
Stock Market Live Updates 9 March 2026 : शेयर बाजार के लिए सोमवार को ग्लोबल मार्केट्स से निगेटिव संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव से दुनिया भर के बाजार लाल निशान में पहुंच गए हैं। इसी बीच, कच्चे तेल की कीमतों में 20 फीसदी का भारी उछाल दर्ज किया गया है, जिससे यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इससे पहले, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स 1,097 अंक या 1.37% की गिरावट के साथ 78,918.90 के लेवल पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 315.46 अंक या 1.27% लुढ़ककर 24,450.45 के लेवल पर बंद हुआ।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा, “आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उनके प्रभाव पर पैनी नजर रखनी होगी। आम निवेशकों के लिए सलाह है कि वे घबराहट में आकर जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। बाजार में अत्यधिक अस्थिरता रहने वाली है, इसलिए फिलहाल नए निवेश से बचना और बाजार की दिशा साफ होने का इंतजार करना ही समझदारी होगी।”
सोमवार को गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) में भारी गिरावट देखी जा रही है। यह आज सुबह 722 अंकों या लगभग 2% की भारी गिरावट के साथ 23,824 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था। यानी यह सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गैप-डाउन ओपनिंग की ओर इशारा कर रहा है। आज के शुरुआती कारोबार में अफरा-तफरी मचने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने फारस की खाड़ी में कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हमले किए हैं, जिसके जवाब में इजरायल ने तेहरान के तेल डिपो को निशाना बनाया है। इस सैन्य टकराव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में 20 प्रतिशत तक का जबरदस्त उछाल देखा गया है। आज ब्रेंट क्रूड 109.19 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है।
ईरान से आ रही राजनीतिक खबरों ने भी ग्लोबल मार्केट को डरा दिया है। सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईरान ने मोजतबा खामेनेई को देश का अगला सुप्रीम लीडर नामित किया है। मोजतबा को उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद सुप्रीम लीडर बनाया गया है। इस नेतृत्व परिवर्तन और ईरान की आक्रामक सैन्य स्थिति ने निवेशकों को डरा दिया है। निवेशकों को लग रहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल सप्लाई लंबे समय तक बाधित रह सकती है। अगर यह सप्लाई चेन बाधित होती है, तो पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है।
सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार बढ़ोतरी के बीच एशियाई बाजारों में तेज गिरावट देखी गई। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 6.22% की भारी गिरावट के साथ 53,000 के लेवल के नीचे आ गया। वहीं, टॉपिक्स 5.22% टूट गया। साउथ कोरिया का कोस्पो इंडेक्स ने 6.68% की गिरावट दर्ज की। वहीं, हॉन्ग कॉन्ग का हैंगसैंग इंडेक्स फ्यूचर्स तेज गिरावट के साथ ओपनिंग के संकेत दे रहा है।
अमेरिकी शेयर बाजार में भी स्थिति कमजोर बनी हुई है। शुक्रवार को वॉल स्ट्रीट गिरावट के साथ बंद हुआ। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.95% टूटकर 47,501.55 के लेवल पर आ गया। वहीं, S&P 500 इंडेक्स 1.33% की गिरावट के साथ 6,740 के लेवल पर पहुंच गया। इसके बाद नैस्डैक कम्पोजिट 1.59% अंक टूटकर 22,387.68 के स्तर पर आ गया।
इस समय भारतीय बाजार के एक बड़ी चुनौती विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी हुई है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 2 मार्च से 6 मार्च के बीच भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 21,000 करोड़ रुपये निकाल लिए। यह निकासी मुख्य रूप से कैश मार्केट में हुई, जहां विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर शेयरों की बिक्री की।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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