AMFI Data March 2026: मिडिल ईस्ट युद्ध की वजह से भारतीय शेयर बाजार की हलचल के बीच मार्च महीने में म्यूचुअल फंड निवेशकों ने इक्विटी फंड्स पर जमकर भरोसा दिखाया है। वहीं, दूसरी ओर डेट फंड्स (Debt Funds) से बड़े पैमाने पर निकासी हुई है। मार्च में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 56% बढ़कर 40,450 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जबकि फरवरी में 25,977 करोड़ रुपये था। इसके साथ, स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स में भी भारी रौनक रही।
टैक्स सेविंग स्कीम में आउटफ्लो
स्मॉलकैप में 6,263 करोड़ रुपये और मिडकैप में 6,063 करोड़ रुपये का निवेश आया। वैल्यू और फोकस्ड फंड्स में महीने-दर-महीने के आधार पर लगभग 196% और 169% की जबरदस्त बढ़त देखी गई है। हालांकि, टैक्स सेविंग ELSS फंड्स और डिविडेंड फंड्स से निवेशकों ने मामूली निकासी की है।
डेट फंड्स से 2.94 लाख करोड़ की निकासी
AMFI डेटा के मुताबिक, डेट म्यूचुअल फंड्स (Debt Mutual Funds) के लिए मार्च का महीना काफी भारी रहा। इस कैटेगरी से कुल 2.94 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई है। इससे पहले, फरवरी में इसी सेगमेंट में 42,106 करोड़ रुपये का निवेश आया था। दरअसल, मार्च महीने के आखिर में अक्सर कंपनियां और संस्थागत निवेशक अपने टैक्स पेमेंट और एडवांस टैक्स की लायबिलिटी को पूरा करने के लिए लिक्विड और ओवरनाइट फंड्स से पैसा निकालते हैं। यही वजह है कि लिक्विड फंड्स से सबसे ज्यादा 1.34 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई है। इसके अलावा, मनी मार्केट फंड्स और ओवरनाइट फंड्स में भी बड़ी बिकवाली देखी गई। हालांकि, क्रेडिट रिस्क फंड्स में गिरावट सबसे कम रही। इसमें 329 करोड़ रुपये की निकासी हुई।
हाइब्रिड और पैसिव फंड्स
हाइब्रिड फंड्स पर नजर डालें, तो मार्च में इस कैटेगरी से 16,538 करोड़ रुपये का आउटफ्लो हुआ है, जबकि पिछले साल इसी दौरान निकासी का आंकड़ा काफी कम था। हाइब्रिड सेगमेंट में केवल 'मल्टी-एसेट एलोकेशन' और 'अग्रेसिव हाइब्रिड' फंड्स ही ऐसे रहे जहां निवेशकों ने पैसा लगाया। मल्टी-एसेट फंड्स में 5,212 करोड़ रुपये का निवेश आया, जिससे यह पता चलता है कि लोग अब सोने, चांदी और इक्विटी के मिश्रण वाले पोर्टफोलियो को पसंद कर रहे हैं। दूसरी ओर, इंडेक्स फंड्स और ETF जैसे पैसिव फंड्स में भारी उछाल देखा गया। इन स्कीम्स में निवेश 122% बढ़कर 30,767 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
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