US Fed Rate Cut Impact on Indian Stock Market: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बीती रात एक बार फिर बेंचमार्क ब्याज दर फेड रेट (Fed Rate) में कटौती का ऐलान किया। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल की अगुवाई वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने इस साल लगातार तीसरी बार 25 आधार अंकों की कटौती की, जिसके बाद ब्याज दर 3.50%-3.75% के दायरे में आ गई। यह साल 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। दरअसल,अमेरिकी इकोनॉमी की रफ्तार बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। इससे पहले, केंद्रीय बैंक ने सितंबर और अक्टूबर में भी 25bps की कटौती की थी। इस तरह, पूरे साल में फेडरल फंड्स रेट में कुल 0.75 प्रतिशत की कमी की गई है।
अगले साल सिर्फ 1 कटौती की उम्मीद
रॉयटर्स के मुताबिक, केवल चार पॉलिसी मेकर्स ने अगले साल सिर्फ एक ही बार दर कटौती का अनुमान जताया है। वहीं, चार ने दो कटौती और बाकी चार ने इससे भी ज्यादा कटौती की संभावना जताई है। इससे पता चलता है कि फेड फिलहाल इकोनॉमी डेटा का इंतजार कर रहा है। इस बात की पुष्टि चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने खुद की। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की अगली बैठक 27-28 जनवरी को तय की गई है।
भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?
दरअसल, जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है, तो इसका सीधा असर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर पड़ता है। ऐसे में डॉलर में कमजोरी आती है और भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी पैसों का प्रवाह बढ़ने की संभावाना बढ़ जाती है। विदेशी निवेशक ज्यादा मुनाफा की तलाश में भारत जैसे बाजारों का रुख करते हैं। फेड के इस फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स 0.25% लुढ़ककर 98.54 पर आ गया, जबकि अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड फ्लैट बना रहा। बॉन्ड यील्ड में बदलाव नहीं होना यह संकेत है कि भारतीय बाजार पर इस फैसले का प्रभाव मामूली ही रहेगा।
IPO की बाढ़ से लिक्विडिटी की समस्या
इक्विनॉमिक्स रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर और रिसर्च हेड, जी चोक्कलिंगम ने कहा, 'हमें नहीं लगता कि फेड के इस कदम का भारतीय शेयर बाजार पर कोई बड़ा असर होगा। घरेलू बाजार में आईपीओ की बाढ़ (Flood of IPOs) के कारण लिक्विडिटी की समस्या बनी हुई है। बाजार में स्थायी बढ़त तभी दिख सकती है जब आईपीओ की यह भीड़ कम होगी।'
इन 2 फैक्टर्स से भारतीय बाजार पर असर कम
वहीं, जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड में चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा, फेड के डॉट प्लॉट के संकेत बताते हैं कि 2026 में एक और 2027 में एक और दर कटौती संभव है। उन्होंने 9-3 के वोट विभाजन को भी हाईलाइट किया, जो शायद 2019 के बाद पहली बार हुआ है। पॉलिसी मेकर्स के बीच यह मतभेद आगामी वर्षों में ब्याज दर से जुड़े फैसलों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आगे कहा कि इस पॉलिसी का भारतीय शेयर बाजार पर सीधा और तत्काल प्रभाव बहुत कम ही होगी।
इसके पीछे दो महत्वपूर्ण फैक्टर हैं। पहला FII की लगातार बिकवाली और कमजोर कॉर्पोरेट अर्निंग्स है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी सरकार के शटडाउन (Government Shutdown) के कारण हालिया अमेरिकी महंगाई के आंकड़े केवल सितंबर तक के ही उपलब्ध हैं। इसलिए बाजार इस फैसले को मिला-जुला मान सकता है।