रूस के तेल से कितना कमा रही है रिलायंस कि भड़क रहा अमेरिका? आ गया आंकड़ा

रूस से तेल खरीद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक ताजा रिपोर्ट सामने आई है जिसने असल स्थिति पर रोशनी डाली है। इसमें साफ हुआ है कि भारत और कंपनियों को मिलने वाला फायदा उतना बड़ा नहीं है जितना पहले समझा जा रहा था। रिपोर्ट ने इससे जुड़ी कई अहम बातें उजागर की हैं।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड5 Sep 2025, 09:13 PM IST
अमेरिका क्यों बौखलाया? रिपोर्ट ने खोला रूस-भारत तेल सौदे का सच
अमेरिका क्यों बौखलाया? रिपोर्ट ने खोला रूस-भारत तेल सौदे का सच

रूस से कच्चा तेल खरीदने और फिर उसे मुनाफे पर बेचने को लेकर अमेरिका का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। इन सबके बीच एक रिपोर्ट सामने आई है जिसने इस दावे का खंडन किया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत और खासकर रिलायंस को रूसी तेल से होने वाला फायदा उतना बड़ा नहीं है जितना बताया जा रहा था। साथ ही यह भी बताया गया है कि अगर भारत रूस का कच्चा तेल खरीदना बंद कर दे तो दुनिया में महंगाई बेतहाशा बढ़ जाएगी।

कितना है असली मुनाफा?

वैश्विक ब्रोकरेज हाउस CLSA और अमेरिकी इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी तेल से रिलायंस को सालाना करीब 50 करोड़ डॉलर का एक्स्ट्रा मुनाफा होता है। यह उसकी कर-पूर्व आय (EBITDA) का सिर्फ 2.1% है। यानी जितना हल्ला हो रहा है, उतना बड़ा असल फायदा नहीं है।

भारत बंद कर दे खरीद तो?

CLSA ने अपनी रिपोर्ट “रूसी तेल आयात- वास्तविक गुणा-भाग” में बताया कि डिस्काउंट लगातार कम हो रहा है। वित्त वर्ष 2024 में औसतन 8.5 डॉलर प्रति बैरल का फायदा था, जो 2025 में घटकर 3-5 डॉलर और हाल में सिर्फ 1.5 डॉलर रह गया। ऊपर से बीमा, ट्रांसपोर्ट और अन्य लागतें इस छूट को और खा जाती हैं। रिपोर्ट कहती है कि भारत अगर रूसी तेल खरीदना बंद कर दे, तो इंटरनेशनल मार्केट में दाम 90-100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। इसका सीधा असर पूरी दुनिया की महंगाई पर पड़ेगा।

पश्चिमी मीडिया बनाम असलियत

पहले पश्चिमी मीडिया में ये अंदाजा लगाया जाता था कि भारत को रूस से 10 से 25 अरब डॉलर प्रति बैरल कम कीमत पर तेल मिल रहा है। लेकिन CLSA का कहना है कि असली फायदा भारत की जीडीपी का सिर्फ 0.06% ही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर दे, तो इंटरनेशनल मार्केट में दाम 90-100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। इससे पूरी दुनिया में महंगाई का दबाव बढ़ जाएगा। फिलहाल कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से भी कम है।

क्या रिलायंस मानती है सारे नियम?

जेफरीज का कहना है कि रिलायंस ने पश्चिमी प्रतिबंधों का हमेशा पालन किया है। उनके मुताबिक, ''रिलायंस ने ईरान और वेनेजुएला के कच्चे तेल पर पश्चिमी प्रतिबंधों का पालन किया है और हमारे विचार से रूसी कच्चे तेल पर प्रतिबंध लगने की स्थिति में भी इसका पालन होगा।''

यूरोप के नए प्रतिबंध

यूरोपीय संघ ने हाल ही में 18वां प्रतिबंध पैकेज लागू किया है। अब अगर कोई देश पश्चिमी शिपिंग और बीमा सेवाओं का इस्तेमाल करना चाहता है, तो उसे रूसी तेल 47.60 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा पर नहीं खरीदना होगा। इसके साथ ही यूरोपीय संघ ने ये भी तय किया है कि जनवरी 2026 से तीसरे देशों में रूसी कच्चे तेल से बने शोधित पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर भी रोक लग जाएगी।

रिलायंस को आखिर कितना फायदा?

ब्रोकरेज के अनुसार, रिलायंस को रूस से तेल खरीद पर सिर्फ 1.0-1.2 डॉलर प्रति बैरल का एक्स्ट्रा मार्जिन मिलता है। इसका मतलब ये है कि कंपनी की सालाना कर पूर्व आय पर इसका असर सिर्फ 2.1% होगा। इससे पहले हांगकांग स्थित CASA ने भी रूसी तेल के उपयोग से सीमित लाभ का अनुमान लगाया था।

रिलायंस दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स चलाती है और भारत में रूसी तेल की सबसे बड़ी खरीदार है। लेकिन CLSA और जेफरीज की रिपोर्ट साफ कर देती है कि रूस से तेल खरीदकर रिलायंस को सीमित फायदा मिल रहा है। असली खतरा ये है कि अगर भारत यह खरीद बंद करे तो महंगाई का तूफान पूरी दुनिया को झकझोर देगा।

(इनपुट्स- वार्ता/भाषा)

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