
What is Option Hedging: शेयर बाजार का एक पुराना नियम है कि यहां पैसा कमाना जितना जरूरी है,उससे कहीं ज्यादा जरूरी है कमाए हुए पैसे को बचाना। शेयर बाजार में जब तेजी का दौर होता है, तो हर कोई खुश होता है, लेकिन जैसे ही वैश्विक संकट, युद्ध या आर्थिक मंदी की आहट सुनाई देती है, निवेशकों के हाथ-पांव फूलने लगते हैं। ऐसे में अनुभवी ट्रेडर्स और बड़े फंड मैनेजर्स जिस हथियार का इस्तेमाल करते हैं,उसे ऑप्शन हेजिंग कहा जाता है। अगर आप भी बाजार के उतार-चढ़ाव से परेशान हैं, तो आइए समझते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है और आप इसे कैसे अपना सकते हैं।
अगर आसान शब्दों में कहें तो हेजिंग का मतलब अपने रिस्क को कम करना है। जैसे हम अपनी कार का एक्सीडेंट से बचने के लिए 'इंश्योरेंस' कराते हैं, वैसे ही अपने शेयरों की वैल्यू गिरने के डर से जो बीमा लिया जाता है, उसे हेजिंग कहते हैं। ऑप्शन हेजिंग में आप Call या Put ऑप्शन का इस्तेमाल करके अपने मौजूदा निवेश विपरीत एक पोजीशन बनाते हैं। ताकि अगर बाजार गिरे, तो आपके शेयरों का नुकसान आपके ऑप्शंस के मुनाफे से कवर हो जाए।
हेजिंग कोई रॉकेट साइंस नहीं है,बस आपको सही समय पर सही 'स्ट्राइक' चुननी होती है। इसके लिए तीन तरीके सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं। आइए उनके बारे में जानते हैं।
हेजिंग करना जितना फायदेमंद है, इसमें सावधानी रखना भी उतना ही जरूरी है। हेजिंग करना फ्री नहीं है। हर बार ऑप्शन खरीदने पर आपको प्रीमियम देना पड़ता है। इसे अपने निवेश की 'सुरक्षा लागत' मान सकते हैं। इसके अलावा ऑप्शंस की एक एक्सपायरी होती है। अगर बाजार आपकी उम्मीद के मुताबिक नहीं गिरा, तो समय बीतने के साथ प्रीमियम की वैल्यू कम होती जाएगी (इसे $Theta$ कहते हैं)। इसके साथ ही जरूरत से ज्यादा हेजिंग करना आपके मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर सकता है।
शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि रिटेल निवेशकों को हेजिंग का सहारा तब लेना चाहिए जब बाजार में अनिश्चितता (Volatility) बहुत ज्यादा हो। उदाहरण के लिएबजट का दिन, चुनाव के नतीजे, या अंतरराष्ट्रीय युद्ध जैसी स्थितियां बन रही हों।
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