Adventure Deposit: क्या है एडवेंचर डिपॉजिट जिसमें बैंक भी देता है ज्यादा ब्याज? सारी बातें जान लीजिए
High Interest Rate Bank Deposits: बैंक जमा पर ब्याज की कम दरों से परेशान जमाकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए एक नए उत्पाद का विचार आया है। इसे 'एडवेंचर डिपॉजिट' नाम दिया गया है। यह उन जमाकर्ताओं के लिए है जो ज्यादा ब्याज पाने के लिए शेयार बाजार की तरह कुछ जोखिम लेने को तैयार हैं।
Market Linked Deposits: आजकल के कम ब्याज दर वाले माहौल में लोग बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट से मुंह मोड़कर कैपिटल मार्केट के साधनों की तरफ जा रहे हैं। वे ज्यादा रिटर्न पाने के लिए थोड़ा जोखिम उठाने को भी तैयार हैं। ऐसे में एडवेंचर डिपॉजिट का कॉन्सेप्ट सामने आया है। यह बैंक जमाओं को भी म्यूचुअल फंड की तरह बाजार से जोड़ने की शुरुआत हो सकती है। यह नया उत्पाद निवेशकों को अधिक रिटर्न देगा, हालांकि उन्हें इसके लिए कुछ रिस्क लेना पड़ेगा।
कम रेटिंग वाले उधारकर्ताओं को फंडिंग
एडवेंचर डिपॉजिट का उद्देश्य कम रेटिंग वाले उधारकर्ताओं को लोन देना है, जिनकी पहुंच बॉन्ड बाजार तक नहीं है। मौजूदा वित्तीय बाजार में, हाई-रेटेड (AA या AAA) कंपनियों को ही कर्ज आसानी से मिलता है, लेकिन BBB या BB रेटेड कंपनियों को पैसा जुटाना मुश्किल होता है।
जो कंपनियां बॉन्ड बाजार से पैसा नहीं जुटा पातीं, वे बैंकों पर निर्भर रहती हैं। बैंक अक्सर संपार्श्विक समर्थित (collateral backed) लोन देते हैं। यानी लोन लेने वाले को अपनी कोई संपत्ति गिरवी रखनी पड़ती है। ग्रीन बॉन्ड की तरह ही बैंक अब ग्रीन डिपॉजिट भी लेते हैं, जिसका उपयोग ग्रीन लोन देने के लिए किया जाता है। एडवेंचर डिपॉजिट इन सभी विशेषताओं को मिलाकर एक नया डिपॉजिट प्रॉडक्ट बनाएगा।
इन एडवेंचर डिपॉजिट पर जमाकर्ताओं को हाई रिटर्न दिया जाएगा। संभव है कि एक साल की जमा, जिस पर अभी 5.85-6.6% ब्याज मिलता है, उसे 200 बेसिस पॉइंट यानी 2% तक बढ़ाया जा सकता है। इस तरह 7.85% से 8.6% तक ब्याज मिल सकेगा।
ऐसे तय होगी ब्याज दर
शुरुआत में, जब तक जमा राशि को लोन के लिए नहीं लगाया जाता, तब तक गारंटीड रिटर्न बचत जमा दर (saving deposit rate) के बराबर होगा।
लोन देने के बाद जमा दर एक पूर्व-निर्धारित फॉर्मूले पर तय की जाएगी। बैंक जोखिम मूल्यांकन और अन्य लागतों को जोड़कर एक स्प्रेड (फैलाव) लगाएंगे, जैसा कि आज MCLR (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) से ऊपर लोन का प्राइस तय किया जाता है। हर तीन महीने में पुनर्मूल्यांकन होगा, जो उन लोन के पूल के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
अगर कुछ लोन समय पर वापस नहीं आते हैं और बैंक को उसके लिए प्रोविजन (प्रावधान) रखना पड़ता है, तो इसका असर जमाकर्ताओं को मिलने वाली ब्याज से होने वाली कुल आय पर पड़ सकता है। इसमें एडवेंचर डिपॉजिटर्स को थोड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। यदि कर्ज माफ (write off) किए जाते हैं, तो इन जमाकर्ताओं का रिटर्न और भी कम हो जाएगा। हालांकि, लोन के डायवर्सिफिकेशन के कारण पूरे पूल के एक साथ विफल होने की संभावना कम है, इसलिए बेहतर रिटर्न की उम्मीद हमेशा रहेगी।
एडवेंचर डिपॉजिट के तीन सिद्धांत
निर्दिष्ट ऋणों से जुड़ी जमाएं: ये जमा राशियां एक खास वर्ग के लोन से जुड़ी होंगी।
लोन पूलिंग: एसेट सिक्योरिटाइजेशन की तरह लोन को पूल किया जाएगा।
परिवर्तनीय ब्याज दरें: जमा पर ब्याज दर फिक्स्ड नहीं होगी, बल्कि एडवेंचर लोन पूल के प्रदर्शन के आधार पर बदलती रहेगी, जैसा कि फ्लोटिंग रेट बॉन्ड में होता है।
बैंकों के लिए: ज्यादा पैसा जुटा पाएंगे, भले ही उन्हें ऊंची लागत वाली जमाओं का खर्च उठाना पड़े। इससे उनका ओवरऑल प्रदर्शन सुधरेगा।
कम रेटेड उधारकर्ताओं के लिए: यह नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) और फिनटेक फर्मों से लिए गए कर्ज से सस्ता होगा।
जमाकर्ताओं के लिए: ज्यादा रिटर्न मिलेगा, साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि सब-इन्वेस्टमेंट ग्रेड लोन भी कोलैटरल द्वारा समर्थित हैं।
सबसे बड़ी चुनौती
इस तरह की जमाओं के लिए एक बड़ी चुनौती यह है कि जमा बीमा (Deposit Insurance) का कवरेज हटाना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जमाकर्ता बेहतर रिटर्न के लिए स्वेच्छा से कुछ रिस्क लेने को तैयार होते हैं।
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