Stock to Buy: शेयर बाजार में आज यानी 7 अप्रैल को मेटल कंपनी, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड और वेदांता लिमिटेड के शेयरों पर फोकस रहने वाला है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन (JPMorgan) ने इन दोनों कंपनियों को लेकर अपनी ताजा रिपोर्ट में बेहद पॉजिटिव रुख अपनाया है। ब्रोकरेज ने न केवल इन शेयरों की रेटिंग को 'न्यूट्रल' से बढ़ाकर 'ओवरवेट' कर दिया है, बल्कि इनके टार्गेट प्राइस में भी बढ़ोतरी की है। जेपी मॉर्गन का मानना है कि इन शेयरों में अभी 22% तक बढ़त की गुंजाइश बाकी है।
इन दोनों स्टॉक्स पर क्यों बुलिश हुआ जेपी मॉर्गन?
दरअसल, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने ग्लोबल लेवल पर एल्युमीनियम की कीमतों को बढ़ा दिया है। जेपी मॉर्गन के मुताबिक, युद्ध की स्थिति के कारण कई स्मेल्टर्स बंद हुए हैं, जिससे बाजार में सप्लाई की कमी आई है। जब डिमांड के मुकाबले सप्लाई कम होती है, तो कीमतों का बढ़ना तय माना जाता है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर एल्युमीनियम की बढ़ती कीमतें भारतीय कंपनियों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बनने वाली हैं।
इसके अलावा, भारतीय रुपये में कमजोरी भी इन कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। इसके पीछे की वजह इनका काफी व्यापार डॉलर आधारित होता है। हालिया समय में बाजार में आई गिरावट के बाद इन शेयरों के वैल्यूएशन काफी आकर्षक हो गए हैं, जिससे निवेशकों के लिए रिस्क कम और फायदे की उम्मीद ज्यादा नजर आ रही है।
हिंडाल्को शेयर प्राइस टार्गेट
ब्रोकरेज फर्म ने हिंडाल्को के शेयरों के लिए 1,125 का नया टार्गेट सेट किया है। यह भाव पिछले बंद लेवल से करीब 20% ज्यादा है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी की अमेरिकी यूनिट नॉवेलिस (Novelis) के लिए बुरा दौर अब खत्म हो चुका है। ओस्वेगो प्लांट के दोबारा शुरू होने और स्क्रैप स्प्रेड से मिलने वाले फायदे के कारण नॉवेलिस की प्रॉफिबिलिटी में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही हिंडाल्को का कॉपर बिजनेस भी आने वाले दिनों में रफ्तार पकड़ सकता है। सल्फ्यूरिक एसिड की कीमतों में आए उछाल ने इस सेगमेंट की कमाई के रास्ते खोल दिए हैं।
वेदांता शेयर प्राइस टार्गेट
वहीं, Vedanta के लिए टार्गेट प्राइस 680 रुपये से बढ़ाकर 850 रुपये कर दिया गया है। यह मौजूदा स्तर से लगभग 22% अधिक है। ब्रोकरेज ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 के अनुमानित EV/EBITDA के आधार पर वेदांता का रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो काफी आकर्षक हो गया है। एल्युमीनियम और जिंक बिजनेस में होने वाली कमाई से कंपनी के ऊपर चढ़े कर्ज के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, कंपनी के तेल और गैस बिजनेस के वॉल्यूम में कुछ कमजोरी देखी जा रही है, लेकिन एल्युमीनियम सेक्टर की मजबूती इस कमजोरी की भरपाई आसानी से कर देगी।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।