High Dividend Payout Stocks: शेयर बाजार में निवेश करने वाले ज्यादातर लोगों की नजर हमेशा ऐसे स्टॉक्स पर टिकी रहती है, जो नियमित और भारी डिविडेंड देते हैं। लेकिन केवल ज्यादा डिविडेंड देखना ही काफी नहीं होता है। असली पहचान इस बात से होती है कि कंपनी अपने कुल मुनाफे का कितना हिस्सा शेयरधारकों को बांट रही है। मिंट एडिटोरियल ने ऐसी पांच कंपनियों की पहचान की है, जो वित्तीय वर्ष 2026 में अपने कुल प्रॉफिट से भी ज्यादा डिविडेंड बांटकर सबको चौंका दिया है। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
मुनाफे से ज्यादा कैसे डिविडेंड बांट देती हैं कंपनियां?
दरअसल, जब कोई कंपनी अपनी कुल कमाई का 100% से ज्यादा हिस्सा डिविडेंड के रूप में देती है, तो उसे हाई डिविडेंड पेआउट रेशियो कहा जाता है। इसका मतलब है कि कंपनी ने साल भर में जितना नेट प्रॉफिट दर्ज किया, उससे अधिक रकम शेयरधारकों को बांट दी। यह अतिरिक्त पैसा कंपनी अपने कैश रिजर्व से निकालती है। जब तक कंपनी का बिजनेस बिना भारी कैपिटल खर्च के लगातार मजबूत कैश फ्लो बना रहा है, तब तक यह स्थिति सुरक्षित मानी जाती है।
ICICI प्रूडेंशियल ने 153% पेआउट दिया
वित्तीय वर्ष 2026 में ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी ने 153% का पेआउट रेशियो दर्ज किया। पूरी तरह डेट फ्री इस फंड हाउस को फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर नाममात्र का खर्च करना पड़ता है। पिछले तीन सालों में 30% की चक्रवृद्धि वार्षिक दर (CAGR) से नेट प्रॉफिट बढ़ाने वाली इस कंपनी के लिए यह पेआउट काफी मजबूत नजर आता है।
P&G हेल्थ और कोलगेट का मजबूत कैश फ्लो
इसी तरह हेल्थकेयर सेक्टर की दिग्गज कंपनी प्रॉक्टर एंड गैंबल (P&G) हेल्थ ने 211% का भारी-भरकम पेआउट दिया है। स्थापित ब्रांड्स और 30% से अधिक ऑपरेटिंग मार्जिन के दम पर यह कंपनी बिना किसी बड़े कर्ज के शानदार फ्री कैश फ्लो बना रही है। ओरल केयर मार्केट की प्रमुख कंपनी कोलगेट-पामोलिव इंडिया ने भी 119% का पेआउट रेशियो दिया। नेगेटिव वर्किंग कैपिटल साइकिल और मजबूत ब्रांड वैल्यू के कारण कंपनी का कैश फ्लो इसके नेट प्रॉफिट से भी अधिक रहता है।
ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज ने बांटा ₹400 का डिविडेंड
ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर ने वित्त वर्ष 2026 में ₹400 प्रति शेयर के कुल बितरण के साथ 132% का पेआउट रेशियो दर्ज किया। कंपनी का सॉफ्टवेयर मॉडल कैश-रिच और डेट फ्री है। हालांकि, रिजर्व फंड से मुनाफा बांटने की एक लिमिट होती है, इसलिए भविष्य में 90 से 100% का पेआउट अधिक व्यावहारिक लगता है।
हाइडलबर्ग सीमेंट 118% पेआउट
दूसरी तरफ, हाइडलबर्ग सीमेंट इंडिया ने कर्ज मुक्त होने के बाद 118% का पेआउट दिया। लेकिन सीमेंट जैसे भारी उद्योग में लगातार प्लांट विस्तार और पूंजी निवेश की जरूरत होती है। खंडवा प्रोजेक्ट और आगामी विस्तार योजनाओं के कारण कंपनी का कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ने वाला है। ऐसे में भविष्य में 70 से 80% का पेआउट ही टिकाऊ माना जा सकता है।