Akshaya Tritiya 2026: देश में अक्षय तृतिया 2026 से ठीक पहले सोने और चांदी से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, विदेशी बाजारों से आने वाले सोने और चांदी के नए ऑर्डर पर बैंकों ने फिलहाल रोक लगा दी है। इससे टनों के हिसाब से कीमती धातु कस्टम पर फंसी हुई है। सरकार की ओर से इसके इंपोर्ट को लेकर जरूरी औपचारिक मंजूरी अभी तक जारी नहीं की गई है। इस देरी का सीधा असर बाजार में सोने-चांदी की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है।
सरकार की तरफ से नहीं जारी हुआ नॉटिफिकेशन
आमतौर पर हर नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) एक नॉटिफिकेशन जारी करता है। इस आदेश के जरिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से सोना और चांदी के इंपोर्ट की मंजूरी हासिल करने वाले बैंकों की लिस्ट तैयार की जाती है। पिछला आदेश मार्च 2025 में जारी हुआ था, जिसकी समय सीमा 31 मार्च 2026 को खत्म हो चुकी है। अब अप्रैल का आधा महीना बीत जाने के बाद भी नया नॉटिफिकेशन नहीं आया है।
5 टन सोना और 8 टन चांदी पर संकट
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस सरकारी प्रक्रिया में देरी से लगभग 5 टन सोना और 8 टन चांदी मुंबई जैसे बंदगाहों और कस्टम सेंटर्स पर क्लीयरेंस में फंसी हुई है। बैंकों और इंपोर्ट्स का कहना है कि जब तक पुराना स्टॉक क्लियर नहीं होता है और सरकार की ओर से हरी झंडी नहीं मिलती है, तब तक नई डील करना रिस्की है। यही वजह से फिलहाल विदेशी सप्लायर्स को नए ऑर्डर नहीं भेजे जा रहे हैं।
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?
बता दें कि भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और चांदी का सबसे बड़ा खरीदार है। हमारी मांग का लगभग पूरा हिस्सा विदेशों से आयात होकर ही आता है। ऐसे में सप्लाई चेन में आने वाली यह रुकावट घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कमी पैदा कर सकती है। टाइम्स ऑफ इडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र मेहता का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबी खिंचती है, तो अक्षय तृतीया जैसे बड़े त्योहार के बाद बाजार में प्रीमियम बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि ग्राहकों को गहने खरीदने के लिए सोने की वास्तविक कीमत से अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।