिए यह रिटर्न और भी कम रहा, क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 5% कमजोर हुआ। बाजार पर सबसे बड़ा दबाव TCS के नेतृत्व वाली टेक्नोलॉजी सर्विस कंपनियों पर था, जिसमें रुपये के संदर्भ में 22% की गिरावट आई। म्यूचुअल फंडों से लगातार मांग के बावजूद भारतीय बाजार को AI बूम या रिलेटिव वैल्यू ट्रेड से कोई फायदा नहीं हुआ। मुद्रा के मोर्चे पर रुपये के कमजोर होने की संभावना है ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत कर सके।
जानकारों का कहना है कि 2026 में रिलेटिव वैल्यू ट्रेड जारी रहेगा। यह डिफेंस और कमोडिटी सेक्टरों से इतर अन्य सेक्टर्स तक फैलेगा। । चीन में मजबूत कैश-फ्लो ग्रोथ और आकर्षक वैल्यूएशन वाली कई नॉन-टेक्नोलॉजी कंपनियां हैं, जिन पर निवेशकों की नजर रहेगी। इसके अलावा, जर्मनी और जापान में एक बार-में-एक-पीढ़ी वाले राजकोषीय प्रोत्साहन से उन देशों के कुछ क्षेत्रों को लाभ होने की उम्मीद है। डॉलर प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कमजोर होता रहेगा।
हालांकि, AI कैपिटल मार्केट में उछाल कब चरम पर होगा, यह कहना मुश्किल है। बड़ी कंपनियों के लिए भी औसत प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 30 से ज्यादा होने के कारण वैल्यूएशन बहुत ऊंचे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबी अवधि के निवेशकों को अन्य जगहों पर अवसर तलाशने चाहिए, जबकि स्पेकुलेटर थोड़ी देर और टिके रह सकते हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था ने चौंकाने वाला अच्छा प्रदर्शन किया है। आने वाले साल के लिए मुख्य सवाल यह है कि क्या नॉमिनल जीडीपी में सुधार होगा और क्या कॉर्पोरेट आय बढ़ेगी? यदि ऐसा होता है, तो रुपये के संदर्भ में डबल डिजिट का रिटर्न संभावित है। अगर AI से संबंधित वैश्विक पतन होता है, तो भारतीय स्टॉक निवेशकों को सेल्टर दे सकते हैं।
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