
मुंबई: बाजार विनियामक संस्था भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने देश के सबसे बड़े शेयर बाजार नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को अपना प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (IPO) लाने के रास्ते में एक और हरी झंडी दिखा दी है। सेबी ने एनएसी के आईपीओ के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) पर फाइनल ऑब्जर्वेशन जारी कर आईपीओ की राह साफ कर दी है।
आईपीओ लाने वाली कंपनी डीआरएचपी के जरिए अपने कारोबार, वित्तीय स्थिति, जोखिमों, शेयरधारिता और प्रस्तावित ऑफर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी बाजार नियामक के सामने रखती है। एनएसई के आईपीओ से किन कंपनियों/संस्थाओं को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से फायदा पहुंचने की संभावना है और क्यों, उन पर एक नजर डालते हैं।
विभिन्न स्रोतों के विश्लेषण से पता चलता है कि चार श्रेणियों की कंपनियां/संस्थाएं एनएसई के आईपीओ से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से फायदा बटोर सकती हैं। पहली हैं- एनएसई में भारी हिस्सेदारी वाली कंपनियां, दूसरी हैं- एनएसई के शेयर बेचकर लाभ उठाने वाली कंपनियां। तीसरी हैं- वैसी संस्थाएं जिनका प्रत्यक्ष लाभ कमाने वाली कंपनियों में निवेश है और चौथी हैं- कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम और एक्सचेंज कंपनियां।
एनएससी (NSE) आईपीओ से लाभान्वित होने वाली कंपनियों की एक बेहद चौंकाने वाली और नई लिस्ट सामने आई है। कुछ ऐसी लिस्टेड कंपनियां हैं, जिनके पास मौजूद एनएससी के स्टेक की वैल्यू उनकी खुद की कुल मार्केट कैप के 5% से लेकर 30% तक है। यह गणना एनएससी के संभावित आईपीओ प्राइस बैंड 2,100 रुपये से 2,300 रुपये प्रति शेयर के आधार पर की गई है।
मैथन अलॉयज: इस कंपनी के पास 866 करोड़ रुपये मूल्य का एनएससी स्टेक है, जबकि इसकी अपनी मार्केट कैप केवल 2,844 करोड़ रुपये है।
न्यू इंडिया एश्योरेंस: इसके पास करीब 7,392 करोड़ रुपये का एनएससी स्टेक है, जबकि इसकी खुद की मार्केट कैप लगभग 25,000 करोड़ रुपये है।
वीएलएस फाइनेंस: इसके पास 178 करोड़ रुपये मूल्य का एनएससी स्टेक है, जबकि खुद की मार्केट कैप केवल 800 करोड़ रुपये है।
जीआईसी री: इसके पास 8,547 करोड़ रुपये मूल्य का एनएससी स्टेक है, जबकि खुद की मार्केट कैप करीब 62,000 करोड़ रुपये है।
एल्प्रो इंटरनैशनल: इसके पास 403 करोड़ रुपये का स्टेक है, जबकि खुद की मार्केट कैप 2,955 करोड़ रुपये है।
एलआईसी: इस शेयरहोल्डर के स्टेक की वैल्यू 55,708 करोड़ रुपये है। इसका 5.34 लाख करोड़ रुपये का विशाल मार्केट कैप है।
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड: इसके पास 4,935 करोड़ रुपये का एनएससी स्टेक है। इसका 80,000 करोड़ रुपये के मार्केट कैप है।
जेएम फाइनेंशियल: इसके पास 634 करोड़ रुपये का स्टेक है। इसका लगभग 12,273 करोड़ रुपये के मार्केट कैप है।
| क्रम | शेयरधारक / संस्था का नाम | शेयर अधिग्रहण की औसत लागत ( ₹ प्रति शेयर) |
|---|---|---|
| 1 | द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड | ₹0.32 |
| 2 | नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड | ₹0.32 |
| 3 | स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL) | ₹0.46 |
| 4 | यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड | ₹0.50 |
| 5 | बैंक ऑफ बड़ौदा | ₹0.54 |
| 6 | भारतीय स्टेट बैंक (SBI) | ₹0.80 |
