Akshaya Tritiya 2026: भारत में सोना एक निवेश विकल्प ही नहीं बल्कि परंपरा और भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है। धनतेरस, दिवाली और अक्षय तृतिया जैसे शुभ अवसर पर लोग सोना को लक्ष्मी के रूप में सोना खरीदते हैं। इस साल 19 अप्रैल को मनाए जाने वाले अक्षय तृतीया 2026 के पर्व को लेकर बाजार में हलचल तेज है। हालांकि, इस बार की स्थिति पिछले सालों के मुकाबले थोड़ी अलग नजर आ रही है। सोने की आसमान छूती कीमतों ने एक तरफ पुराने निवेशकों को मालामाल कर दिया है, वहीं नए खरीदारों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। नए निवेश सोच रहे हैं कि क्या मौजूदा भाव पर दांव लगाना सही होगा या नहीं?
पिछले एक साल में 60% का रिकॉर्ड रिटर्न
आंकड़ों पर नजर डालें, तो अक्षय तृतीया ने भारतीय निवेशकों को कभी निराश नहीं किया है। इस साल भी कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला है। अप्रैल 2025 की अक्षय तृतीया से लेकर अब तक भारतीय हाजिर बाजार में सोने की कीमतों में लगभग 60% का जबरदस्त उछाल आया है। यह लगातार 9वां साल है जब सोने ने निवेशकों को भारी मुनाफा दिया है।
रिकॉर्ड हाई से 30 हजार सस्ता हुआ सोना
इस साल की शुरुआत में सोने ने 180,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड लेवल को छूकर सबको चौंका दिया था। लेकिन, फिलहाल कीमतों में कुछ राहत देखने को मिल रही है। मौजूदा समय में सोना अपने हाई लेवल से करीब 16% यानी 30,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट चुका है। 1.50 लाख रुपये के आसपास का यह स्तर उन लोगों के लिए एक एंट्री पॉइंट की तरह देखा जा रहा है, जो पिछले साल तेजी के डर से खरीदारी नहीं कर पाए थे। मार्केट एक्सपर्ट्स इसे एक 'हेल्दी करेक्शन' मान रहे हैं।
अक्षय तृतीया को धनतेरस के बाद देश में सोने की खरीदारी का दूसरा सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। लेकिन इस बार भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण पैदा हुई महंगाई ने ग्राहकों के हाथ थोड़े रोक दिए हैं। चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी एक्सपर्ट कावेरी मोरे के अनुसार, मांग बनी हुई है, लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी ने आम आदमी को बड़ी और आक्रामक खरीदारी करने से रोक दिया है।
इस बार नहीं दिख रही पहले जैसी रौनक
आमतौर पर त्यौहार से पहले जो रौनक सर्राफा बाजारों में दिखती थी, इस बार वह भी नहीं दिख रही है। मुंबई के एक बड़े सर्राफा डीलर ने बताया कि इस समय ज्वेलर्स की तरफ से होने वाली खरीदारी काफी कम है। बाजार का माहौल फिलहाल वैसा नहीं लग रहा जैसा अक्षय तृतीया से पहले हुआ करता था। दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन का केंद्रीय बैंक लगातार 17 महीनों से सोने की खरीदारी कर रहा है, जो यह संकेत देता है कि ग्लोबल लेवल पर बुलियन पर भरोसा अभी भी बहुत मजबूत है।
इस अक्षय तृतिया पर सोना खरीदें या नहीं?
इस समय सबसे अहम सवाल है कि क्या इस बार अक्षय तृतिया पर सोना खरीदना चाहिए या नहीं? विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में तेजी का दौर खत्म नहीं हुआ है, बस इसकी रफ्तार धीमी पड़ सकती है। INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल देसाई के मुताबिक, इस समय सोने को केवल ज्यादा रिटर्न देने वाले निवेश के रूप में न देखकर अपने पोर्टफोलियो को मजबूती देने वाले स्टेबलाइजर के तौर पर देखना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।