Option Hedging Tips: क्या है ऑप्शन हेजिंग? शेयर मार्केट क्रैश होने पर भी नहीं लगेगा डर, जानिए कैसे करते हैं इसे

Option Hedging Strategy: ऑप्शन हेजिंग एक तकनीक है जो निवेशकों को शेयर बाजार में गिरावट से बचाने में मदद करती है। ये अपने रिस्क को कम करने का एक तरीका है, जिसमें Call या Put ऑप्शन का उपयोग किया जाता है… 

Anuj Shrivastava
पब्लिश्ड8 Mar 2026, 09:28 AM IST
क्या होती है ऑप्शन हेजिंग
क्या होती है ऑप्शन हेजिंग

What is Option Hedging: शेयर बाजार का एक पुराना नियम है कि यहां पैसा कमाना जितना जरूरी है,उससे कहीं ज्यादा जरूरी है कमाए हुए पैसे को बचाना। शेयर बाजार में जब तेजी का दौर होता है, तो हर कोई खुश होता है, लेकिन जैसे ही वैश्विक संकट, युद्ध या आर्थिक मंदी की आहट सुनाई देती है, निवेशकों के हाथ-पांव फूलने लगते हैं। ऐसे में अनुभवी ट्रेडर्स और बड़े फंड मैनेजर्स जिस हथियार का इस्तेमाल करते हैं,उसे ऑप्शन हेजिंग कहा जाता है। अगर आप भी बाजार के उतार-चढ़ाव से परेशान हैं, तो आइए समझते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है और आप इसे कैसे अपना सकते हैं।

ऑप्शन हेजिंग क्या है?

अगर आसान शब्दों में कहें तो हेजिंग का मतलब अपने रिस्क को कम करना है। जैसे हम अपनी कार का एक्सीडेंट से बचने के लिए 'इंश्योरेंस' कराते हैं, वैसे ही अपने शेयरों की वैल्यू गिरने के डर से जो बीमा लिया जाता है, उसे हेजिंग कहते हैं। ऑप्शन हेजिंग में आप Call या Put ऑप्शन का इस्तेमाल करके अपने मौजूदा निवेश विपरीत एक पोजीशन बनाते हैं। ताकि अगर बाजार गिरे, तो आपके शेयरों का नुकसान आपके ऑप्शंस के मुनाफे से कवर हो जाए।

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कैसे करते हैं हेजिंग?

हेजिंग कोई रॉकेट साइंस नहीं है,बस आपको सही समय पर सही 'स्ट्राइक' चुननी होती है। इसके लिए तीन तरीके सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं। आइए उनके बारे में जानते हैं।

  • सबसे भरोसेमंद तरीका प्रोटेक्टिव पुट होता है, ये उन निवेशकों के लिए है जिनके पास पहले से शेयर हैं। मान लीजिए आपके पास 5 लाख रुपये के 'ABC' कंपनी के शेयर हैं। आपको डर है कि आने वाले नतीजों के कारण शेयर गिर सकता है। आप उसी कंपनी का एक Put Option खरीद लेते हैं। ऐसा करने से अगर शेयर 10% गिरता है, तो आपका पुट ऑप्शन 20-30% या उससे ज्यादा बढ़ जाएगा। ये बढ़ा हुआ मुनाफा आपके पोर्टफोलियो के घाटे को काफी हद तक कम कर देगा।
  • अगर शेयर बाजार साइडवेज है, तो आप कवर्ड कॉल के तरीके को अपना सकते हैं। इस तरीके में जब बाजार न बहुत ऊपर जा रहा हो और न नीचे, तब ये रणनीति काम आती है। अगर आपके पास शेयर मौजूद हैं और आप ऊपर के लेवल का एक Call Option बेच (Sell) देते हैं, तो कॉल बेचने पर आपको जो 'प्रीमियम' मिलता है, वह आपकी जेब में आता है। अगर शेयर स्थिर रहता है, तो यह प्रीमियम आपकी कमाई बढ़ जाती है।

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  • अगर आप पूरे पोर्टफोलियो को लॉस से बचाना चाहते हैं, तो आप इंडेक्स हेजिंग के तरीके को अपना सकते हैं। अगर आपके पास 10-15 अलग-अलग कंपनियों के शेयर हैं,तो सबके पुट खरीदना महंगा पड़ सकता है। ऐसे में निवेशक पूरे Nifty या Bank Nifty का पुट ऑप्शन खरीद लेते हैं। इसे 'ब्रॉड हेजिंग' भी कहते हैं।

हेजिंग करते समय इन 3 चीजों का रखें ध्यान

हेजिंग करना जितना फायदेमंद है, इसमें सावधानी रखना भी उतना ही जरूरी है। हेजिंग करना फ्री नहीं है। हर बार ऑप्शन खरीदने पर आपको प्रीमियम देना पड़ता है। इसे अपने निवेश की 'सुरक्षा लागत' मान सकते हैं। इसके अलावा ऑप्शंस की एक एक्सपायरी होती है। अगर बाजार आपकी उम्मीद के मुताबिक नहीं गिरा, तो समय बीतने के साथ प्रीमियम की वैल्यू कम होती जाएगी (इसे $Theta$ कहते हैं)। इसके साथ ही जरूरत से ज्यादा हेजिंग करना आपके मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर सकता है।

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कब करनी चाहिए हेजिंग?

शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि रिटेल निवेशकों को हेजिंग का सहारा तब लेना चाहिए जब बाजार में अनिश्चितता (Volatility) बहुत ज्यादा हो। उदाहरण के लिएबजट का दिन, चुनाव के नतीजे, या अंतरराष्ट्रीय युद्ध जैसी स्थितियां बन रही हों।

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