Infosys का सबसे बड़ा शेयर बायबैक, आपको लेना चाहिए भाग या रहना चाहिए दूर?

Infosys Buyback Tips: इन्फोसिस का 18,000 करोड़ रुपये का शेयर बायबैक निवेशकों के लिए बड़ा मौका है। एक तरफ शेयरों की प्रीमियम प्राइस का लाभ है तो दूसरी तरफ टैक्स के असर का आकलन है। ऐसे में एक्सपर्ट्स की राय अहम हो जाती है।

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड19 Nov 2025, 09:11 PM IST
इन्फोसिस शेयर बायबैक में हिस्सा लेना चाहिए या नहीं?
इन्फोसिस शेयर बायबैक में हिस्सा लेना चाहिए या नहीं?

Infosys Share Buback: आईटी दिग्गज इन्फोसिस ने अपने अब तक के सबसे बड़े 18,000 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक की घोषणा कर दी है, जो 20 नवंबर से 26 नवंबर तक खुलेगा। कंपनी 10 करोड़ शेयर 1,800 रुपये प्रति शेयर की निश्चित कीमत पर खरीदेगी। रिकॉर्ड डेट 14 नवंबर तय की गई, यानी इसी तारीख तक शेयर रखने वाले निवेशक ही इसमें हिस्सा ले सकते हैं।

इन्फोसिस शेयर बायबैक में प्रीमियम का फायदा

10 करोड़ इक्विटी शेयरों का यह बायबैक कंपनी की कुल पेड-अप कैपिटल का करीब 2.41% है। 1,800 रुपये की बायबैक प्राइस शेयर के एलान वाले दिन के मुकाबले लगभग 19 से 21% का प्रीमियम देती है, जो खासकर छोटे निवेशकों के लिए आकर्षक माना जा रहा है।

कौन ले सकते हैं हिस्सा?

बायबैक दो कैटेगरी में बांटा गया है। पहला, छोटे शेयरधारकों के लिए रिजर्व्ड कैटेगरी और जनरल कैटेगरी। रिजर्व्ड कैटेगरी का एंटाइटलमेंट रेशियो 2:11 है, यानी 11 शेयर रखने पर 2 स्वीकार किए जाएंगे। जनरल कैटेगरी के लिए यह 17:706 निर्धारित है। इन्फोसिस के पास रिकॉर्ड डेट पर लगभग 26 लाख छोटे शेयरधारक थे।

प्रमोटर्स बाहर, लेकिन हिस्सेदारी बढ़ेगी

इन्फोसिस के प्रमोटर्स नारायण मूर्ति, नंदन नीलेकणी और सुधा मूर्ति ने बायबैक में हिस्सा न लेने का फैसला किया है। अगर बायबैक पूरा सब्सक्राइब हो गया, तो प्रमोटर शेयरहोल्डिंग बढ़कर 13.37% तक पहुंच सकती है।

बायबैक से पहले शेयरों में उछाल

इन्फोसिस शेयर की कीमत बायबैक के एलान के बाद 3 से 4% उछल गई और 1,542 रुपये तक पहुंच गई। एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनी की मजबूत कैश पोजिशन और लगातार शेयरधारकों को रिटर्न देने की नीति निवेशकों का भरोसा बढ़ा रही है।

क्या आपको यह बायबैक लेना चाहिए?

कई मार्केट विशेषज्ञ इसे रिटेल निवेशकों के लिए अच्छा अवसर मानते हैं।

लाभ: बायबैक प्राइस पर 17–21% तक का प्रीमियम।

जोखिम: नया टैक्स नियम- बायबैक को 'डिम्ड डिविडेंड' माना जाता है, जो इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से पूरी तरह टैक्सेबल है। हाई इनकम टैक्स स्लैब में आने वाले निवेशकों को नेट गेन काफी कम मिल सकता है। कम टैक्स ब्रैकेट वालों के लिए यह अवसर अधिक फायदेमंद माना जा रहा है।