| 7 | जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) | ₹5.26 |
यह आईपीओ 100% ऑफर फॉर सेल (OFS) है। इसका मतलब है कि जो कंपनियां अपने शेयर बेच रही हैं, उनके पास सीधे कैश आएगा और उनकी बैलेंस शीट मजबूत होगी। इनमें से कई कंपनियों की शेयर अधिग्रहण लागत बेहद कम है, जिससे उन्हें बंपर मुनाफा होगा। इनमें शामिल हैं-
भारतीय स्टेट बैंक (SBI): आईपीओ में अपने 2.47 करोड़ शेयर्स बेच रही है, जिसे उसने महज 0.80 रुपये प्रति शेयर की औसत लागत पर दशकों पहले खरीदा था।
बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB): करीब 1.1 करोड़ शेयर्स बेच रही है, जिसकी औसत खरीद लागत केवल 0.54 रुपये प्रति शेयर है।
द न्यू इंडिया एस्योरेंस कंपनी: 1.05 करोड़ शेयर्स बेच रही है, जिसकी औसत खरीद लागत सिर्फ 0.32 रुपये प्रति शेयर है।
GIC Re: 1.06 करोड़ से अधिक शेयर्स बेच रही है, जिसकी औसत खरीद लागत 5.26 रुपये प्रति शेयर है।
स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL): 1.08 करोड़ से अधिक शेयर्स बेच रही है, जिसकी औसत खरीद लागत 0.46 रुपये प्रति शेयर है।
इंडियन बैंक: 24.75 लाख शेयर्स बेचेगी, जिसकी खरीद लागत 18.06 रुपये प्रति शेयर है।
ICICI लोंबार्ड: 23.50 लाख शेयर्स बेचेगी, जिसकी खरीद लागत 169.49 रुपये प्रति शेयर है।
आईएफसीआई: आईएफसीआई सीधे एनएससी के शेयर नहीं बेच रहा है, लेकिन इसकी SHCIL में 52.86% हिस्सेदारी है। चूंकि SHCIL अपने 1.08 करोड़ से ज्यादा शेयरों को इस आईपीओ में बेचकर भारी कैश हासिल कर रही है, इसलिए आईएफसीआई की इस सब्सिडियरी कंपनी की वैल्यू बढ़ेगी और आईएफसीआई को इसका बहुत बड़ा अप्रत्यक्ष वित्तीय लाभ मिलेगा।
एलआईसी: हालांकि एलआईसी इस आईपीओ में अपनी 10.72% हिस्सेदारी से एक भी शेयर नहीं बेच रही है, लेकिन एनएससी की लिस्टिंग के बाद एलआईसी के निवेश पोर्टफोलियो का मूल्य सीधे तौर पर 55,708 करोड़ रुपये से अधिक आंका जाएगा।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE): नियमों के अनुसार, एनएससी खुद के ही प्लैटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हो सकता, इसलिए इसके शेयर बीएसई पर लिस्ट और ट्रेड होंगे। इससे बीएसई के ट्रेडिंग वॉल्यूम और आकर्षण में बड़ी वृद्धि की संभावना है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस आईपीओ को लेकर जो भी उत्साह और उम्मीदें थीं, उनका असर शेयर कीमतों पर पहले ही (Priced-in) पड़ चुका है।अनलिस्टेड मार्केट में एनएसई का शेयर बढ़कर लगभग 1,975 रुपये तक पहुंच चुका है, जिससे इसका कुल मूल्यांकन करीब 4.88 लाख करोड़ रुपये बैठता है।
बाजार की अस्थिरता या रेगुलेटरी नियमों के कारण एनएसई का आईपीओ अनुमानित कीमत से कम प्राइस बैंड पर भी आ सकता है। ऐसा हुआ तो मुनाफावसूली का खतरा होगा। तब आईएफसी, न्यू इंडिया एश्योरेंस और बीएसई जैसे शेयर जो आईपीओ की खबर और तेजी के माहौल के दम पर चांदी काटने वाले हैं, उनमें भारी बिकवाली देखने को मिल सकती है। इसलिए निवेशकों के लिए सलाह है कि केवल माहौल या हाइप को देखकर निर्णय न लें, बल्कि कंपनी की ओर से आधिकारिक रूप से घोषित अंतिम प्राइस बैंड पर पैनी नजर रखें।
Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि निवेश संबंधी कोई फैसला लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि बाजार की स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और हालात अलग-अलग हो सकते हैं। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी जिम्मेदार नहीं है।
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