
8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने बड़ा मुद्दा उठाया है। फाईनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, संघ का कहना है कि करीब 69 लाख केंद्रीय पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशनर्स को आयोग के दायरे से बाहर रखा गया है, जो पूरी तरह गलत और निराशाजनक फैसला है।
AIDEF ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक चिट्ठी लिखकर कहा है कि जो लोग तीन दशक से ज्यादा देश की सेवा कर चुके हैं, उन्हें 8वें वेतन आयोग की टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) में शामिल न करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना है कि पेंशन संशोधन (revision) पेंशनर्स का अधिकार है और उन्हें इससे वंचित करना नाइंसाफी है।
फेडरेशन ने मांग की है कि सरकार ToR में संशोधन करे ताकि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन का भी संशोधन किया जा सके। साथ ही, उन्होंने कम्यूटेड वैल्यू ऑफ पेंशन को 11 साल बाद बहाल करने और हर 5 साल में 5% पेंशन बढ़ाने की सिफारिश पर भी विचार करने की अपील की है।
AIDEF ने यह भी कहा कि 7वें वेतन आयोग में पेंशन संशोधन का प्रावधान था, लेकिन इस बार 8वें वेतन आयोग के Terms of Reference से यह क्लॉज हटा दिया गया है, जिससे रिटायर्ड कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
AIDEF ने यह भी कहा है कि 26 लाख से ज्यादा NPS वाले केंद्रीय कर्मचारी चाहते हैं कि नॉन-कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम (CCS Pension Rules 1972) को दोबारा लागू किया जाए। लेकिन 8वें वेतन आयोग के ToR में यह मांग शामिल नहीं की गई है। संगठन ने सरकार से इसे भी शामिल करने की गुजारिश की है।
8वां वेतन आयोग अब अपने काम में जुट चुका है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई इसकी अध्यक्षता कर रही हैं। बताया जा रहा है कि आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने में करीब 18 महीने लगेंगे, जिसके बाद यह सरकार को सौंपी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स का नया वेतन, भत्ते और पेंशन स्ट्रक्चर कैसा होगा।
वहीं, कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि अगर सरकार ने इस बार भी पेंशनर्स की समस्याओं को अनदेखा किया, तो देशभर में नाराजगी बढ़ सकती है। यूनियनों का मानना है कि 8वां वेतन आयोग सिर्फ वेतन तय करने वाला बोर्ड नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की उम्मीदों से जुड़ा फैसला है, इसलिए सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
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