
MF Investment Tips: म्यूचुअल फंड का विज्ञापन हमेशा आपको यही दिखाता है कि फंड ने कितना ज्यादा पैसा बनाकर दिया है। मगर मार्केट में 15 मिनट से ज्यादा बिताने वाला हर व्यक्ति जानता है कि केवल रिटर्न के आंकड़े का कोई मतलब नहीं होता। ये आंकड़े यह नहीं बताते कि ये रिटर्न कैसे आए, इनमें कितना जोखिम शामिल था, क्या ये बने रहेंगे, या जो फीस आप दे रहे हैं उसके लिए यह रिटर्न सही है या नहीं। फंड की असल परफॉर्मेंस जानने के लिए आपको सिर्फ आकर्षक रिटर्न नंबर से आगे देखना होगा और फैक्टशीट में छिपे कुछ फाइनेंशियल रेशियो को समझना होगा। ये रेशियो फंड की असली 'पर्सनैलिटी' सामने लाते हैं।
अल्फा ऐसा रेशियो है जो बताता है कि आपके फंड ने जोखिम को ध्यान में रखते हुए निफ्टी 50 या सेंसेक्स जैसे अपने बेंचमार्क की तुलना में कितना ज्यादा रिटर्न दिया है। दूसरे शब्दों में कहें तो अगर आपका फंड उतना ही जोखिम ले रहा है जितना बेंचमार्क, तो क्या वह बेंचमार्क से ज्यादा रिटर्न दे रहा है?
गुड रिटर्न्स ने प्राइम वेल्थ फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड के कोफाउंडर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर चक्रवर्द्धन कुप्पला की राय बताई है। उनके अनुसार, म्यूचुअल फंड एक फीस (एक्सपेंस रेशियो) लेते हैं, जो मैनेजर की विशेषज्ञता के लिए होती है। यह फीस तभी जायज है जब मैनेजर लगातार बाजार को मात दे रहा हो, न कि सिर्फ मैच कर रहा हो।
अगर अल्फा नेगेटिव या फ्लैट है, तो इसका मतलब है कि आप खराब परफॉर्मेंस के लिए ज्यादा पैसा दे रहे हैं, और हो सकता है कि फंड की स्ट्रैटेजी केवल 'क्लोसेट इंडेक्सिंग' हो- यानी वह इंडेक्स की नकल कर रहा है लेकिन आपसे एक्टिव फंड की फीस ले रहा है। एक अच्छे एक्टिव फंड का लक्ष्य लगातार 1-2% पॉजिटिव अल्फा हासिल करना होना चाहिए।
शार्प रेशियो बताता है कि आपका फंड जोखिम को रिटर्न में बदलने में कितना कुशल है। यह रेशियो रिस्क-फ्री रेट से ज्यादा मिले रिटर्न को फंड की अस्थिरता (Standard Deviation) से भाग देकर निकाला जाता है। यह बताता है कि लिए गए जोखिम की हर यूनिट पर आपको कितना रिटर्न मिल रहा है।
मान लीजिए दो फंड ने 12% रिटर्न दिया। जिस फंड ने यह रिटर्न कम अस्थिरता के साथ हासिल किया, वह स्पष्ट रूप से बेहतर है। शार्प रेशियो सिर्फ परफॉर्मेंस को नहीं, बल्कि स्मार्ट परफॉर्मेंस को पुरस्कृत करता है।
कुप्पला बताते हैं कि बुल मार्केट में शार्प रेशियो अस्थायी रूप से ऊंचा दिख सकता है। इसलिए निवेशकों के लिए यह जानना ज्यादा जरूरी है कि गिरते बाजार में शार्प रेशियो कैसा रहता है। यह सच्ची जोखिम दक्षता दिखाता है। सामान्य तौर पर, 1.0 से ऊपर का शार्प रेशियो स्वीकार्य माना जाता है, और 2.0 से ऊपर उत्कृष्ट।
बीटा मापता है कि आपका फंड अपने बेंचमार्क के मुकाबले कितना ज्यादा या कम हिलता-डुलता है।
कुप्पला के अनुसार, बीटा यह नहीं बताता कि फंड अच्छा है या नहीं, बल्कि यह बताता है कि आप किस तरह की अस्थिरता के लिए तैयार हो रहे हैं। 1.5 का बीटा वाला फंड बाजार से कहीं ज्यादा तेजी से ऊपर या नीचे जाएगा। यदि आप स्थिरता चाहते हैं, तो यह एक रेड फ्लैग है।
