
Addon Credit Card Rules : क्रेडिट कार्ड कंपनियां अक्सर परिवार के सदस्यों के लिए फ्री ऐडऑन कार्ड का ऑफर देती हैं। यह सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन क्या आपको पता है कि ऐडऑन कार्डधारक की एक गलती आपका CIBIL स्कोर बिगाड़ सकती है? आइए जानते हैं कि एडऑन क्रेडिट कार्ड लेने से पहले आपको किन जोखिमों और शर्तों को समझना चाहिए।
ऐडऑन क्रेडिट कार्ड आपके मौजूदा क्रेडिट कार्ड खाते पर ही जारी किया जाता है। इसमें प्राथमिक कार्डधारक ही खाते का असली मालिक होता है। हालांकि, परिवार के सदस्य को एक अलग फिजिकल कार्ड, पिन और नंबर मिलता है, लेकिन दोनों कार्ड्स की क्रेडिट लिमिट साझा होती है। उदाहरण के लिए, अगर आपकी लिमिट 4 लाख रुपये है, तो ऐडऑन कार्ड मिलने के बाद भी यह 4 लाख रुपये ही रहेगी, 8 लाख रुपये नहीं होगी।
सबसे जरूरी बात यह है कि ऐडऑन कार्ड के बिल भुगतान की पूरी जिम्मेदारी प्राथमिक कार्डधारक की होती है। बिल आपके नाम पर ही जेनरेट होगा। अगर आपका जीवनसाथी या बच्चा कार्ड से खर्च करता है और उसे चुकाता नहीं है, तो बैंक आपसे ही पैसे वसूलेगा। डिफॉल्ट होने की स्थिति में कानूनी देनदारी भी सिर्फ आपकी ही होगी।
ऐडऑन कार्ड के इस्तेमाल का सीधा असर प्राथमिक कार्डधारक के क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है। CIBIL और Experian जैसे ब्यूरो आपके भुगतान के तरीके को रिकॉर्ड करते हैं। अगर ऐड-ऑन कार्ड यूजर पेमेंट में देरी करता है, तो स्कोर आपका गिरेगा। अक्सर ऐड-ऑन यूजर इसके जरिए अपना स्वतंत्र क्रेडिट स्कोर या प्रोफाइल नहीं बना पाते हैं।
जोखिम को कम करने के लिए बैंक 'सब-लिमिट' तय करने की सुविधा देते हैं। अगर आपकी कुल लिमिट 4 लाख रुपये है, तो आप ऐड-ऑन कार्ड के लिए 75,000 रुपये की सीमा तय कर सकते हैं। डिजिटल टूल्स और अलर्ट के जरिए आप खर्च को ट्रैक कर सकते हैं, लेकिन याद रखें कि सब-लिमिट के बावजूद अंतिम जोखिम आपका ही रहता है।
| विशेषता | प्राइमरी कार्डधारक (Primary Holder) | ऐड-ऑन कार्डधारक (Add-on User) |
|---|---|---|
| खाते का स्वामित्व | खाते का असली मालिक और मुख्य धारक होता है। | केवल एक द्वितीयक (Secondary) यूजर होता है। |
| भुगतान की जिम्मेदारी | बिल चुकाने की पूरी और कानूनी जिम्मेदारी इन्हीं की होती है। | भुगतान के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं होते। |
| क्रेडिट सीमा (Limit) | पूरी क्रेडिट लिमिट का नियंत्रण और उपयोग कर सकते हैं। | साझा (Shared) लिमिट का उपयोग करते हैं। |
| खर्च पर नियंत्रण | यह ऐड-ऑन कार्ड के लिए 'सब-लिमिट' तय कर सकते हैं। | खर्च करने की सीमा प्राइमरी धारक द्वारा तय की जाती है। |
| क्रेडिट स्कोर पर असर | भुगतान में चूक होने पर CIBIL स्कोर पर सीधा असर पड़ता है। | आमतौर पर इनका स्वतंत्र क्रेडिट स्कोर नहीं बनता है। |
| रिवॉर्ड पॉइंट्स | सभी रिवॉर्ड पॉइंट्स इन्हीं के मुख्य खाते में जमा होते हैं। | रिवॉर्ड्स का उपयोग कर सकते हैं, पर वे प्राइमरी खाते से जुड़े होते हैं। |
| OTP और अलर्ट | मुख्य रूप से सभी ट्रांजेक्शन अलर्ट और OTP इन्हीं को मिलते हैं। | ट्रांजेक्शन के लिए अक्सर प्राइमरी धारक के OTP पर निर्भर रहना पड़ता है। |
| पात्रता (Eligibility) | आय और क्रेडिट स्कोर के आधार पर कार्ड मिलता है। | बिना किसी स्वतंत्र आय के भी कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। |
कई लोगों को लगता है कि दो कार्ड होने से रिवॉर्ड पॉइंट्स दोगुने मिलेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है। रिवॉर्ड और मीलस्टोन की सीमा अकाउंट लेवल पर होती है। सभी पॉइंट्स एक ही जगह यानी प्राइमरी कार्डधारक के खाते में जमा होते हैं। फीस की बात करें तो कई बैंक इसे मुफ्त देते हैं, लेकिन फेडरल बैंक जैसे कुछ संस्थान 100 रुपये + जीएसटी जैसा मामूली शुल्क भी ले सकते हैं।
यह कार्ड उन आश्रितों के लिए अच्छा है जिनकी अपनी आय नहीं है। इसके जरिए वे एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस और प्रीमियम कार्ड के फायदों का लुत्फ उठा सकते हैं। हालांकि, इसमें एक व्यावहारिक दिक्कत ओटीपी (OTP) की है। कई बार ट्रांजेक्शन का ओटीपी प्राथमिक कार्डधारक के फोन पर ही जाता है, जो असुविधाजनक हो सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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