कैपिटल रिटर्न का मजबूत संदेश

कंपनी बायबैक को पूरी तरह इंटरनल कैश रिजर्व से फंड कर रही है, जो उसकी मजबूत फ्री कैश फ्लो जनरेशन को दर्शाता है। इन्फोसिस ने वित्त वर्ष 2025 की पूंजी आवंटन नीति के तहत 85% फ्री कैश फ्लो डिविडेंड और बायबैक के जरिए शेयरधारकों को लौटाने का वादा किया है।

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कंपनी की ग्रोथ धीमी लेकिन स्थिर

विश्लेषकों के अनुसार इन्फोरिस संक्रमण के दौर से गुजर रही है। इसका डील फ्लो स्थिर है लेकिन हाई ग्रोथ वाला माहौल नहीं है। मार्जिन भी बड़े स्तर पर नहीं बढ़ रहे। इस स्थिति में बायबैक EPS सुधारने और ROE बढ़ाने में मदद करेगा, खासकर उन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए जो शेयर टेंडर नहीं करेंगे।

पिछले बायबैक: Infosys की लगातार वापसी की परंपरा

कंपनी 2017 से अब तक चार बड़े बायबैक कर चुकी है...

2017: 13,000 करोड़ रुपये

2019: 8,260 करोड़ रुपये

2021: 9,200 करोड़ रुपये

2022: 9,300 करोड़ रुपये (ओपन मार्केट)

एक्सपर्ट्स की राय

मार्केट एक्सपर्ट नीरज दीवान का भी कहना है कि मौजूदा हालात पिछले बायबैक के मुकाबले बेहतर हैं। वैल्यूएशन पहले से काफी ज्यादा आकर्षक हैं। शेयर काफी समय से निचले दायरे में कंसॉलिडेट हो रहा है, इसलिए इस बार बायबैक का प्रभाव बेहतर हो सकता है।

सेंट्रम ब्रोकिंग के निलेश जैन कहते हैं कि इन्फोसिस का शेयर कम अवधि में 1,550–1,600 रुपये तक जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि रिकॉर्ड डेट से पहले शेयर खरीदना फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि बायबैक से रिटर्न की संभावना है। पिछला बायबैक (तीन साल पहले 1,850 रुपये पर) शेयर प्रदर्शन में बहुत मदद नहीं कर पाया था, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। वैल्यूएशन अब अधिक आकर्षक हैं और शेयर काफी समय से निचले स्तरों पर स्थिर है।

मेहता इक्विटीज लिमिटेड में सीनियर वीपी (रिसर्च) प्रशांत तापसे का मानना है कि इन्फोसिस का यह बायबैक रिटेल निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर है क्योंकि बायबैक कीमत वर्तमान स्तरों पर लगभग 17% प्रीमियम देती है। लेकिन उनका मुख्य चेतावनी बिंदु हैं- 1. टैक्स बड़ा नकारात्मक कारक है, खासकर उन निवेशकों के लिए जो ऊंची टैक्स स्लैब में आते हैं क्योंकि बायबैक के तहत मिलने वाली पूरी राशि टैक्सेबल है।

2. इन्फओसिस TDS काटकर भुगतान करेगी, जिससे कुल राशि और कम हो जाएगी। ऐसे में कम टैक्स स्लैब वाले निवेशकों के लिए यह आकर्षक सौदा हो सकता है। तापसे का कहना है कि लॉन्ग-टर्म कंजर्वेटिव निवेशकों को बेचने की जल्दी नहीं होनी चाहिए, लेकिन शॉर्ट-टर्म निवेशक टैक्स कैलकुलेशन करके बायबैक में हिस्सा ले सकते हैं।

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सोच-समझकर फैसला जरूरी

Infosys का यह बायबैक आकर्षक प्रीमियम और मजबूत कंपनी फंडामेंटल्स का संकेत देता है, लेकिन टैक्स का असर निवेशकों के लिए अंतिम रिटर्न में बड़ा अंतर ला सकता है। जिनका टैक्स स्लैब कम है, उनके लिए यह मौका फायदेमंद साबित हो सकता है, जबकि हाई-स्लैब वाले निवेशकों को गणना करके फैसला लेना चाहिए।

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचार और सिफारिशें संबंधित विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, Mint के नहीं। निवेशकों को किसी भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से सलाह लेने की सलाह दी जाती है।

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