अगर किसी एक्टिव फंड का बीटा 1 के करीब है और अल्फा कम है, तो यह इंडेक्स की नकल कर रहा है। ऐसे में आप सिर्फ ज्यादा फीस दे रहे हैं, जो एक कम लागत वाला इंडेक्स फंड बेहतर ढंग से कर सकता है।
स्टैंडर्ड डेविएशन बताता है कि किसी फंड का रिटर्न अपने औसत से कितना अलग होता है।
चक्रवर्द्धन कुप्पला बताते हैं कि स्टैंडर्ड डेविएशन सभी अस्थिरता को एक जैसा मानता है, चाहे वह लाभ हो या हानि। इसलिए, अगर कोई फंड अचानक 25% ऊपर चला जाता है, तो भी वह हाई डेविएशन दिखाएगा। यही वजह है कि स्टैंडर्ड डेविएशन को कभी भी अकेले नहीं देखना चाहिए।
इसे शार्प रेशियो के साथ मिलाकर देखें। अगर शार्प हाई है और एसडी भी हाई है, तो इसका मतलब है कि फंड जोखिम ले रहा है लेकिन उसे अच्छी तरह से मैनेज कर रहा है। यदि कोई फंड खुद को 'कंजर्वेटिव' बताता है लेकिन उसका एसडी हाई है, तो उसकी स्ट्रैटेजी और उसकी दावे में तालमेल नहीं है।
यह रेशियो बताता है कि एक साल में फंड के पोर्टफोलियो का कितना हिस्सा खरीदा या बेचा गया। 100% टर्नओवर का मतलब है कि मैनेजर ने 12 महीनों में पूरा पोर्टफोलियो बेचकर बदल दिया।
कुप्पला के अनुसार, 30 से 40% तक कम टर्नओवर रेशियो का मतलब है कि मैनेजर 'खरीदो और पकड़कर रखो' (buy-and-hold) की स्ट्रैटेजी पर कायम है। यानी उन्होंने अपना होमवर्क किया है और स्टॉक को बढ़ने का मौका दे रहे हैं। यह उनका दृढ़ विश्वास दिखाता है।
इसके उलट, 100% से ऊपर के हाई टर्नओवर का मतलब है कि पोर्टफोलियो लगातार बदल रहा है। यह मैनेजर की अनिर्णयता, ट्रेंड के पीछे भागने या बाजार को टाइम करने की कोशिश हो सकती है, जो कि कोई स्ट्रैटेजी नहीं है। हाई टर्नओवर से ट्रांजैक्शन कॉस्ट भी बढ़ती है।
कुप्पला की सलाह है किलार्ज-कैप या डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड जैसे आपके कोर म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स के लिए टर्नओवर रेशियो नियंत्रित सीमा में होना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि यह मजबूत अल्फा के साथ जुड़ा हो- जिसका अर्थ है कि बार-बार खरीदने-बेचने से फंड को अच्छा रिटर्न मिल रहा है।
फंड रिटर्न सिर्फ परीक्षा के नतीजे की तरह हैं। लेकिन ये रेशियो आपको बताते हैं कि छात्र ने पढ़ाई कैसे की, क्या उसने चीटिंग की, और क्या वह अगले साल भी अच्छा स्कोर करता रहेगा। अगर आप 10, 20, या 30 साल तक वेल्थ बना रहे हैं, तो आप हाल के हाई रिटर्न से सम्मोहित होने का जोखिम नहीं उठा सकते। आपको प्रक्रिया की गुणवत्ता को समझने की जरूरत है। ये छिपे हुए रेशियो ठीक यही बताते हैं।
Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। मिंट हिंदी का सुझाव है कि निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से सलाह लें। मिंट हिंदी आपके किसी निवेश या उसके परिणाम के लिए बिल्कुल भी उत्तरदायी नहीं है।
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