
Tata Motors PV Q1 Results: टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के जून तिमाही के नतीजों में दो अलग तस्वीरें सामने आई हैं। भारत में कंपनी की कारों और इलेक्ट्रिक व्हीकल की बिक्री ने मजबूत रफ्तार पकड़ी है, लेकिन लग्जरी कार बिजनेस जगुआर लैंड रोवर (JLR) की कमजोरी ने पूरे कारोबार के मुनाफे पर दबाव डाल दिया। नतीजा यह रहा कि रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट करीब 80% गिर गया।
कंपनी ने गुरुवार, 13 अगस्त को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए। अप्रैल-जून तिमाही में नेट प्रॉफिट ₹775 करोड़ रहा। एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी ने ₹3,924 करोड़ का मुनाफा कमाया था। यानी एक साल में मुनाफे में करीब 80% की गिरावट आई है।
मुनाफे में बड़ी गिरावट के बावजूद कंपनी का कारोबार बढ़ा है। पहली तिमाही में ऑपरेशंस से रेवेन्यू 9% बढ़कर ₹94,827 करोड़ पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹87,141 करोड़ था। हालांकि पिछली यानी मार्च तिमाही के मुकाबले रेवेन्यू करीब 10% कम रहा। मार्च तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹1,04,923 करोड़ था। कंपनी का जून तिमाही का रेवेन्यू बाजार के अनुमान से भी बेहतर रहा। रॉयटर्स के मुताबिक विश्लेषकों ने करीब ₹93,428 करोड़ के रेवेन्यू का अनुमान लगाया था।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के मुनाफे में गिरावट की सबसे बड़ी वजह JLR का कमजोर प्रदर्शन रहा। इसके अलावा कच्चे माल की बढ़ी कीमतों ने कंपनी की लागत बढ़ाई।
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कमोडिटी की कीमतों पर भी असर पड़ा। सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों और कच्चे माल की बढ़ी लागत का रहा। दूसरी तरफ भारत में पैसेंजर व्हीकल वॉल्यूम 46% और इलेक्ट्रिक व्हीकल बिक्री 112% बढ़ी। कंपनी के कुल खर्च रेवेन्यू के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़े, जिसका सीधा असर मार्जिन और मुनाफे पर दिखाई दिया।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के लिए JLR बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि कंपनी के कुल रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा इसी बिजनेस से आता है। जून तिमाही में JLR की होलसेल बिक्री सालाना आधार पर 9.2% घट गई। कंपनी को कई मोर्चों पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा। एक प्रमुख कंपोनेंट सप्लायर के यहां आग लगने से सप्लाई प्रभावित हुई। इसके अलावा पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और पुराने जगुआर मॉडल को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का असर भी बिक्री पर पड़ा।
कम बिक्री का असर JLR की कमाई पर भी पड़ा। जून तिमाही में JLR का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 66 मिलियन पाउंड रहा, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 248 मिलियन पाउंड था। बाजार की चुनौतीपूर्ण स्थिति के कारण कंपनी का वैरिएबल मार्केटिंग एक्सपेंडिचर (VME) भी बढ़ा है। यह पिछले साल के 4.1% से बढ़कर 7.1% हो गया। हालांकि JLR के प्रोडक्ट मिक्स में सुधार देखने को मिला। रेंज रोवर, रेंज रोवर स्पोर्ट और डिफेंडर की हिस्सेदारी कुल मॉडल मिक्स में बढ़कर 80.8% हो गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 77.2% थी।
JLR की कमजोरी के ठीक उलट भारत में टाटा मोटर्स के पैसेंजर व्हीकल बिजनेस ने मजबूत प्रदर्शन किया। अप्रैल-जून तिमाही में घरेलू पैसेंजर व्हीकल वॉल्यूम सालाना आधार पर 46% बढ़ा। कंपनी का कहना है कि उसकी ग्रोथ इस दौरान पूरी इंडस्ट्री के मुकाबले काफी बेहतर रही। घरेलू पैसेंजर व्हीकल बिजनेस का तिमाही रेवेन्यू ₹17,900 करोड़ रहा। इसमें सालाना आधार पर 64.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कंपनी के लिए सबसे मजबूत संकेत इलेक्ट्रिक व्हीकल बिजनेस से आया है। जून तिमाही में टाटा मोटर्स के EV वॉल्यूम में सालाना आधार पर 112% की बढ़ोतरी हुई। कंपनी के मुताबिक इलेक्ट्रिक व्हीकल की व्यापक रेंज, नए मॉडल और पश्चिम एशिया से जुड़ी बाधाओं में कमी आने के बाद मांग सुधरने से EV बिक्री को फायदा मिला। यह आंकड़ा खास तौर पर अहम है क्योंकि भारत में इलेक्ट्रिक कार बाजार में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है और कई घरेलू तथा विदेशी कंपनियां नए मॉडल लॉन्च कर रही हैं।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.