
Stock Market Closing: भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार का कारोबारी सत्र उतार-चढ़ाव वाला रहा। शुरुआती कमजोरी के बाद सेंसेक्स ने बढ़त हासिल की, लेकिन निफ्टी 50 अपनी पिछली बढ़त को कायम नहीं रख सका। कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 114 अंक ऊपर रहा, जबकि निफ्टी 24,400 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ। बाजार में निवेशकों की नजर एक तरफ वैश्विक संकेतों पर रही, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान तनाव, पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों ने सेंटीमेंट पर दबाव बनाए रखा।
वीकली एक्सपायरी के दिन बीएसई का सेंसेक्स अंत में 114.01 अंक यानी 0.15% की बढ़त के साथ 78,079.96 अंक पर बंद हुआ। बाजार में दिन के दौरान लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी की, लेकिन पूरे बाजार में मजबूत खरीदारी का माहौल नहीं बन पाया। एनएसई का निफ्टी 50 40.50 अंक यानी 0.16% गिरकर 24,395.85 अंक पर बंद हुआ। इस तरह निफ्टी 24,400 के स्तर के नीचे चला गया। बाजार के लिए यह स्तर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में इंडेक्स इसी इलाके के आसपास कारोबार करता रहा है। बुधवार को निफ्टी 50 35.75 अंक गिरकर 24,435.95 पर बंद हुआ था।
बाजार के सेंटीमेंट पर सबसे बड़ा असर अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया की अनिश्चितता का रहा। निवेशक इस बात को लेकर सतर्क हैं कि अगर क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर कच्चे तेल की सप्लाई, शिपिंग लागत और महंगाई पर पड़ सकता है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। ऐसे में तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से देश का इंपोर्ट बिल और चालू खाते का दबाव बढ़ सकता है। इससे रुपये पर भी दबाव आने की आशंका रहती है।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। रॉयटर्स के अनुसार गुरुवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 88.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था।
महंगा कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पेट्रोलियम आयात का खर्च बढ़ सकता है। इसका असर महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि बाजार में निवेशक इस समय तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया की खबरों पर खास नजर रख रहे हैं।
गुरुवार को सेंसेक्स का बढ़ना यह दिखाता है कि बाजार में पूरी तरह बिकवाली का माहौल नहीं था। लेकिन निफ्टी का लाल निशान में बंद होना बताता है कि निवेशक अभी भी नई खरीदारी को लेकर सतर्क हैं। ऊंचे तेल दाम, भू-राजनीतिक जोखिम और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों के बीच निवेशक जोखिम वाली पोजीशन बढ़ाने से बच रहे हैं। इसके अलावा घरेलू बाजार में हालिया कमजोरी के बाद भी निवेशकों को मजबूत ट्रिगर का इंतजार है।
इससे पहले बुधवार को भी भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा था। निफ्टी 50 35.75 अंक यानी 0.15% गिरकर 24,435.95 पर बंद हुआ था। बाजार में उस दिन भी कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू महंगाई के आंकड़ों को लेकर सावधानी बनी रही थी। जुलाई में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.45% हो गई, जो 19 महीने का उच्च स्तर था।
| इंडेक्स | बंद स्तर | बदलाव |
|---|---|---|
| सेंसेक्स | 78,079.96 | +114.01 अंक / +0.15% |
| निफ्टी 50 | 24,395.85 | -40.50 अंक / -0.16% |
बाजार की अगली दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका-ईरान बातचीत, पश्चिम एशिया की स्थिति, रुपये की चाल और विदेशी निवेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो बाजार को राहत मिल सकती है। इसके उलट तनाव बढ़ने पर भारतीय शेयर बाजार में फिर दबाव देखने को मिल सकता है।
गुरुवार को निफ्टी 50 का 24,400 के नीचे बंद होना बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत रहा। हालांकि सिर्फ एक कारोबारी सत्र के आधार पर बाजार की अगली दिशा तय करना सही नहीं होगा। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि निफ्टी आने वाले सत्रों में 24,400 के स्तर को दोबारा हासिल करता है या नहीं।
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