8th Pay Commission: NC-JCM ने बेसिक सैलरी 69,000 रुपये की मांग क्यों की? यहां जानिए पूरी डिटेल

8th Pay Commission: NC-JCM ने 8वें वेतन आयोग के लिए न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 से बढ़ाकर 69,000 करने और फिटमेंट फैक्टर 3.83 करने की मांग की है, जिसका बड़ा असर सरकारी वेतन संरचना पर पड़ सकता है। NC-JCM ने अपना फाइनल मेमोरेंडम जमा कर दिया है। इसमें उसने कई प्रपोजल दिए हैं।

Jitendra Singh
अपडेटेड17 Apr 2026, 03:04 PM IST
8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों की बड़ी उम्मीदें टिकी हुई हैं।
8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों की बड़ी उम्मीदें टिकी हुई हैं।

8th Pay Commission: नेशनल काउंसिल (ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी) की ड्राफ्ट कमेटी ने अपना फाइनल मेमोरेंडम जमा कर दिया है। इसे NC-JCM के नाम से जाना जाता है। उनकी मुख्य मांगों में से एक यह है कि न्यूनतम मूल वेतन को 7वें वेतन आयोग के 18,000 रुपये से बढ़ाकर 8वें वेतन आयोग में 69,000 रुपये कर दिया जाए। NC-JCM ड्राफ्टिंग कमेटी ने 8वें CPC के लिए 3.833 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। इससे सैलरी में बंपर उछाल आ सकता है।

एनसी-जेसीएम केंद्रीय कर्मचारियों की सबसे बड़ी संस्था है। यह संस्था केंद्र सरकार और केंद्रीय कर्मचारियों के बीच बातचीत के बीच पुल का काम करती है। एक रिपोर्ट के अनुसार इस संस्था ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के सामने फिटमेंट फैक्टर 3.833 रखने का प्रस्ताव दिया है। यानी इसी हिसाब से न्यूनतम सैलरी बढ़ाई जाए। अब सवाल यह उठता है कि आखिर NC-JCM ड्राफ्टिंग कमेटी ने बेसिक सैलरी लगभग चार गुना बढ़ाने की मांग क्यों की है।

NC-JCM ने 69,000 बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांग क्यों की?

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, NC-JCM ने ICMR के हवाले से कहा है कि शारीरिक रूप से मेहनत करने वाले व्यक्ति के लिए प्रति दिन लगभग 3,490 कैलोरी ऊर्जा की जरूरत होती है। NC-JCM ने इसी आधार पर यह आकलन किया कि पांच सदस्यों के परिवार के लिए कितनी खाद्य सामग्री की जरूरत होगी और उसे खरीदने में कितना खर्च आएगा। इस तरह भोजन की लागत को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ा गया, न कि अनुमान के आधार पर। इसके बाद केवल भोजन ही नहीं, बल्कि कपड़े, आवास, ईंधन, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी खर्चों को भी शामिल किया गया।

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इन सभी मदों को जोड़कर एक न्यूनतम जीवन-स्तर के लिए आवश्यक कुल मासिक खर्च निकाला गया। इसके ऊपर महंगाई (inflation) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के प्रभाव को भी जोड़ा गया, ताकि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप वास्तविक वेतन तय किया जा सके। इसी विस्तृत गणना के आधार पर न्यूनतम वेतन को 69,000 तय करने का प्रस्ताव दिया गया है। NC-JCM का तर्क है कि मौजूदा 18,000 का बेसिक वेतन इन आवश्यक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है और इसे वास्तविक जीवन लागत के अनुरूप संशोधित करना जरूरी है।

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सैलरी स्‍ट्रक्‍चर में बड़े चेंज

ड्राफ्ट में मौजूदा सैलरी मैट्रिक्स को आसान बनाने की भी सिफारिश की गई है। इसमें सुझाव दिया गया है कि 7वें वेतन आयोग के तहत आने वाले 18 लेवल को मिलाकर सिर्फ सात बड़े वेतन स्केल बना दिए जाएं। कमेटी के अनुसार, इससे करियर में आगे बढ़ना आसान हो जाएगा। ठहराव कम होगा।

NC-JCM की अन्य मांगें

मेमोरेंडम में यह भी कहा गया है कि वेतन संशोधन सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होना चाहिए, ताकि एंट्री लेवल से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक सभी को इसका लाभ मिल सके। इसके अलावा, वार्षिक वेतन वृद्धि को 3% से बढ़ाकर 6% करने, HRA की न्यूनतम दर 30% तय करने और पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग भी शामिल है।

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हालांकि, इस तरह की व्यापक वेतन वृद्धि का सीधा असर सरकारी वित्त पर पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि इससे राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है, लेकिन साथ ही कर्मचारियों की आय बढ़ने से खपत में भी तेजी आएगी, जिससे अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सकता है। फिलहाल, यह प्रस्ताव 8वें वेतन आयोग के विचार के लिए रखा गया है और अंतिम फैसला सरकार द्वारा आयोग की सिफारिशों के आधार पर लिया जाएगा।

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