
Stock Market Today 10 April 2026: भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन यानी शुक्रवार, 10 अप्रैल को शानदार रिकवरी के साथ कामकाज की शुरुआत हुई है। यह उछाल ग्लोबल मार्केट्स से मिले मजबूत संकेतों के बाद देखा जा रहा है। आज सुबह एशियाई बाजारों में तेजी दर्ज की गई, जबकि गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी उछाल के साथ बंद हुआ। शुक्रवार को बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स लगभग 490 अंकों की तेजी के साथ 77,121.01 के लेवल पर ओपन हुआ, जबकि कुछ मिनटों में ही यह 630 अंकों के उछाल के साथ 77,261.73 के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह, आज निफ्टी 50 इंडेक्स 105 अंकों की बढ़त के साथ 23,880.55 के लेवल पर खुला, जबकि कुछ ही देर में 203 अंकों की तेजी के साथ 23,978.70 के लेवल पर पहुंच गया।
आज के कारोबार में आईटी शेयरों में दबाव देखने को मिल रहा है। वहीं, फाइनेंशियल शेयरों में तेजी दर्ज की जा रही है। आज सुबह 9:35 बजे सन फार्मा के शेयर लगभग 2.5% की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे थे। इन्फोसिस के शेयर 2.37% की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि टीसीएस के शेयरों 2.04% की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद HCLTech के शेयर 1.46% लुढ़ककर ट्रेड कर रहे थे, जबकि टेक महिंद्रा में 1.40% की कमजोरी आई है।
दूसरी तरफ, एशियन पेंट्स के शेयरों में 2.29% की बढ़ोतरी देखी गई, एक्सिस बैंक के शेयरों में 2.29% का उछाल आया। इसके बाद ICICI Bank के शेयर 1.71% मजबूत होकर कामकाज कर रहे थे, जबकि बजाज फाइनेंस में 1.64% की तेजी देखी गई। इसके अलावा, SBI में 1.61% का उछाल दर्ज किया गया।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें, तो इनमें मिक्स्ड रुख देखने को मिला। निफ्टी मेटल्स, निफ्टी ऑटो, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे। दूसरी ओर, निफ्टी IT और निफ्टी फार्मा लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा,"बाजार अब शनिवार को होने वाली अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का नतीजा देखने का इंतजार कर रहा है। इस बातचीत का फैसला कच्चे तेल की कीमतों पर असर डालेगा, जो आगे बाजार की दिशा तय करेगा। अगर बातचीत से तनाव कम होता है और कच्चा तेल सस्ता हो जाता है, तो बाजार, खासकर भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के बाजार में उछाल आ सकता है। वहीं, अगर बातचीत फेल हो जाती है और कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ जाती हैं, तो बाजार पर दबाव बनेगा।
आगे चलकर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी रहेगी। एफपीआई अब भारत से पैसा निकालकर दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में लगा रहे हैं, जहां 2026 में कंपनियों के मुनाफे में ज्यादा तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालांकि, यह केवल शॉर्ट टर्म रुख हो सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि इस मुश्किल बाजार में भी कई स्टॉक 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर या अपने ऑलटाइम हाई पर पहुंच रहे हैं। निवेशक इन स्टॉक्स को देखें और समझें कि इनकी यह मजबूती किस वजह से है। फंडामेंटली मजबूत और बढ़िया ग्रोथ वाले स्टॉक कमजोर बाजार में भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं।"
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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