Stock Market Today: दो हफ्ते की तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद

Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 14 अगस्त को दो हफ्ते से जारी तेजी का सिलसिला थम गया। सेंसेक्स 71 अंक यानी 0.09% गिरकर 78,009.25 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 30 अंकों यानी 0.12% की गिरावट रही और यह 24,366 पर बंद हुआ।

Jitendra Singh
अपडेटेड14 Aug 2026, 04:18 PM IST
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Stock Market Today: पूरे सप्ताह में निफ्टी 0.8% और सेंसेक्स 0.6% नीचे रहे।
Stock Market Today: पूरे सप्ताह में निफ्टी 0.8% और सेंसेक्स 0.6% नीचे रहे।

Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में लगातार दो हफ्ते की बढ़त के बाद शुक्रवार को निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। सेंसेक्स और निफ्टी 50 मामूली गिरावट के साथ बंद हुए, लेकिन बाजार के लिए असली चिंता सिर्फ आज की गिरावट नहीं है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने निवेशकों के सामने महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 71 अंक गिरकर 78,009.25 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 30 अंक टूटकर 24,366 पर आ गया। इस गिरावट के साथ दोनों प्रमुख इंडेक्स की लगातार दो सप्ताह से चली आ रही बढ़त पर ब्रेक लग गया।

तेल की कीमत बनी बाजार की सबसे बड़ी चिंता

भारतीय शेयर बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ा जोखिम कच्चे तेल की कीमत बनी हुई है। भारत दुनिया के बड़े क्रूड ऑयल इंपोर्टर्स में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर देश की इंपोर्ट लागत, महंगाई, रुपये और कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है। रॉयटर्स के मुताबिक इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड करीब 4.6% चढ़कर 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचा। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में प्रगति नहीं होने से तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। यही वजह है कि बाजार में निवेशकों ने जोखिम लेने से पहले सावधानी बरती।

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US-ईरान तनाव से बिगड़ा सेंटीमेंट

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार की चाल पर असर डाला। अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और नौसैनिक नाकेबंदी को अनिश्चित अवधि तक जारी रखने की संभावना जताई है। इससे पश्चिम एशिया में तनाव और तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। बाजार के लिए समस्या यह है कि अगर तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है तो महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इससे ब्याज दरों और आर्थिक ग्रोथ को लेकर भी निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है।

पूरे हफ्ते कैसा रहा बाजार का हाल

शुक्रवार की मामूली गिरावट से ज्यादा महत्वपूर्ण पूरे सप्ताह का प्रदर्शन रहा। निफ्टी 50 इस हफ्ते 0.8% गिरा, जबकि सेंसेक्स में 0.6% की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले दोनों इंडेक्स लगातार दो सप्ताह बढ़त में रहे थे। यानी बाजार में अभी तेजी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन ऊंचे तेल दाम और भू-राजनीतिक जोखिमों ने निवेशकों को आक्रामक खरीदारी से पीछे खींचा है।

15 में से 16 बड़े सेक्टर दबाव में

शुक्रवार के कारोबार से ज्यादा अहम पूरे सप्ताह की सेक्टोरल तस्वीर रही। रॉयटर्स के मुताबिक भारत के 16 प्रमुख सेक्टरों में से 15 इस सप्ताह गिरावट में रहे। मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा और इसमें करीब 1.9% की गिरावट आई। वित्तीय शेयरों का प्रमुख इंडेक्स भी करीब 1% नीचे रहा। मिडकैप शेयरों ने हालांकि अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 में सप्ताह के दौरान 0.5% की बढ़त रही, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 0.7% नीचे रहा।

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रिलायंस इंडस्ट्रीज पर भी दबाव

बड़े शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज करीब 1.9% नीचे रहा। इसके पीछे एक वजह MSCI की ओर से अपने प्रमुख इंडेक्स में रिलायंस का वेटेज कम किया जाना भी रहा। रिलायंस का शेयर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में महत्वपूर्ण वजन रखता है। इसलिए इसमें बड़ी चाल का असर व्यापक बाजार के सेंटीमेंट पर भी दिखाई देता है।

Tata Motors PV सबसे बड़े लूजर्स में

शुक्रवार के कारोबार में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स निफ्टी 50 का सबसे बड़ा गिरने वाला शेयर रहा। कंपनी का शेयर करीब 4.3% टूट गया। कंपनी के तिमाही मुनाफे में करीब 80% की गिरावट के बाद शेयर पर दबाव आया। बढ़ती लागत ने कंपनी के नतीजों को प्रभावित किया। इसके उलट LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया का शेयर करीब 9.6% उछला। मजबूत तिमाही नतीजों और पूरे साल के रेवेन्यू लक्ष्य को बरकरार रखने से शेयर में खरीदारी देखने को मिली।

क्या बाजार में बड़ी गिरावट का खतरा है?

फिलहाल शुक्रवार की गिरावट को देखकर किसी बड़ी बाजार गिरावट का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। बाजार की चाल इस समय मुख्य रूप से तेल की कीमत, West Asia की स्थिति, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और कंपनियों के नतीजों पर निर्भर करेगी। ICICI Securities के रिटेल रिसर्च प्रमुख पंकज पांडे के मुताबिक, जब तक ऊंचे कच्चे तेल से जुड़े मैक्रोइकोनॉमिक जोखिम बने रहते हैं, बाजार में एकतरफा तेजी की संभावना कम है।

कंपनियों के लिए क्यों अहम है कच्चा तेल?

तेल सिर्फ पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित नहीं करता। इसका असर लॉजिस्टिक्स, एविएशन, केमिकल्स, प्लास्टिक, पेंट्स, पैकेजिंग और कई मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की लागत पर पड़ता है। अगर क्रूड लंबे समय तक महंगा रहता है तो कंपनियों की इनपुट कॉस्ट बढ़ सकती है। कंपनियां अगर यह लागत ग्राहकों तक पहुंचाती हैं तो प्रोडक्ट महंगे हो सकते हैं और अगर कीमत नहीं बढ़ातीं तो मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। यही कारण है कि बाजार के लिए तेल की हर बड़ी चाल अब महत्वपूर्ण हो गई है।

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