Stock Market Outlook: कल संभल पाएगा बाजार? कच्चे तेल के उबाल के बीच डगमगाता दलाल स्ट्रीट, जानें कल के 3 बड़े ट्रिगर

Stock Market News: भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निफ्टी 50 में 0.16% गिरावट आई, जबकि बीएसई सेंसेक्स 0.04% नीचे बंद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले सप्ताह निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा।

Anuj Shrivastava
अपडेटेड29 Mar 2026, 08:29 AM IST
सोमवार को कैसा रहेगा शेयर बाजार?
सोमवार को कैसा रहेगा शेयर बाजार?

Stock Market News: भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला सप्ताह किसी रोलर-कोस्टर की सवारी से कम नहीं रहा। सप्ताह के शुरुआती तीन सत्रों में मार्केट खूब चमका, लेकिन गुरुवार और शुक्रवार आते-आते चिंताओं के काले बादल छा गए। निवेशकों के बीच छाई बिकवाली के दबाव ने शेयर बाजार निगेटिव बंद हुआ। ऐसे में अब सवाल है कि अगले सप्ताह यानी कल से शेयर बाजार की चाल कैसी रहने वाली है। आइए आंकड़ों को समझते हैं।

सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में निफ्टी 50 करीब 0.16% गिरकर 23,114.50 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, बीएसई सेंसेक्स में 0.04% की मामूली गिरावट दर्ज की गई और ये 74,532.96 के स्तर पर बंद हुआ। मार्केट में आई इस गिरावट ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है।

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मिडिल इस्ट की जंग से बदल रहा बाजार का रूख

एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पोनमुडी आर के अनुसार,पिछले सप्ताह के सुधार के बाद जो राहत दिखाई दी थी, वो अल्पकालिक साबित हुई क्योंकि मध्य पूर्व (Middle East) के घटनाक्रमों ने बाजार की धारणा को पूरी तरह बदल दिया। शेयर बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला सप्ताह पूरी तरह से इवेंट-ड्रिवेन होगा। कल से शेयर बाजार की चाल इन 3 कारणों पर निर्भर करेगी।

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शेयर बाजार को प्रभावित करने वाले 3 ट्रिगर

  • अगले सप्ताह के लिए सबसे बड़ा खतरा मध्य पूर्व से आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान को दी गई नई चेतावनी ने आग में घी डालने का काम किया है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति चिंताजनक है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। यदि यहां लंबे समय तक व्यवधान रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से काफी ऊपर बनी रह सकती हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बुरा सपना साबित हो सकता है।

  • शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल में भले ही 2.10% की गिरावट आई और यह $105.53 पर बंद हुआ, लेकिन ये राहत अस्थायी लग रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऊर्जा लागत में कोई भी नई वृद्धि भारत में मुद्रास्फीति (Inflation) के दबाव को तेज करेगी।
  • सोना और चांदी, जिन्हें अक्सर संकट के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है, इस बार दबाव में दिखे। इसका मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिका द्वारा मध्य पूर्व में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की खबरें हैं। एलकेपी सिक्योरिटीज के जतीन त्रिवेदी के अनुसार, ब्याज दरों में वृद्धि की उम्मीदों ने सोने की तेजी पर ब्रेक लगा दिया है।

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शेयर बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिन निवेशकों के लिए आसान नहीं होंगे। माहौल बेहद चुनौतीपूर्ण और अस्थिर रहने वाला है। ऐसे समय में सबसे बड़ी गलती यही होगी कि कोई भी निवेशक अचानक आई बड़ी रैली या तेज गिरावट देखकर भावनात्मक फैसले ले ले।सही रणनीति यही है कि फिलहाल धैर्य रखें और स्थिति को ध्यान से देखें। 'वेट एंड वॉच' की नीति सबसे सुरक्षित रास्ता हो सकती है।

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