Cross-Border Payments: भारत अपने स्वदेशी डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI को दुनिया भर में पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने कहा कि भारत UPI को पूर्वी एशिया में विस्तारित करने के लिए लगा हुआ है। यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) मौजूदा समय में आठ देशों भूटान, सिंगापुर, कतर, मॉरीशस, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और फ्रांस में चालू है। विदेशों में भारत के डिजिटल पेमेंट नेटवर्क की स्वीकार्यता से भारतीय सैलानी विदेशों में लेनदेन के लिए UPI से भुगतान कर सकते हैं।
50% पहुंच गया डिजिटल ट्रांजैक्शन
ग्लोबल इन्क्लूसिव फाइनेंस इंडिया समिट में नागराजू ने कहा कि यूपीआई की बदौलत भारत में डिजिटल लेनदेन लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा, ‘ हमने कुछ देशों में अपनी सेवाएं शुरू कर दी हैं। हम इसका और विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं। खासकर पूर्वी एशिया में हमारा ध्यान केंद्रित है।’
दिसंबर में UPI से हुआ 21 अरब रुपये का ट्रांजैक्शन
DFS के सचिव ने कहा कि दिसंबर 2025 में यूपीआई लेनदेन 21 अरब से ज्यादा हुए। यूपीआई और डिजिटल लेनदेन की सफलता का श्रेय ‘पीएम जन धन योजना’ खातों में कई गुना बढ़ोतरी के साथ-साथ इन खातों में औसत शेष राशि में बढ़ोतरी को भी दिया जा सकता है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का संचालन करता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन की एक पहल भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI), भारत में खुदरा भुगतान एवं निपटान प्रणालियों (IBA) के संचालन के लिए एक प्रमुख संगठन है। नागराजू ने लघु एवं सूक्ष्म इकाइयों को मझोले उद्यमों में विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘ देश में करोड़ों सूक्ष्म इकाइयां होने के बावजूद, वास्तव में सूक्ष्म इकाइयों का मझोले और बड़े उद्यमों में विकास नहीं हो रहा है। मेरा मानना है कि यह तभी संभव होगा जब सूक्ष्म उद्यमों को भरपूर समर्थन, बाजार तक पहुंच और प्रौद्योगिकी एवं हार्डवेयर दोनों के माध्यम से बढ़ावा मिलेगा।’