
Stock Market Today: शेयर बाजार में इन दिनों काफी हलचल देखने को मिल रही है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील और विदेशी निवेशकों की वापसी ने बाजार के लिए संजीवनी का काम किया है। मौजूदा समय में निफ्टी 50 (Nifty 50) अपने 26,000 के लेवल की ओर बढ़ रहा है। वहीं, सेंसेक्स (Sensex) भी 1,000 अंकों से ज्यादा की तेजी के साथ 84,400 के करीब पहुंच गया है। खास बात यह है कि इंडेक्स अपने ऑलटाइम हाई लेवल से केवल 2% दूर हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही, तो अगले कुछ ही दिनों में हम एक नए रिकॉर्ड को बनते देखेंगे।
पिछले साल जुलाई से लेकर इस साल जनवरी तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजार से लगातार दूरी बनाए रखी थी। वे लगातार बिकवाली कर रहे थे, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ था। लेकिन फरवरी के महीने में बड़ा बदलाव आया है। फरवरी के शुरुआती 9 दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने कैश मार्केट में लगभग 4,900 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। इस बदलाव के पीछे कई ग्लोबल कारण हैं।
दरअसल, अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की संभावना और डॉलर इंडेक्स में गिरावट ने भारतीय बाजार को फॉरेन फंड्स के लिए फिर से आकर्षक बना दिया है। इसके अलावा, लार्ज-कैप स्टॉक्स की वैल्यूएशन अब सही लेवल पर आ गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपये की मजबूती और भारत के बेहतर होते आर्थिक आंकड़ों को देखते हुए ये विदेशी निवेशक आने वाले समय में अपनी खरीदारी और बढ़ा सकते हैं।
शेयर बाजार में इस तेजी का सीधा संबंध देश की मजबूत होती इकोनॉमी से है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से 1 फरवरी को पेश हुए बजट में ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन बनाया है। इसका सीधा असर अब दिखने लगा है। इसके साथ ही भारत का अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ ट्रेड डील एक गेम चेंजर साबित हुआ है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड में चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वीके विजय कुमार ने कहा, एक महत्वपूर्ण मैक्रो डेवलपमेंट प्राइवेट कैपेक्स में आई तेजी है। यह कई सालों से सुस्त पड़ी हुई थी। आंकड़ों की मानें तो लिस्टेड कंपनियों की फिक्स्ड एसेट्स में 13.1% की सालाना बढ़त दर्ज की गई है।
पिछले कुछ दिनों में भारतीय रुपया ने डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखाई है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। रुपया 91.72 के निचले स्तर से रिकवर होकर अब 90.30 के आसपास बना हुआ है। संभावना जताई जा रही है कि मार्च 2026 तक यह 90 के नीचे भी आ सकता है। इसके साथ ही, अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे बड़े बाजारों के साथ हुए ट्रेड डील ने अनिश्चितता के जोखिम को कम कर दिया है।
सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी रिटेल इन्वेस्टर्स का ध्यान शेयर बाजार की तरफ खींचा है। मिड टर्म में कंपनियों के बेहतर रिजल्ट्स की उम्मीद ने रिटेल इन्वेस्टर्स का जोश बढ़ाया है। जानकारों का कहना है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही से कॉर्पोरेट अर्निंग्स में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
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