
8th Pay Commission Latest Update 2025: केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दे दी है। इसके बाद केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। सरकार ने आयोग को 18 महीने की समय-सीमा दी है। इस दौरान 7वें वेतन आयोग की व्यवस्था के तहत महंगाई भत्ता (DA )और अन्य अलाउंस बढ़ते रहेंगे। जानकारों का कहना है कि जनवरी 2026 से कर्मचारियों को एरियर भी मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार 8वां वेतन आयोग लागू होने तक डीए की गणना 7वें वेतन आयोग के मूल वेतन पर ही होती रहेगी। यह व्यवस्था तब तक चलेगी जब तक नई पे स्ट्रक्चर को नोटिफाई नहीं किया जाता। चूंकि डीए में हर छह महीने में संशोधन होता है, इसलिए 18 महीनों की अवधि में तीन बार डीए बढ़ने की संभावना है। जुलाई 2025 में DA 58% है। अगर हर संशोधन में औसतन 3% की बढ़ोतरी मानें, तो अगले 18 महीनों में डीए क्रमशः 61%, 64% और 67% तक जा सकता है।
ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि 8वां वेतन आयोग के लागू होने से पहले नियमित डीए बढ़ोतरी और दो सालाना बढ़ोतरी से कर्मचारियों के बेसिक पे में लगभग 20% का असर दिख सकता है। इसके साथ ही परिवार इकाई (family unit) को 3 से बढ़ाकर 3.5 करने की सिफारिश से भी बेसिक पे पर करीब 20% का अतिरिक्त प्रभाव पड़ेगा।
इन सभी बढ़ोतरी को मिलाकर फिटमेंट फैक्टर 1.58 से बढ़कर लगभग 1.98 तक पहुंच सकता है। इसके ऊपर सरकार आमतौर पर महंगाई के लिए 15% तक की इन्फ्लेशन ग्रोथ फैक्टर भी जोड़ती है, जिससे फिटमेंट फैक्टर लगभग 2.13 होने का अनुमान है। पटेल का कहना है कि यह फिटमेंट फैक्टर काफी हद तक सही है।
8वां वेतन आयोग लागू होने तक सिर्फ डीए ही नहीं, कई अन्य भत्तों में भी बढ़ोतरी की संभावना है।
हाउस रेंट अलाउंस (HRA) बेसिक पे और डीए दोनों से जुड़ा है। डीए बढ़ने पर एचआरए का प्रतिशत भी तय सीमा पार करने पर संशोधित हो जाता है। इस वजह से X, Y और Z कैटेगरी वाले शहरों में एचआरए स्लैब बढ़ने की संभावना है।
टीए भी बढ़ सकता है। कई विश्लेषण बताते हैं कि 8वें वेतन आयोग में टीए की राशि में बदलाव हो सकता है, हालांकि कुछ भत्तों में कटौती या तर्कसंगत बदलाव की आशंका भी है।
कुछ अनुमान बताते हैं कि डीए 50% तक पहुंचने पर सीईए में बढ़ोतरी की संभावना रहती है। यह महंगाई और शिक्षा खर्च से जुड़ा होने के कारण अक्सर संशोधित किया जाता है।
पेंशनर्स के लिए मेडिकल अलाउंस में बढ़ोतरी का आधार पहले भी 7वें वेतन आयोग में रखा गया था। नई पे कमिशन की प्रक्रिया के दौरान एफएमए में संशोधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ड्रेस अलाउंस, रिस्क अलाउंस और स्किल-बेस्ड पे जैसे भत्तों में भी बढ़ोतरी की संभावनाएं जताई गई हैं। कुछ प्रदर्शन आधारित तत्वों को भी शामिल किया जा सकता है।
कृष्णमूर्ति का कहना है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू होने में 2027 तक का समय लग सकता है। अगर समय-सीमा बढ़ी तो मौजूदा संरचना के तहत वार्षिक वृद्धि जारी रहेगी।
संशोधित सुनिश्चित कैरियर प्रगति योजना (MACPS) के तहत जो नियम लागू हैं, वह तब तक चलते रहेंगे। यानी 10, 20 और 30 वर्ष की सर्विस पूरी होने पर सैलरी स्ट्रक्चर अपग्रेड होता रहेगा, लेकिन पोस्ट नहीं बढ़ेगा। एमएसीपी पाने के लिए 'बहुत अच्छा' परफॉर्मेंस बेंचमार्क जरूरी है। अगर किसी कारण से एमएसीपी टलता है, तो आगे की अपग्रेडेशन भी उसी अनुपात में आगे बढ़ जाती है।
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