
8th Pay Commission Salary Hike: देश में केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन पिछले साल ही कर दिया था और अब रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन-भत्ते में बढ़ोतरी पर फैसला लिया जाएगा। इधर कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। अगर इन प्रमुख मांगों को स्वीकार किया जाता है, तो आने वाले समय में लाखों कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और अन्य सुविधाओं में बड़ा इजाफा हो सकता है।
8वां वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव ला सकता है। AITUC (ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस) ने एक विस्तार से लिस्ट सरकार को सौंपी है। इसमें वेतन वृद्धि, पेंशन सुधार और काम की जगह पर मिलने वाले भत्ते शामिल हैं। इन प्रस्तावों का मकसद वित्तीय सुरक्षा को बेहतर बनाना, ठहराव को कम करना और उचित वेतन सुनिश्चित करना है। आइये जानते हैं AITUC की 10 सबसे बड़ी मागों के बारे में।
AITUC ने कहा है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कम से कम 3.0 होना चाहिए। फिटमेंट फैक्टर वही मल्टीप्लायर होता है जिसके आधार पर कर्मचारियों की नई सैलरी और पेंशन बढ़ाई जाती है। यूनियन का कहना है कि अगर 3.0 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो इससे कर्मचारियों की सैलरी में अच्छा खासा इजाफा हो सकता है और उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत सभी 18 पे-लेवल के कर्मचारियों को हर साल 3% इंक्रीमेंट मिलता है। AITUC ने मांग की है कि आठवां वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर कम से कम 6% सालाना इंक्रीमेंट किया जाए, ताकि बढ़ती हुई जीवन-यापन की लागत से बेहतर तालमेल बिठाया जा सके। अधिक वार्षिक वेतन वृद्धि से समय के साथ आय में लगातार बढ़ोतरी होगी। इससे लंबे समय तक वित्तीय स्थिरता बनी रहेगी। यह बदलाव विशेष रूप से युवा कर्मचारियों को उनके पूरे करियर के दौरान लाभ पहुंचा सकता है।
AITUC ने सैलरी तय करने के लिए इस्तेमाल होने वाली फैमिली यूनिट बढ़ाने की भी मांग की है। 7वें वेतन आयोग में तीन यूनिट (पति, पत्नी और दो बच्चे) का फॉर्मूला माना गया था। अब AITUC ने इसे बढ़ाकर 5 यूनिट करने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें माता-पिता को भी शामिल करने की बात कही गई है।
AITUC ने प्रमोशन सिस्टम में भी बदलाव की मांग की है। यूनियन का कहना है कि 30 साल की सरकारी नौकरी में कम से कम पांच प्रमोशन मिलना चाहिए। उनका मानना है कि मौजूदा सिस्टम में कर्मचारियों को लंबे समय तक प्रमोशन नहीं मिलता है। ऐसे में कर्मचारी लंबे समय तक एक ही पद पर अटके रहते हैं, जिससे करियर में रुकावट आती है।
AITUC ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को खत्म करने की मांग की है। AITUC का कहना है कि ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को फिर से चालू किया जाए। AITUC का तर्क है कि पेंशन एक अधिकार है, कोई लाभ नहीं। इसने हर पांच साल में पेंशन में 5% की बढ़ोतरी का सुझाव भी दिया है। इससे रिटायर होने वालों को रिटायरमेंट के बाद ज़्यादा अनुमानित और स्थिर आय मिलेगी।
यूनियन ने पेंशन कम्यूटेशन की बहाली अवधि को भी कम करने का प्रस्ताव दिया है। मौजूदा समय में पेंशन कम्यूटेशन की राशि 15 साल बाद बहाल होती है। इसे घटाकर 11 से 12 साल करने की मांग की गई है। इसके साथ ही यूनियन ने महंगाई भत्ता (DA) कैलकुलेशन के फॉर्मूले में बदलाव का सुझाव भी दिया है।
यूनियन ने प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) को कर्मचारियों के वास्तविक बेसिक वेतन के बराबर करने की मांग की है। फिलहाल यह बोनस 30 दिन के लिए अधिकतम 7,000 रुपये तक सीमित है। AITUC का कहना है कि इस पर कोई सीमा नहीं होनी चाहिए। यूनियन का कहना है कि इस पर लगी सीमा हटाकर यह कम से कम 18,000 रुपये यानी न्यूनतम 30 दिन की बेसिक सैलरी के बराबर होना चाहिए।
AITUC ने कुछ अतिरिक्त सुविधाओं की भी मांग की है। यूनियन ने रिस्क और हार्डशिप अलाउंस बढ़ाने, कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट, महिलाओं के लिए मेंस्ट्रुअल लीव औरपेटरनिटी लीव (Paternity Leave) देने की भी मांग की है।
यूनियन ने केंद्र सरकार की नौकरियों में कॉन्ट्रैक्ट जॉब, आउटसोर्सिंग और लैटरल एंट्री का विरोध किया है। AITUC ने सरकार से करीब 15 लाख खाली पदों को नियमित भर्ती के जरिए भरने की मांग की है.ताकि कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा और बेहतर करियर अवसर मिल सकें।
AITUC ने सरकार से सभी विभागों में एक समान सैलरी स्ट्रक्चर लागू करने की मांग की है। यूनियन ने यह भी कहा है कि सरकारी कर्मचारियों की सैलरी को प्राइवेट सेक्टर के स्टैंडर्ड से नहीं जोड़ा जाना चाहिए क्योंकि दोनों की जिम्मेदारियां अलग होती हैं।
वेतन आयोग केंद्र सरकार द्वारा गठित एक विशेष समिति होती है, जिसका काम सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन की समीक्षा करना होता है। यह आयोग समय-समय पर कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति, महंगाई और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए वेतन संरचना में बदलाव की सिफारिश करता है। भारत में अब तक कुल सात वेतन आयोग लागू किए जा चुके हैं और फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के अनुसार वेतन और अन्य लाभ दिए जा रहे हैं।
आमतौर पर हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू होता है। 7वां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था, जिसके हिसाब से 8वें वेतन आयोग को जनवरी 2026 से प्रभावी होना चाहिए। हालांकि, सरकार की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन कई कर्मचारी संगठनों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
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