
Why Stock Market Crash Today: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आज घरेलू शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन बड़ी गिरावट दर्ज की गई। दलाल स्ट्रीट पर आज सुबह से चौतरफा बिकवाली हावी है। बाजार में आई इस बड़ी गिरावट से कुछ ही घंटों में निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए। दरअसल, आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपये घट गया। दोपहर 2:40 बजे बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 1579.82 अंक फिसलकर 74,454.60 के लेवल पर आ गया। इसी तरह, निफ्टी 50 इंडेक्स 527.15 अंक टूटकर 23,112 के लेवल पर पहुंच गया।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट डॉ. वीके विजय कुमार ने कहा, " पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध की अनिश्चितता के कारण ग्लोबल मार्केट्स कमजोर पड़ गए हैं। अब पूरी तरह अनिश्चित स्थिति में हैं। अमेरिकी बाजारों में आई कमजोरी से लगता है कि अभी रिकवरी में समय लगेगा। ब्रेंट क्रूड लगभग 100 डॉलर के आसपास पहुंच गया है, जिससे बाजार के बुल्स पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। विदेशी निवेशक (FIIs) लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिसके चलते ब्लूचिप शेयर भी दबाव में हैं।
आज अप्रैल 2025 के बाद पहली बार सेंसेक्स 75,000 और निफ्टी ने 23,200 के साइकोलॉजिकल लेवल को तोड़ा है। बाजार में आई बिकवाली के बीच टाटा स्टील, लार्सन एंड टुब्रो और मारुति सुजुकी जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में 3 से 7 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स में शामिल सभी कंपनियों में केवल हिंदुस्तान यूनिलीवर और भारती एयरटेल के शेयर ही हरे निशान में रहे।
शेयर बाजार में गिरावट के पीछे की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष है।अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू हुए दो सप्ताह होने वाले हैं। लेकिन अभी भी युद्ध बंद होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने साफ कर दिया है वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैन्य ठिकाने उनके निशाने पर हैं।
इसके बाद वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। ईरान ने धमकी दी है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखेगा। आपको बता दें कि दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है, तो तेल की कीमतें 200 डॉलर तक भी जा सकती हैं। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने दुनिया भर के देशों को अस्थायी रूप से से रूसी तेल खरीदने की इजाजत दे दी है।
वहीं, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। शुक्रवार को रुपया 92.43 के ऑलटाइम लो लेवल पर पहुंच गया। अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान रुपया में 1.5 फीसदी की गिरावट आई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेल की कीमतों में उछाल से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ रहा है, जिससे रुपया पर दबाव देखा जा रहा है।
इसके अलावा, भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार का सेंटीमेंट खराब हुआ। पिछले 10 दिनों से विदेशी निवेशक लगातार शेयर बेच रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इन 10 कारोबारी सत्रों में उन्होंने लगभग 57,169 करोड़ रुपये की निकासी की है। अकेले गुरुवार को ही 7,050 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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